ट्यूशन पढ़ाकर बहन की शादी की, तीन बार नाकामयाब होने के बाद पूरा किया IAS बनने का सपना

गौरव की संघर्ष भरी कहानी यूपीएससी की तैयारी करने वाले हर अभ्यर्थी के लिए प्रेरणादायी है। उनका संघर्ष बताता है कि अगर आप अपने सपनों को पूरा करने में पूरी लगन से मेहनत करते हैं, तो देर से ही सही, सफलता जरूर मिलती है, बस आपको निराश नहीं होना चाहिए।

Gaurav Singh Sogarwal,UPSC, IAS, Civil Services Exam
IAS गौरव सिंह सोगरवाल(फोटो सोर्स: यूट्यूब/वीडियो ग्रैब)।

बहुत कम उम्र में ही अपने माता-पिता को खोने वाले राजस्थान के गौरव सिंह सोगरवाल ने तमाम कठिनाइयों को पार करते हुए 2016 की सिविल सेवा परीक्षा में 46वीं रैंक हासिल की। उनके संघर्ष की कहानी यूपीएससी की तैयारी करने वाले हर प्रतियोगी के लिए प्रेरणादायक है। गौरव सिंह तमाम जिम्मेदारियों और संघर्षों के बाद भी कामयाबी की एक अलग कहानी लिखने में लगे रहे और अपने जीवन में आगे बढ़ते रहे।

राजस्थान के भरतपुर के किसान परिवार से ताल्लुक रखने वाले गौरव सिंह सोगरवाल के बचपन में ही उनकी मां का निधन हो गया था। इसके बाद जब वो 14 साल के हुए तो उनके सिर से पिता का भी साया छिन गया। इसके बाद से गौरव को अपने पूरे घर की जिम्मेदारी संभालनी पड़ी। किसान परिवार से होने के चलते खेती के साथ-साथ अब उन्हें अपने भाई बहनों की भी देखभाल करनी पड़ती थी।

कॉलेज के दिनों में गौरव की अपनी पढ़ाई के साथ-साथ घर का खर्चा चलाने की जुगत में लगे रहते। इसके लिए वे बच्चों को ट्यूशन भी पढ़ाया करते थे। उन्होंने किसी तरह अपना ग्रेजुएशन पूरा किया। इसके बाद अपना बड़ा लक्ष्य बनाकर यूपीएससी की तैयारी के लिए दिल्ली आ गए।

बता दें कि गौरव सिंह ने अपनी शुरुआती शिक्षा एक हिंदी मीडियम स्कूल से प्राप्त की है। बाद में ग्रेजुएशन की डिग्री उन्होंने पुणे के भारती विद्यापीठ से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग से हासिल की है। वहीं ग्रेजुएशन के बाद दिल्ली में उन्होंने नारायण आईआईटी एकेडमी में पढ़ाना शुरू कर दिया।

इसी बीच उन्हें कोटा के एक कोचिंग इंस्टिट्यूट में भी पढ़ाने का मौका मिला। यहां से उन्हें थोड़ी राहत मिलने लगी। कुछ पैसे आने लगे और जिम्मेदारियों को निभाना आसान हो गया था। इस इंस्टिट्यूट में उन्होंने लगभग 2 साल तक पढ़ाया। इसी बीच अपनी बहन की शादी और छोटे भाई की पढ़ाई की जिम्मेदारी के चलते उनकी यूपीएससी की तैयारी धूमिल होती गई।

हालांकि उन्होंने अपने सपने को मरने नहीं दिया। गौरव हार ना मानते हुए यूपीएससी की तैयारी में फिर से जुट गए। इस दौरान उनका पहले प्रयास में प्रीलिम्स परीक्षा में एक अंक से चयन नहीं हो सका। वहीं दूसरे प्रयास में वह मेन्स परीक्षा एक अंक से पास नहीं हो सके। हालांकि, इस बीच उनका चयन असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में BSF में हो गया था।

ट्रेनिंग के दौरान ही गौरव को पता चला कि 2015 की सिविल सेवा परीक्षा में उनकी 99वीं रैंक आई है। इसके बाद 2016 में गौरव ने फिर से यूपीएससी की परीक्षा दी और 46वीं रैंक प्राप्त की। गौरव की संघर्ष भरी कहानी साबित करती है कि अगर आप अपने सपनों को पूरा करने में पूरी लगन और मेहनत करते हैं, तो देर से ही सही, सफलता जरूर मिलती है, बस आपको निराश नहीं होना चाहिए।

पढें जुर्म समाचार (Crimehindi News). हिंदी समाचार (Hindi News) के लिए डाउनलोड करें Hindi News App. ताजा खबरों (Latest News) के लिए फेसबुक ट्विटर टेलीग्राम पर जुड़ें।