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‘कड़ी मेहनत के साथ सिलेबस सीमित रखना भी है बेहद जरूरी’ UPSC क्लियर कर IAS अधिकारी बनने वाली प्रेरणा सिंह ने दिए सफलता के टिप्स

साल 2017 में UPSC क्लियर कर IAS अधिकारी बनने वाली प्रेरणा सिंह ने सफलता के टिप्स दिए थे। प्रेरणा ने बताया था कि UPSC के लिए बेहद जरूरी है कि कैंडिडेट्स अपना सिलेबस कम रखें और इसके लिए NCERT की किताबों से भी पढ़ाई करें।

IAS अधिकारी प्रेरणा सिंह (Photo- Prerna Singh/Instagram)

साल 2017 में UPSC क्लियर करने वालीं प्रेरणा सिंह आज IAS अधिकारी हैं। प्रेरणा उत्तर प्रदेश कैडर की IAS अधिकारी हैं। अपने कई इंटरव्यूज़ में वह UPSC की तैयारी कर रहे कैंडिडेट्स को टिप्स देती हैं। प्रेरणा ने बताया था कि UPSC के लिए बेहद जरूरी है कि कैंडिडेट्स अपना सिलेबस कम रखें और इसके लिए NCERT की किताबों से भी पढ़ाई करें।

प्रेरणा कहती हैं, ‘सीधा किताबों में अंडरलाइन करके पढ़ने से अच्छा है कि आप खुद इसके लिए नोट्स बनाए। अपने हाथ से बने हुए नोट्स से आपको सभी चीजें आराम से मिल जाएंगी और एग्जाम जब पास आएगा तो आप आराम से इससे पढ़ाई कर सकेंगे। यूपीएससी एग्जाम में रिवीजन में बहुत मायने रखती है क्योंकि रिवीजन से आपको हर टॉपिक याद हो जाता है और एग्जाम में समय बर्बाद होने से भी बच जाता है।’

प्रेरणा कहती हैं, ‘आंसर राइटिंग की ज्यादा से ज्यादा प्रैक्टिस करें। आंसर लिखते समय उसमें तथ्य और डायग्राम जरूर बनाएं ताकि आपका आंसर ज्यादा प्रभावी हो सके। आप अपना स्टडी मैटेरियल भी सीमित रखें, इससे आप अपना सिलेबस आसानी से पूरा कर सकते हैं। UPSC के लिए तैयारी करते समय कई कैंडिडेट्स ज्यादा से ज्यादा किताबें पढ़ने पर जोर देते हैं जो कई बार मुश्किल हो जाता है।’

NCERT की किताबों से कर सकते हैं पढ़ाई: प्रेरणा ने आगे बताया, ‘जैसा कि रिवीजन बहुत जरूरी है तो NCERT की किताबों से भी ये बहुत आसानी से हो सकती है। आप NCERT की कक्षा 6 से लेकर 12 तक की किताबें पढ़ सकते हैं। कम समय में भी इन किताबों से पढ़ाई करने से बहुत फायदा होगा क्योंकि इससे सिलेबस रिपीट नहीं होगा। इन किताबों का सबसे ज्यादा फायदा होता है कि आपका बेसिक बिल्कुल क्लियर हो जाता है।’

प्रेरणा सिंह का मानना है कि इसमें कोचिंग से ज्यादा सेल्फ-स्टडी मायने रखती है। प्रेरणा कहती हैं, ‘कई बार कैंडिडेट्स कोचिंग पर ज्यादा डिपेंड हो जाते हैं। इससे वह सेल्फ-स्टडी को कम तवज्जो देते हैं। इससे कई बार स्कोर खराब हो सकता है। इसलिए आपको खुद पर विश्वास होना बहुत जरूरी होता है। हर कैंडिडेट को पहले सेल्फ-स्टडी पर ही जोर देना चाहिए, कोचिंग से सिर्फ मदद लेनी चाहिए अगर जरूरत लगे तो।’

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