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खराब अंग्रेजी होने के बाद भी UPSC में हासिल की अच्छी रैंक, IAS अधिकारी बनने वाले नितिन शाक्य ने कैसे की थी तैयारी

IAS अधिकारी नितिन शाक्य की कहानी कई लोगों को प्रेरणा दे सकती है। नितिन ने यूपीएससी के लिए अलग रणनीति बनाई थी। लेकिन उन्हें कामयाबी चौथे प्रयास में जाकर मिली थी। जानिए उन्होंने किन बातों को ध्यान में रखकर की थी तैयारी-

IAS अधिकारी नितिन शाक्य (Photo- Instagram/Dr. NITIN SHAKYA)

IAS अधिकारी नितिन शाक्य की कहानी उन सभी छात्रों को प्रेरणा दे सकती है जो खराब अंग्रेजी होने के कारण परेशान हो जाते हैं। UPSC की परीक्षा के लिए बहुत जरूरी है कि आप दिल लगाकर मेहनत करें, लेकिन कई बार कुछ कैंडिडेट्स परेशान हो जाते हैं क्योंकि लगातार प्रयास के बाद भी उनका चयन नहीं हो पाता है। नितिन शाक्य बताते हैं कि मैं सरकारी स्कूल से पढ़ा हुआ था तो मेरी अंग्रेजी अच्छी नहीं थी, लेकिन इसके बावजूद मैंने यूपीएससी में अच्छी रैंक प्राप्त की।

नितिन बताते हैं कि उनके कम नंबर होने के कारण स्कूल ने उन्हें एडमिट कार्ड तक देने से मना कर दिया था क्योंकि स्कूल को डर था कि ये एग्जाम में स्कूल का नाम खराब करेगा। हालांकि 12वीं की परीक्षा में उन्होंने काफी अच्छे नंबर प्राप्त किए थे। 12वीं के बाद उन्होंने मेडिकल की पढ़ाई करने का फैसला किया और ग्रेजुएशन करने के बाद डॉक्टर बन गए। हालांकि उनका मन शुरू से ही IAS अधिकारी बन देश की सेवा करने का था।

नितिन ने अपनी पढ़ाई स्ट्रेटजी बनाकर की। नितिन कहते हैं कि स्टूडेंट्स अपना टाइमटेबल तो बड़े ध्यान से बनाते हैं पर उसे अच्छे से फॉलो नहीं करते। पर नितिन ने ये गलती नहीं की। उन्होंने सख्ती के साथ अपने द्वारा बनाए गए टाइमटेबल को फॉलो किया।

ठीक स्ट्रेटेजी बनाना है जरूरी: नितिन ने अपनी पढ़ाई स्ट्रेटजी बनाकर की। नितिन कहते हैं कि स्टूडेंट्स अपना टाइमटेबल तो बड़े ध्यान से बनाते हैं पर उसे अच्छे से फॉलो नहीं करते। पर नितिन ने ये गलती नहीं की। उन्होंने सख्ती के साथ अपने द्वारा बनाए गए टाइमटेबल को फॉलो किया। क्योंकि बिना स्ट्रेटेजी के कुछ भी ठीक से पास नहीं किया जा सकता और जब आपका उद्देश्य यूपीएससी जैसी परीक्षा को पास करना हो तो बहुत जरूरी हो जाता है।

नितिन ने एक अन्य इंटरव्यू में कहा था, ‘यूपीएससी में सफलता पाने के लिए आपको लगातार कड़ी मेहनत करने की जरूरत होती है। आप यहां असफलता मिलने पर गलतियों को सुधारें और अगला प्रयास बेहतर तरीके से करें। साथ ही तैयारी के दौरान कभी भी गलतफहमी में ना रहें। नितिन शाक्य कहते हैं कि यहां आने वाली चुनौतियों से आपको डटकर सामना करना है और आगे बढ़ते रहना है।’

पहले प्रयास में ही नितिन इंटरव्यू राउंड तक पहुंच गए थे। इससे उनका हौसला बढ़ गया और दूसरे प्रयास में मेन्स से बाहर हो गए थे। तीसरे प्रयास में वह प्रीलिम्स तक पास नहीं कर पाए थे। इसके बाद परिवार और दोस्तों के कहने के बाद उन्होंने एक और प्रयास दिया और आईएएस अधिकारी बनकर ही दम लिया। आखिरकार साल 2018 में उन्होंने अपना सपना पूरा करने में कामयाबी हासिल की।

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