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UPSC में 5वां स्थान प्राप्त करने वाली सृष्टि देशमुख ने योग को बताया सफलता का राज़, बोलीं- रोज़ाना पढ़ना भी बहुत जरूरी

IAS अधिकारी सृष्टि देशमुख ने योगा और मेडिटेशन को अपनी सफलता का राज़ बताया था। सृष्टि ने ऑल इंडिया पांचवा स्थान प्राप्त किया था। उन्होंने बताया था कि यूपीएससी के लिए रोज़ाना पढ़ाई करना बहुत जरूरी है।

IAS अधिकारी सृष्टि देशमुख (Photo- Twitter)

UPSC की तैयारी कर रहे उम्मीदवार अलग-अलग तरीके से इस परीक्षा की तैयारी करते हैं। कई कैंडिडेट को इसमें सफलता हासिल होती है तो कई इसमें रह जाते हैं। आज एक ऐसी IAS अधिकारी की बात करेंगे जिन्होंने अपनी सफलता का राज मेडिटेशन और योगा को बताया था। इस आईएएस अधिकारी का नाम है- सृष्टि देशमुख। सृष्टि बचपन से ही IAS अधिकारी बनना चाहती थीं।

सृष्टि ने बहुत कम उम्र में ही यूपीएससी की तैयारी शुरू कर दी थी। वह मूल रूप से भोपाल की हैं और यहीं से उनकी स्कूलिंग भी हुई है। वह स्कूल के समय से ही यूपीएससी की तैयारी कर रही थीं, लेकिन तब वह बहुत छोटी थीं और उन्हें नहीं पता था कि इसके लिए किस स्तर तक मेहनत करनी पड़ती है। खैर, समय के साथ वह आगे की पढ़ाई में व्यस्त हो गईं और ये सपना भी कहीं खो गया।

सृष्टि ने इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन करने का फैसला किया। उन्होंने इंजीनियरिंग में दाखिला ले लिया, लेकिन वह IAS के सपने को बीच में नहीं छोड़ना चाहती थीं। परिवार के साथ सृष्टि ने अपने सपने की बात साझा की और परिवार से उन्हें इसे पूरा करने की इजाजत भी मिल गई। कड़ी मेहनत और धैर्य के बल पर उन्होंने न सिर्फ यूपीएससी क्लियर की बल्कि ऑल इंडिया पांचवा स्थान भी हासिल किया।

सृष्टि को यूपीएससी की लिखित परीक्षा में 895 मार्क्स मिले थे जबकि पर्सनालिटी टेस्ट में 173 मार्क्स हासिल हुए थे। इस प्रकार यूपीएससी में कुल उन्हें 1068 मार्क्स मिले थे। सृष्टि ने एक इंटरव्यू में बताया था कि इसके लिए हर कैंडिडेट का पॉजिटिव रहना बहुत जरूरी है।

सृष्टि ने कहा था, ‘मेहतन सभी करते हैं लेकिन फर्क डालता है हर कैंडिडेट का मेंटल लेवल। जिसका दिमाग जितना शांत और सही दिशा में है उसे उतना ही फायदा मिलता है। अपनी ऊर्जा को सही दिशा में खर्च करना आवश्यक है। एक साथ दो-दो विषयों की पढ़ाई करते समय सृष्टि को बैलेंस बनाने में मदद की योगा और मेडिटेशन ने।’

सृष्टि ने आगे कहा था, ‘योगा और मेडिटेशन से फिजिकल और मेंटल फिटनेस होती है। सिविल सर्विसेस की तैयारी में कंसिसटेंसी और फेथ बहुत जरूरी है। ऐसा न करें कि एक दिन सात-आठ घंटे पढ़ लिया फिर अगले दिन दो घंटे पढ़ा या स्किप कर दिया। जितने भी घंटे अपनी क्षमता के अनुसार आप फिक्स करें, उतने घंटे रोज़ पढ़ें, इसी कंसिसटेंसी की जरूरत होती है और दूसरी अहम बात कोई कुछ भी कहे अपने ऊपर विश्वास रखें।’

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