IAS Success Story: नक्सली क्षेत्र की चुनौतियों के बावजूद UPSC में बजाया डंका, तीसरे प्रयास में नम्रता जैन ने हासिल की 12वीं रैंक

नम्रता जैन मूल रूप से छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा की रहने वाली हैं। दंतेवाड़ा को देश के सबसे नक्सल प्रभावित इलाकों में जाना जाता है। नम्रता की शुरूआती पढ़ाई दंतेवाड़ा से ही हुई। इस दौरान उन्हें उन तमाम समस्यों का सामना करना पड़ा जो नक्सल क्षेत्र में रहने वाले लोग करते हैं।

2018 की यूपीएससी परीक्षा में 12वीं रैंक प्राप्त करने वाली नम्रता जैन वर्तमान में छत्तीसगढ़ के महासमुंद के एसडीएम के रूप में तैनात है। (फोटो – इंस्टाग्राम/नम्रता जैन)

UPSC ने CSE एग्जाम 2022 के लिए तारीखों की घोषणा कर दी है। यूपीएससी एग्जाम में हर साल लाखों बच्चे अपनी किस्मत आजमाते हैं, लेकिन सफलता उन चुनिंदा अभ्यर्थियों को ही मिल पाती है जो बिना किसी तरह की चुनौतियों से डिगे हुए मेहनत करते रहते हैं। ऐसी ही कहानी 2018 की यूपीएससी परीक्षा में 12वीं रैंक प्राप्त करने वाली नम्रता जैन की है जिन्होंने नक्सली क्षेत्र से आने के बावजूद अपनी हिम्मत नहीं हारी और तैयारियों में लगी रहीं।

नम्रता जैन मूल रूप से छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा की रहने वाली हैं। दंतेवाड़ा को देश के सबसे नक्सल प्रभावित इलाकों में जाना जाता है। नम्रता की शुरूआती पढ़ाई दंतेवाड़ा से ही हुई। इस दौरान उन्हें उन तमाम समस्यों का सामना करना पड़ा जो नक्सल क्षेत्र में रहने वाले लोग करते हैं। अपने आसपास आए दिन होने वाली हत्या, बम विस्फोट और अपहरण की घटनाओं के बावजूद भी नम्रता जैन ने अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी। 

10वीं की पढ़ाई दंतेवाड़ा के निर्मल निकेतन स्कूल से करने के बाद नम्रता भिलाई चली आई। भिलाई के केपीएस स्कूल से उन्होंने 12वीं तक की पढ़ाई की। इसके बाद उन्होंने भिलाई इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी से इंजीनियरिंग में बैचलर्स की डिग्री हासिल की। डिग्री हासिल करने के बाद उन्होंने यूपीएससी की तैयारी करने की सोची। यूपीएससी की तैयारी करने के पीछे की कहानी का जिक्र नम्रता ने एक इंटरव्यू में किया था।

नम्रता ने इंटरव्यू में कहा था कि एक बार उनके गांव में नक्सलियों ने पुलिस स्टेशन में विस्फोट कर दिया था। विस्फोट के बाद गांव के लोगों का डर माहौल था। इसी को देखते हुए उन्होंने अपने गांव में विकास और शिक्षा को लाने का प्रण लिया था। इसी घटना को ध्यान में रखते हुए नम्रता ने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। शुरू में नम्रता ने भिलाई में रहकर ही पढ़ाई की लेकिन तैयारी ढ़ंग से नहीं होने पाने के कारण वह दिल्ली चली आईं। 

हालांकि दिल्ली आने के बाद भी उनकी मुश्किल कम नहीं हुई। तैयारी के दौरान ही उनके दो चाचा की मौत हो गई। नम्रता अपने चाचा के काफी करीब थीं। चाचा की मौत से नम्रता पूरी तरह से टूट गईं। नम्रता के चाचा का सपना था कि वो बड़ी होकर आईएएस ऑफिसर बने। इसलिए नम्रता ने फिर से मेहनत करना शुरू कर दिया।  

साल 2015 में नम्रता ने अपना पहला अटेम्प्ट दिया लेकिन वह सफल नहीं हो पाई। लेकिन उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी। साल 2016 में नम्रता जैन ने दूसरा अटेम्प्ट दिया और 99 वीं रैंक हासिल की। उन्हें आईपीएस मिला। नम्रता के सिर पर तो आईएएस बनने का जुनून सवार था। इसलिए ट्रेनिंग करते हुए उन्होंने 2018 में तीसरा अटेम्प्ट दिया और 12वीं रैंक प्राप्त की। उन्हें आईएएस के लिए चुन लिया गया। नम्रता जैन फिलहाल छत्तीसगढ़ कैडर की आईएएस हैं और महासमुंद के एसडीएम के रूप में तैनात हैं। 

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