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इंग्लिश बोलने से डरते थे अभिषेक शर्मा, UPSC में 69 रैंक हासिल कर बने IAS अधिकारी, जानिए कैसे मिली कामयाबी

अभिषेक को अपनी मां को देखकर UPSC का ख्याल आया था। अभिषेक का परिवार जम्मू-कश्मीर का रहने वाला है। उनकी मां एसडीएम ऑफिस में क्लर्क की नौकरी करती हैं। वह मां से मिलने अक्सर जाते रहते थे और यहां अधिकारियों को देखकर उन्होंने यूपीएससी एग्जाम देने का फैसला किया।

IAS अधिकारी अभिषेक शर्मा (Photo- Youtube Screen Grab)

अभिषेक शर्मा की कहानी उन सभी लोगों के लिए प्रेरणा जो UPSC का सीधा कनेक्शन अंग्रेजी से समझते हैं। अभिषेक ने एक इंटरव्यू में बताया था कि उन्हें अंग्रेजी बोलने में काफी परेशानी होती थी, लेकिन वह IAS अधिकारी बनना चाहते थे। अभिषेक को दो प्रयासों में असफलता हासिल हुई थी। उन्होंने अपनी हिंदी सुधारने पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया और आखिरकार तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की।

अभिषेक ने कहा, ‘भले ही आप किसी भी मीडियम से पढ़े हुए हों, आप कड़ी मेहनत कर यूपीएससी की परीक्षा में सफलता प्राप्त कर सकते हैं। आप जिस भाषा में अपने जवाब को बेहतर तरीके से दे पाएं, इंटरव्यू के दौरान उसी भाषा का प्रयोग करें। जरूरी नहीं है कि आप अंग्रेजी में बोलें। वे कहते हैं कि ईमानदारी से यूपीएससी की तैयारी करें और असफलताओं से घबराएं नहीं। लगातार मेहनत करने वालों को सफलता जरूर मिलती है।’

अभिषेक को अपनी मां को देखकर UPSC का ख्याल आया था। अभिषेक का परिवार जम्मू और कश्मीर का रहने वाला है। उनकी मां एसडीएम ऑफिस में क्लर्क की नौकरी करती हैं। वह मां से मिलने अक्सर जाते रहते थे और यहां अधिकारियों को देखकर उन्होंने यूपीएससी एग्जाम देने का फैसला किया। इसके बाद वह यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आ गए थे।

यूपीएससी में हासिल की थी 69 रैंक: दिल्ली में तीन महीने तक तैयारी करने के बाद अभिषेक शर्मा वापस जम्मू-कश्मीर लौट गए और वहीं रहकर आगे की तैयारी की। हालांकि इस बीच उन्हें कई बार असफलता हाथ लगी, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। 2017 यूपीएससी सिविल सर्विस परीक्षा में 69 रैंक हासिल कर IAS बने थे। हाईस्कूल में अभिषेक के 90.20% और इंटरमीडिएट में 93.3% नंबर आए। उन्होंने साल 2014 में ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी।

अभिषेक शर्मा का मानना है, ‘इस परीक्षा की तैयारी के लिए नोट्स भी बनाए जा सकते हैं। नोट्स से आराम से इस परीक्षा की तैयारी की जा सकती है। क्योंकि कई बार सिलेबस लंबा होने के कारण परेशानी होती है, लेकिन नोट्स इस परेशानी को थोड़ा आसान बना देते हैं। परीक्षा नजदीक होने की स्थिति में इन नोट्स से रिवीजन की जा सकती है। ऐसे में सेल्फ-स्टडी भी बहुत जरूरी है।’

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