पिता थे बस कंडक्टर, मां का अपमान देख लिया अफसर बनने का फैसला और छुपकर की तैयारी, आज हैं सख्त IPS

शालिनी अग्निहोत्री (IPS Shalini Agnihotri) की पहचान एक कड़क आईपीएस ऑफिसर के रूप में रही है। कंडक्टर पिता की बेटी शालिनी बिना कोचिंग के ही पहले प्रयास में यूपीएससी (UPSC) की परीक्षा पास कर ली थी।

IPS Shalini agnihotri
IPS शालिनी अग्निहोत्री (फोटो- इंस्टाग्राम)

कभी-कभी एक अपमान भी प्रेरणा का स्त्रोत बन जाता है। कौन जानता था कि बस में मां के साथ सफर कर रही मासूम को एक आदमी की बदतमीजी, अफसर बनने के लिए प्रेरित कर देगा।

हिमाचल के एक छोटे से गांव की रहने वाली शालिनी अग्निहोत्री (IPS Shalini Agnihotri) आज एक कड़क आईपीएस ऑफिसर के रूप में जानी जाती है। शालिनी जब छोटी थी, तब अपनी मां के साथ बस में कहीं जा रही थी। उनकी मां के पीछे एक व्यक्ति सीट पर हाथ रखकर बैठा था, जिसकी वजह से इन्हें दिक्कत हो रही, जब इनकी मां ने हाथ हटाने के लिए कहा तो वो झल्ला गया और कहा कि तुम कहीं की डीसी हो जो तुम्हारी बात मान लेंगे।

मां के इस तरह का अपमान देखकर नन्हीं शालिनी ने तय किया कि एक दिन वो जरूर अफसर बनेगी। एक बस कंडक्टर की बेटी के लिए यह एक दूर का सपना था, लेकिन उसे अपनी मेहनत पर पूरा भरोसा था।

यूपीएससी (UPSC) क्लियर करने के बाद मीडिया से बात करते हुए शालिनी ने कहा था कि वो स्कूल में अपने शुरुआती दिनों में एक बैक-बेंचर और औसत दर्जे की छात्रा थी। हालांकि, उन्होंने जमकर मेहनत की और दसवीं में अच्छा प्रदर्शन किया। दसवीं में इनका 92.2 प्रतिशत नंबर रहा, लेकिन बारहवीं में उन्हें तब निराशा हाथ लगी जब उनका नंबर 77.4 प्रतिशत आया।

बारहवीं के बाद शालिनी ने हिमाचल प्रदेश एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लिया, जहां से उन्होंने ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की। इसी के दौरान उन्होंने यूपीएससी की तैयारी भी शुरू कर दी थी। शालिनी यूपीएससी की तैयारी तो कर रही थी, लेकिन उन्होंने अपने घर वालों को इसके बारे में नहीं बताया था।

शालिनी अग्निहोत्री (IPS Shalini Agnihotri) को डर था कि इतनी बड़ी परीक्षा में अगर उन्हें सफलता नहीं मिली तो उनके परिवार वाले निराश हो जाएंगे। इसी डर से उन्होंने घर वालों को इसके बारे में नहीं बताया। हालांकि शालिनी का परिवार पढ़ाई के मामले में उनके साथ हमेशा से खड़ा रहा था।

यूपीएससी एग्जाम की तैयारी के लिए शालिनी (IPS Shalini Agnihotri) ना तो कोई कोचिंग गईं, ना ही किसी बड़े शहर में तैयारी की। शालिनी अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी की परीक्षा पास कर ली और 258वीं रैंक के साथ उन्हें आईपीएस के लिए चुन लिया गया।

ट्रेनिंग के बाद उनकी पोस्टिंग हिमाचल में हुई, जहां उन्होंने नशे के डीलरों के खिलाफ अभियान चलाया। इस दौरान कई नशे के सौदागर पकड़े गए। शालिनी की छवि एक कड़क पुलिस ऑफिसर की रही है।

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