यूपी के तीन सरकारी इंजीनियरों का कारनामा, मंत्री के नाम से सीएम को लिखी थी तबादले की चिट्ठी, मामला खुला तो आई शामत

यूपी जल निगम में कार्यरत तीन इंजीनियरों ने पूर्व मंत्री अनुपमा जायसवाल के लेटरहेड पर तबादले के लिए सीएम को पत्र लिख डाला। मामला सामने आने पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।

Three Jal Nigam engineers booked on cheating and forgery charges: BJP MLA
तीन इंजीनियरों ने CM योगी को लिखा फर्जी सिफारिशी पत्र (फाइल फोटो)

उत्तरप्रदेश में तबादले के लिए एक अजीब ही खेल सामने आया है। तीन सरकारी इंजीनियरों ने तबादले के लिए फर्जी लेटर सीएम योगी आदित्यनाथ को भेज दिया। मामला सामने आने पर अब कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

इंजीनियरों ने पूर्व मंत्री अनुपमा जायसवाल के फर्जी लेटर हेड्स पर तबादले के लिए सिफारिश पत्र लिखा और फिर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भेज दिया। पत्र लिखने के लिए तीन जल निगम इंजीनियरों पर धोखाधड़ी और जालसाजी के आरोप में मामला दर्ज किया गया है।

तीनों इंजीनियरों के खिलाफ जल निगम के पूर्व मंत्री जायसवाल ने पुलिस में शिकायत दी। जिसके बाद बहराइच ग्रामीण थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई। जायसवाल ने कहा कि दोषी इंजीनियरों की पहचान अभिषेक वर्मा, मनोज कुमार और अनुभव गुप्ता के रूप में हुई है, जो आजमगढ़ और बलिया जिलों में तैनात हैं।

भाजपा विधायक जायसवाल ने कहा कि पिछले साल जुलाई में उनके मंत्री पद के समय के लेटरहेड्स पर मुख्यमंत्री को पत्र लिखे गए थे। उन्होंने कहा- “जिस तारीख को पत्र लिखे गए थे, उस दिन मैं मंत्री नहीं थी। हस्ताक्षर भी मेरे नहीं थे। इस फर्जीवाड़े की जानकारी मिलने के बाद मैंने अपने निजी सचिव के माध्यम से यहां के ग्रामीण थाने में प्राथमिकी दर्ज करवाई है। पुलिस ने फिलहाल मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कार्रवाई में जुट गई है।”

बता दें कि अनुपमा जायसवाल उत्तरप्रदेश के बहराइच से भाजपा विधायक हैं। 2017 में अनुपमा बहराइच सदर सीट से विधायक बनीं थी। जिसके बाद उन्हें योगी सरकार में मंत्री बनाया। जायसवाल की मायावती से लेकर अधिकारियों तक पर टिप्पणी विवादों में रही। जायसवाल ने मायावती को महाठगनी बता दिया था। कांग्रेस की महासचिव प्रियंका गांधी पर भी विवादित टिप्पणी कर दी थी।

प्रियंका गांधी पर उन्होंने विवादित टिपण्णी करते हुए कहा था कि उनकी मैया, भैया और सैंया तीनों खतरे में हैं। एक बार जब वो शिक्षा मंत्री थीं तो बहराइच के गांव में उन्होंने चौपाल लगाई थी। उनकी चौपाल में भीड़ दिखाने के लिए स्कूली बच्चों का सहारा लिया गया था। आठ घंटे तक बच्चे इंतजार करते रहे फिर भूख-प्यास से बेहाल हुए तो रोने लगे थे। इन्हीं सब विवादों के बाद 2019 में उनसे इस्तीफा ले लिया गया था।

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