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सिंगापुर से लाखों की नौकरी छोड़ भारत वापस आ गए थे अभिषेक सुराना, दो बार क्लियर कर चुके हैं UPSC, आज हैं IAS अधिकारी

अभिषेक सुराना ने यूपीएससी एग्जाम देने के लिए लाखों रुपए की नौकरी छोड़ दी थी। वह चार बार यूपीएससी एग्जाम दे चुके हैं। चौथी बार में उन्हें अपनी पसंद का पद मिला। उन्हें साल 2017 में AIR 10वां स्थान मिला था।

अभिषेक सुराना ने सिंगापुर में नौकरी छोड़ यूपीएससी की तैयारी शुरू की थी। (Photo- Abhiehsk Surana/Twitter)

UPSC में हर साल लाखों बच्चे अपना भाग्य आजमाते हैं, लेकिन कुछ ही कामयाब हो पाते हैं। राजस्थान के अभिषेक सुराना की कहानी भी कुछ ऐसी ही है। अभिषेक भले ही आज आईएएस अधिकारी हैं, लेकिन उनकी कहानी लोगों के लिए प्रेरणा से कम नहीं है। वह लाखों की रुपए की विदेशी कंपनी की नौकरी को छोड़ वापस भारत आ गए थे क्योंकि उनका सपना आईएएस अधिकारी बनने का था।

अभिषेक ने अपनी स्कूली पढ़ाई राजस्थान के भीलवाड़ा से की। यहीं उनका परिवार भी रहता है। इसके बाद उन्होंने आगे की पढ़ाई के लिए दिल्ली का रुख किया और यहां उन्हें IIT में दाखिला मिल गया। IIT दिल्ली से उन्होंने इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग पूरी की और उनकी काबिलियत को देखते हुए सिंगापुर में नौकरी भी मिल गई। लाखों की रुपए तनख्वा होने के बावजूद उनका मन नौकरी में नहीं लगा।

अभिषेक सुराना इस दौरान कुछ करने की ही सोच रहे थे, इस बीच उनके मन में बिजनेस करने का आइडिया आया। इसके बाद उन्होंने विदेशी धरती पर ही स्टार्टअप शुरू किया। इन सब क्षेत्रों में कामयाबी हासिल होने के बावजूद भी उनका मन जमीनी स्तर पर काम करने का था, लेकिन वह इसके लिए प्लान ही कर रहे थे कि उनके मन में यूपीएससी एग्जाम देने का आइडिया आया।

वह अपने इस आइडिया को लेकर वापस भारत लौट आए। भारत में उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी। कड़ी मेहनत के बावजूद वह दो बार यूपीएससी क्लियर करने से चूक गए। उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार उनका चयन हो गया। उनकी पहली पसंद आईएएस थी, लेकिन रैंक न आने की वजह से उन्हें IPS मिला। तब अभिषेक की AIR 250 रैंक आई थी।

अभिषेक ने कुछ समय तक बतौर आईपीएस अपनी सेवाएं दीं, लेकिन उनके मन में तो कुछ और ही चल रहा था। यूपीएससी एग्जाम की सारी बारीकियां जानने के बाद उन्होंने एक और परीक्षा देने का मन बनाया। चौथी बार भी उन्होंने परीक्षा दी और साल 2017 में AIR 10वां स्थान हासिल किया। अभिषेक ने एक इंटरव्यू में अपनी सफलता का सारा क्रेडिट अपने माता-पिता को दिया था। उन्होंने कहा था कि मेरे माता-पिता ने कभी मुझे कुछ भी करने से नहीं रोका यही वजह है कि मैंने नौकरी छोड़ UPSC की तैयारी शुरू की थी।

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