सरपंच पिता का सपना पूरा करने के लिए बेटे ने छोड़ दी डॉक्टरी, पास की UPSC परीक्षा, अब बनेंगे अधिकारी

राजस्थान के दीपक कुमार ने जब यूपीएससी (UPSC) की तैयारी करने के लिए सोचा तब वो डॉक्टर बन चुके थे। सरपंच पिता ने जब घर में अफसर होने की चाहत जताई तो दीपक सिविल सेवा की तैयारी में जुट गए। जिसके बाद दीपक कुमार ने जमकर मेहनत की और यूपीएससी की परीक्षा को पास कर लिया।

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पहले डॉक्टर थे दीपक कुमार अब बनेंगे अधिकारी (प्रतीकात्मक फोटो- @pixabay)

राजस्थान के एक डॉक्टर ने अपने सरपंच पिता का सपना पूरा करने के लिए डॉक्टरी के बाद यूपीएससी की तैयारी करने लगे। शुक्रवार को आए यूपीएससी सिविल सेवा 2020 की परीक्षा परिणाम में डॉक्टर दीपक कुमार ने 694 रैंक लाकर अपने पिता का दूसरा सपना पूरा कर दिया।

दरअसल दीपक कुमार के पिता सत्य कुमार आर्मी में थे। जब वो आर्मी में थे तो उनका सपना था कि बच्चे पढ़ लिखकर डॉक्टर-इंजीनियर बनें। पिता की इच्छा और बेहतर भविष्य के लिए एक बेटा इंजीनियर तो दो बेटे डॉक्टर बन गए। पिता बच्चों को देखकर खुश थे कि बच्चे उनका कितना मान रखते हैं। लेकिन जब आर्मी से सत्य कुमार रिटायर हुए तो उनके सपने बदल गए।

रिटायर होने के बाद सत्य कुमार घर आ गए। जहां तीनों बेटों की डिग्रियां टंगी हुई थी। जी न्यूज के अनुसार रिटायरमेंट के बाद सत्य कुमार गांव के सरपंच चुन लिए गए। सरपंच बनने के बाद जब वो अधिकारियों को पास जाने लगे तो उन्हें घर में एक अधिकारी की कमी खलने लगी। पिता ने ये बात अपने बच्चों को बताई। पिता की हमेशा खुशी चाहने वाले बच्चों ने तय कर लिया कि वो यूपीएससी की तैयारी करेंगे।

सत्य कुमार के छोटे बेटे पहले यूपीएससी की तैयारी करने के लिए तैयार हुए उसके बाद उन्होंने बड़े भाई दीपक को भी अपने साथ कर लिया। दोनों भाई यूपीएससी की तैयारी में लग गए। दीपक तीन बार इंटरव्यू तक पहुंचे थे, लेकिन उन्हें सफलता हाथ नहीं लगी थी। चौथी बार में दीपक ने वो कारनामा कर दिखाया जिसका इंतजार पूरे परिवार को थे।

दीपक कुमार ने यूपीएससी 2020 में 694 रैंक लाकर अपने पिता का सपना पूरा कर दिया। दीपक अभी खुद एक सरकारी अस्पताल में डॉक्टर के रूप में तैनात हैं। बेटे की सफलता पर गर्व करते हुए पिता सत्य कुमार कहते हैं कि उनके बेटे ने दूसरी बार उनका सपना पूरा किया है। वो कहते हैं- “पहली बार जब बेटों को इंजीनियर-डॉक्टर बनने के लिए कहा तो उन्होंने दिन रात एक करके डिग्रियां घर में टांग दी। इस बार जब अधिकारी के लिए बोला तो वो यूपीएससी निकाल कर दूसरा सपना भी पूरा कर दिया”।

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