श्रीलंका: कभी राष्ट्रपति के खिलाफ अपनी जांच से इस जासूस ने फैलाई थी सनसनी, नई सरकार बनने के बाद मिली धमकी, देश छोड़ कर भागा

इस पूरे मामले में पुलिस का कहना है कि सिल्वा के खिलाफ अभी कोई भी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है लेकिन इस बात की जांच जरूर कराई जाएगी कि बिना इजाजत उन्होंने आखिर देश क्यों छोड़ दिया।

crime, crime news, crime news jansattaश्रीलंका के इस टॉप क्लास के ऑफिसर ने कई अहम वारदातों की जांच की है। प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो सोर्स – Indian Express

बड़ी हैरानी की बात है कि इस देश के सबसे बड़े जासूस को धमकी दी जाती है और धमकी मिलने के बाद वो चुपचाप देश छोड़ कर फरार हो जाता है। मामला श्रीलंका का है जहां अभी हाल ही में नई सरकार का गठन हुआ है। कभी श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपित महिंद्रा राजपक्षे के हाई-प्रोफाइल केस की जांच करने वाले इंस्पेक्टर Nishantha Silva ने इस केस से काफी सुर्खियां भी बटोरी थीं। बीते सोमवार (25-11-2019) को कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए दावा किया गया है कि श्रीलंका में गोटाबाया राजपक्षे की नई सरकार बनने के बाद निशांथा सिल्वा को जान से मारने की धमकी मिली है। जिसके बाद वो देश छोड़ कर चले गए।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के हवाले से यह भी बताया जा रहा है कि निशांथा स्विट्जरलैंड के अस्पताल में थे और इसके बाद उन्हें बिना अपने विभाग को बताए आईलैंड छोड़ दिया। इस मामले में श्रीलंकाई पुलिस महकमे की तरफ से कहा गया है कि इस अधिकारी पर पिछले चार-साढ़े चार सालों के दौरान एकपक्षीय कार्रवाई करने के कई गंभीर आरोप लगे हैं। हालांकि ऐसी कार्रवाइयों के संबंध में पुलिस विभाग की तरफ से किसी भी प्रकार की जानकारी नहीं दी गई है।

‘Daily Mirror’ की रिपोर्ट के मुताबिक 16 नवंबर को गोटाबाया राजपक्षे राष्ट्रपति का चुनाव जीते थे जिसके बाद निशांथा सिल्वा को जान से मारने की धमकी मिली थी। इस धमकी के बाद उन्होंने देश छोड़ दिया। यहां आपको बता दें कि उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति महिंद्रा राजपक्षे की सरकार के दौरान हुई कई हत्याओं और प्रशासनिक अधिकारियों के भ्रष्टाचार में संलिप्त होने जैसे गंभीर मामलों की जांच की थी। महिंद्रा राजपक्षे हाल ही में चुने गए श्रीलंका के नए राष्ट्रपति गोटाबाया राजपक्षे के भाई हैं।

इस पूरे मामले में पुलिस का कहना है कि सिल्वा के खिलाफ अभी कोई भी प्रशासनिक कार्रवाई नहीं की गई है लेकिन इस बात की जांच जरूर कराई जाएगी कि बिना इजाजत उन्होंने आखिर देश क्यों छोड़ दिया। पिछले साल महिंद्र राजपक्षे के प्रधानमंत्री बनने के बाद सिल्वा को CID के पद से हटा दिया गया था। हालांकि प्रशासनिक व्यवस्था के चरमराने के बाद उन्हें वापस यह पद दिया गया था। निशांथा सिल्वा ने साल 2009 में एडिटर Lasantha Wickrematunge की मौत की जांच भी की थी। (और…CRIME NEWS)

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