मां बनाती थी बीड़ी, खुद मिल में करते थे मजदूरी, बीवी-बच्चों का मिला साथ और संघर्ष से बन गए IAS

आईएएस अशोक कुमार भार्गव (IAS Ashok kumar Bhargava) का जन्म इंदौर की एक बस्ती में हुआ था, जहां उन्हें पढ़ाई जारी रखने के लिए मजदूरी भी करनी पड़ी। पहले राज्य सिविल परीक्षा में उन्होंने टॉप किया फिर यूपीएसएसी (UPSC) एग्जाम में सफलता हासिल की।

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IAS अशोक कुमार भार्गव (फोटो- screenshot Bansal News MPCG)

मन में लगन हो और मंजिल तक पहुंचने का जज्बा हो तो कोई भी मुसीबत आड़े नहीं आ सकती है। ना तो गरीबी, ना तो शादी और ना ही बच्चे। आम तौर पर ये मानना है कि शादी और बच्चों के बाद पढ़ाई करने का समय नहीं मिल पाता है, लेकिन मध्यप्रदेश के रहने वाले अशोक कुमार भार्गव (IAS Ashok kumar Bhargava) ने इस धारणा के बिलकुल उलट सफलता पाई है।

आईएसएस अशोक कुमार भार्गव का जीवन शुरू से ही कठिनाइयों से भरा हुआ था। मध्यप्रदेश के इंदौर शहर के रुस्तम चाल में अपनी जीवन की शुरूआत करने वाले आशोक भार्गव जब कॉलेज तक पहुंचे तबतक उनकी शादी हो चुकी थी, भार्गव तीन बच्चों के पिता बन चुके थे, लेकिन उन्होंने तब भी हार नहीं मानी और मेहनत करते रहे। इसी मेहनत और संघर्ष की बदौलत आज वो आईएसएस (IAS) के रूप में अपनी सेवा दे रहे हैं।

अशोक कुमार भार्गव (IAS Ashok kumar Bhargava) का परिवार रुस्तम चाल में रहता था। पिता सिनेमा ऑपरेटर थे, मां घर चलाने के लिए बीडी बनाती थी। यहीं से किशोर अशोक ने पढ़ाई के साथ-साथ घर चलाने में भी सहयोग करने लगा। कभी आइस्क्रीम बेचा तो कभी मिल में मजदूरी की। बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया। इसके साथ ही भार्गव अपनी पढ़ाई भी जारी रखे। तब उन्हें चिमनी की लाइट में पढ़ाई करनी पड़ती थी।

भार्गव की शादी स्कूली शिक्षा के दौरान ही हो गई थी। कॉलेज तक आते-आते वो तीन बच्चों के पिता बन चुके थे। शुरूआत में भार्गव को अधिकारी या यूपीएससी से कोई लेना देना नहीं था। भार्गव अपनी पढ़ाई जारी रखे हुए थे और इसी क्रम में उन्होंने पीएचडी कर ली। इसके बाद रतलाम के कन्या महालिद्यालय में उन्हें नौकरी मिल गई और वो इस नौकरी से संतुष्ट भी थे।

यहीं से अशोक कुमार भार्गव (IAS Ashok kumar Bhargava) का मन बदला और वो यूपीएससी (UPSC) की तैयारी में जुट गए। यहां भार्गव ने जिला अधिकारी का रूतबा देखकर उससे प्रभावित हुए और अधिकारी बनने का मन बना लिया।

इसके बाद उन्होंने राज्य सिविल परीक्षा में टॉप किया। इस एग्जाम में पास होने के बाद वो डिप्टी कलेक्टर के रूप में तैनात रहे, लेकिन भार्गव, आईएएस (IAS) की तैयारी करते रहे। दो बार असफल रहने के बाद अशोर भार्गव (IAS Ashok kumar Bhargava) को तीसरी बार में सफलता मिली और आईएएस के लिए चुने गए। जिसके बाद वो मध्यप्रदेश के कई जिलों में कलेक्टर रहे और विकास में अपना योगदान देते रहे हैं।

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