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पत्नी को ‘मोटी’ बताकर दिया तीन तलाक, पीड़िता ने सुनाई आपबीती

महिला का कहना है कि तलाक देने के बाद पति उसके दोनों बच्चों को अपने साथ लेकर चले गए। इस मामले में महिला ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस ने इस मामले में धारा 323 (मारपीट), धारा 498 (प्रताड़ित करना), धारा 506, 34 और नवीन कानून मुस्लिम महिला (विवाह) अधिकारों का संरक्षण अध्यादेश 2018 के अंतर्गत धारा 3/4 के तहत केस दर्ज किया है।

Author Published on: October 26, 2018 1:29 PM
प्रतीकात्मक फोटो।

मशहूर अभिनेता अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘लावारिस’ का एक गाना काफी मशहूर हुआ था। गाने के बोल थे ‘जिसकी बीवी मोटी उसका भी बड़ा नाम है’। गाने का जिक्र यहां इसलिए आया क्योंकि फिल्म के इस गाने में बीवी की बात करते हुए मैसेज देने की कोशिश की गई थी कि किसी की शारीरीक बनावट उसके अच्छे या बुरे होने का प्रमाण कतई नहीं हो सकता। लेकिन रियल लाइफ में एक शख्स ने अपनी बीवी के मोटी हो जाने पर उसके साथ जुल्म की इंतिहा कर दी। बीवी के मोटे हो जाने पर इस शख्स ने अपनी पत्नी के साथ मारपीट की और उसे तलाक तक दे दिया।

यह कहानी है मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले की। करीब 10 साल पहले इस महिला की शादी आरिफ हुसैन नाम के एक शख्स के साथ हुई थी। शादी के कुछ सालों तक दोनों के बीच मधुर संबंध रहे। इस महिला को दो बच्चे भी हुए। लेकिन पीड़ित महिला का आरोप है कि शादी के 10 साल बाद अब उनके पति ने इसलिए उन्हें तीन तलाक दे दिया क्योंकि उनकी नजर में वो मोटी हो गई हैं।

इस बीवी का अपने शौहर और उनकी मां पर आरोप है कि अक्सर वो दोनों इन्हें मोटी कहकर ताने दिया करते थे। इतना ही नहीं कई बार आरिफ उसके साथ मारपीट भी करता था। पति की प्रताड़ना से तंग आकर यह महिला अपने भाई के पास चली गई थी। अचानक बीते बुधवार को आरिफ और उनकी मां महिला के घर पहुंचे। महिला के पति ने यहां भी उन्हें मोटी कहकर ताना मारा और फिर अचानक तीन बार तलाक…तलाक…तलाक कह कर उन्हें अपनी जिंदगी से बेदखल कर दिया।

महिला का कहना है कि तलाक देने के बाद पति उसके दोनों बच्चों को अपने साथ लेकर चले गए। इस मामले में महिला ने थाने में एफआईआर दर्ज कराई है। पुलिस ने इस मामले में धारा 323 (मारपीट), धारा 498 (प्रताड़ित करना), धारा 506, 34 और नवीन कानून मुस्लिम महिला (विवाह) अधिकारों का संरक्षण अध्यादेश 2018 के अंतर्गत धारा 3/4 के तहत केस दर्ज किया है।

यहां आपको बता दें कि 19 सितंबर 2018 को केंद्रीय कैबिनेट में तीन तलाक पर कानून को लेकर अध्यादेश को मंजूरी दी गई थी। इससे यह कानून 6 महीने तक लागू हो गया है। 6 महीने के भीतर इसे संसद में पारित कराना होगा। इस कानून में तीन तलाक को गैरजमानती अपराध की श्रेणी में रखा गया है। गैरजमानती कानून के तहत जमानत पुलिस थाने में नहीं दी जा सकती है। कानून में अधिकतम 3 साल की सजा का प्रावधान है।

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