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दाऊद से बड़ा डॉन कहलाता था, ठेले पर सब्जी बेचने वाला अमर नाईक कैसे बना मुंबई का ‘रावण’; पढ़ें

कहा जाता है कि अमर नाईक ने काली दुनिया से मोटी कमाई भी की थी। उसने पुणे, परवल और दादर में संपत्ति भी खरीदी थी।

crime, crime newsदाऊद इब्राहिम। फाइल फोटो।

अंडरवर्ल्ड का नाम सुनते ही अपराध की दुनिया के सबसे खूंखार शख्स दाऊद इब्राहिम का चेहरा सामने आता है। भारत समेत कई मुल्कों की पुलिस अपराधी से आतंकी बने दाऊद को तलाश रही है। हालांकि, आज हम यहां बात दाऊद की नहीं बल्कि उस गैंगस्टर की कर रहे हैं जिसके बारे में कहा जाता है कि वो कभी मुंबई में दाऊद इब्राहिम से भी बड़ा अंडरवर्ल्ड डॉन हुआ करता था।

बरसों पहले एक शख्स मुंबई की सड़कों पर सब्जी का ठेला लगाता था। उस वक्त भी वहां सड़क छाप गुंडों का आतंक था। एक दिन ठेले पर सब्जी बेच रहे इस शख्स की कुछ बदमाशों ने पिटाई शुरू कर दी। यह देख इस शख्स के भाई ने हाथ में चाकू उठा लिया और फिर 5 लोगों से भीड़ गया। उसने बदमाशों को वहां से भगा दिया और इस तरह अमर नाईक उस इलाके में सब्जी बेचने वालों के लिए एक बड़ा नाम बन गया।

लेकिन तब शायद किसी ने यह नहीं सोचा था कि अमर नाईक आगे चलकर मुंबई अंडरवर्ल्ड का बेताज बादशाह बन जाएगा। शुरू में गरीब दुकानदारों से रंगदारी वसूले जाने के खिलाफ लड़ने के लिए अमर नाईक ने अपने कुछ भरोसेमंदों की एक टोली बना ली। हालांकि कुछ ही दिनों बाद अमर नाईक के छोटे भाई अश्विन को बदमाशों ने किडनैप कर लिया। अश्विन किसी तरह किडनैपर्स के चंगुल से छूट कर भाग गया और फिर यहां से शुरू हुई अरुण गवली और अमर नाईक गैंग के बीच अदावत की कहानी।

कहा जाता है कि अमर नाईक के पास गैंग तो था लेकिन उसके पास उस वक्त के खतरनाक गैंगस्टर अरुण गवली से लड़ने के लिए हथियार नहीं थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमर नाईक ने राम भट नाम के एक स्थानीय गैंगस्टर से हाथ मिलाया। इसके बाद इन दोनों ने मिलकर मुंबई में अपराध का बड़ा साम्राज्य खड़ा किया था। अमर नाइक के गैंग में आलजी, पालजी जैसे कुख्यात हत्यारे थे तो वहीं उसकी पहुंच इतनी ऊपर तक बन गई थी कि वो श्रीलंका से हथियार भी ला कर रखता था। साल 1985 तक अमर नाईक मुंबई अंडरवर्ल्ड की दुनिया में बड़ा नाम बन चुका था और उसके बाद एक से बढ़कर एक महंगे हथियार थे।

कहा जाता है कि अमर नाईक ने काली दुनिया से मोटी कमाई भी की थी। उसने पुणे, परवल और दादर में संपत्ति भी खरीदी थी। उस वक्त मुंबई में दाऊद गिरोह भी अपने पांव पसारने की कोशिश कर रहा था। कहा जाता है कि उस वक्त पुलिस के लिए दाऊद गिरोह के गुर्गों को पकड़ना आसान था लेकिन अमर नाईक की कोई जानकारी पुलिस के पास नहीं होती थी।

बताया जाता है कि उस वक्त अमर नाईक, दाऊद इब्राहिम से भी बड़ा गैंगस्टर था और अपराध की दुनिया में उसे मुंबई का रावण भी कहा जाता था। अमर नाईक पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुका था लिहाजा वो लगातार पुलिस के निशाने पर था। साल 1995 में मदनपुरा इलाके में आधी रात को अमर नाईक का एनकाउंटर हुआ था।

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