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तिरुपति के मंदिर से चोरी हुआ हीरे जड़ा मुकुट, मचा हड़कंप

जांच अधिकारियों ने मंदिर में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच-पड़ताल भी की है। सूत्रों के मुताबिक जांच प्रक्रिया के दौरान मंदिर के कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी।

Author Updated: February 4, 2019 7:23 AM
मुकुट की कीमत करोड़ों में बताई जा रही है।

आंध्रप्रदेश के तिरुपति स्थित श्री गोविंदराजा स्वामी मंदिर से हीरे के मुकुट के चोरी हो जाने की खबर है। मुकुट का वजन करीब 1.3 किलोग्राम है। बाजार में इसकी कीमत करोडो़ं में बताई जा रही है। मंदिरों के शहर के नाम से मशहूर तिरुपति में तिरुमाला तिरुपति देवस्थान मंदिर से बीते शनिवार को यह मुकुट गायब हो गया। मंदिर प्रशासन इस मामले की जांच कर रहा है। तिरुमाला तिरुपति देवस्थान मंदिर के संयुक्त कार्यकारी अधिकारी पी भास्कर के मुताबिक पुजारियों ने देखा कि श्री गोविंदराजा स्वामी मंदिर में स्थित 18 मंदिरों में से एक मंदिर में रखा मुकुट गायब हो गया है। इस मुकुट में तीन हीरे जड़े थे। मुकुट गायब होने की सूचना बीते शनिवार (02-02-2019) की शाम 5.45 मिनट पर मिली।

सुरक्षा और निगरानी विभाग से जुड़े अधिकारियों का कहना है कि मंदिर के नियम के मुताबिक श्रद्धालुओं के लिए मंदिर शाम 5.00 बजे से बंद हो जाता है। हर रोज की तरह इस दिन भी इसके बाद यहां पूजा अनुष्ठान किया गया तथा इसे दोबारा जब 45 मिनट बाद खोला गया तो थोड़ी देर बाद पुजारियों ने देखा कि यहां से मुकुट गायब हो गया है। मंदिर से मुकुट के चोरी हो जाने की खबर के बाद वहां लोगों की भीड़ भी जमा हो गई थी। इस मामले में तिरुपति अर्बन पुलिस के पास शिकायत दर्ज कराई गई है। मुकुट गायब हो जाने की खबर सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन किया और इस मामले में जल्द से जल्द कार्रवाई किए जाने की मांग की है। बीजेपी कार्यकर्ताओं का कहना है कि राज्य सरकार हिंदुओं के मंदिरों के देखरेख में कोताही बरत रही है।

मंदिर के कार्यकारी अधिकारी एके सिंघल और अध्यक्ष पी सुधाकर यादव ने भी इस मामले की जांच की है। खबर मिलने के बाद देर रात तिरुपति अर्बन के एसपी अनबुरंजन मंदिर पहुंचे। जांच अधिकारियों ने मंदिर में लगे सीसीटीवी फुटेज की जांच-पड़ताल भी की है। सूत्रों के मुताबिक जांच प्रक्रिया के दौरान मंदिर के कर्मचारियों से भी पूछताछ की जाएगी। बता दें कि श्री गोविंदराजा स्वामी मंदिर टेंपल टाउन के बीचोंबीच स्थित है। कहा जाता है कि यह मंदिर 12वीं सदी में बना था। इस मंदिर की नींव श्री रामानुचार्य ने रखी थी।

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