UPSC क्लियर हुआ लेकिन सर्विस लिस्ट में नहीं आया नाम, प्लान बी के साथ फिर की तैयारी, तब जाकर IAS बनें जयंत

महाराष्ट्र के जयंत (IAS jayant Mankale) जब यूपीएससी (UPSC) की तैयारी करने की सोचे तो उनके लिए रास्ता बहुत ही कठिन था। 75 प्रतिशत तक आंख की रोशनी खो चुके जयंत, आर्थिक तंगी के बीच भी पढ़ाई करते रहे। उनकी मेहनत का ही नतीजा है कि आज वो आईएएस (IAS) हैं।

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आईएएस जयंत मंकले (फोटो- वीडियो स्क्रीनशॉट Muruganantham-UPSC-AIR-119)

जीवन में जब संघर्ष बड़ा होता है तो सफलता पाने की खुशी भी दुगुनी हो जाती है। कुछ ऐसी ही कहानी है आईएएस जयंत मंकले (IAS jayant Mankale) की। जीवन में जयंत ने संघर्ष को ही अपना रास्ता बनाया और आज उस मुकाम पर हैं, जहां उनकी सारी कठिनाईयां अब खत्म हो चुकी है।

जयंत एक बीमारी (रेटिनाइटिस पिगमेंटोसा) के बाद अपनी आंखों की रोशनी 75 प्रतिशत तक खो चुके थे। पिता की मौत के बाद उनकी पेंशन से जब घर नहीं चल सका और पढ़ाई पर असर पड़ने लगा तो जयंत की मां ने अचार बनाना शुरू कर दिया। इसके बाद खुद जयंत भी प्राइवेट नौकरी करने लगे।

द बेटर इंडिया के अनुसार महाराष्ट्र के बीड़ में जन्में जयंत बचपन से दिव्यांग नहीं थे। 2015 में उन्हें एक बीमारी हुई और आंखो की रोशनी 75 प्रतिशत तक चली गई। जयंत के पिता की मृत्यु तब हो गई, जब वो अपनी स्कूली पढ़ाई के प्रारंभिक चरण थे। 10 साल की उम्र में पिता को खोने के बाद, उनका और उनके परिवार का जीवन पूरी तरह से अंधकारमय होने लगा था।

पिता की पेंशन से घर चलना मुश्किल हो रहा था, तो जयंत की पढ़ाई कहां से होती। फिर मां और दो बड़ी बहनों ने हिम्मत दिखाई और घर पर ही अचार बनाकर उसे बेचना शुरू कर दिया। जब दो पैसे आने लगे तो जयंत की पढ़ाई भी चलने लगी और घर खर्च भी निकलने लगा। स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद जयंत ने मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की।

यूपीएससी (UPSC) क्लियर करने के बाद जयंत (IAS jayant Mankale) ने मीडिया से बात करते हुए कहा था कि उन्होंने अपनी आंखों की रोशनी खो दी थी, लेकिन अपने जीवन की रोशनी नहीं खोई थी। वो बताते हैं- 2015 में एक निजी फर्म में काम करते हुए मैं 75 प्रतिशत नेत्रहीन हो गया। उसके बाद मेरा जीवन पूरी तरह से अंधकार में था। मेरे पिता का पहले ही निधन हो चुका था और पैसे कमाना एक बड़ा काम था।

जयंत ने यूपीएससी (IAS jayant Mankale) की पढ़ाई मराठी भाषा में ही की थी। जयंत की आर्थिक स्थिति इतनी अच्छी नहीं थी कि वो ऑडियोबुक और स्क्रीन रीडर का खर्च उठा पाते। लेकिन जहां चाह, वहां राह… जयंत के साथ भी कुछ ऐसा ही रहा। उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के साथ-साथ लोकसभा और राज्यसभा टीवी को अपना पढ़ाई का जरिया बना लिया। रोज समाचार सुनना, व्याख्यान सुनना, इंटरनेट पर लेखकों के भाषण सुनना, ये उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया था।

जिंदगी में मुश्किलें आती गईं और मेहनत के बल पर जयंत संघर्ष करते हुए यूपीएससी (UPSC) की तैयारी करते रहे। 2017 में उन्होंने यूपीएससी क्लियर भी कर लिया। इनका ऑल इंडिया रैंक 923 आया था, लेकिन किसी रूल की वजह से उन्हें सर्विस नहीं मिल पाई। इससे उन्हें बहुत बड़ा झटका लगा, लेकिन संघर्षों से निकले जयंत फिर भी हार नहीं माने और फिर से तैयारी में लग गए।

हालांकि इसके बाद उन्हें प्लान बी पर भी काम करना शुरू कर दिया। जयंत (IAS jayant Mankale) प्लान बी के रूप में बैंक की परीक्षा दी और वहां सिलेक्शन भी हो गया, लेकिन उनका सपना तो यूपीएससी क्लियर करना था। 2019 में जयंत यूपीएससी क्लियर करके आईएएस के लिए चुन लिए गए। इसके बाद उन्हें गुजरात कैडर मिला और अभी वो वहां अपनी सेवा दे रहे हैं।

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