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नोट के लिए सांसों का सौदा: मौत से पहले ही मौत की बोली लगाने वाला गैंग

धार जिले के पुलिस अधीक्षक का कहना है कि अब तक इसमें दो मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इस गैंग में 10 लोगों की साझेदारी है। जिनमें एक वकील शामिल है जो कि इस गैंग का सरदार है।

Author नई दिल्ली | July 14, 2019 3:55 PM
नोट के लिए सांसों का सौदा: मौत से पहले ही मौत की बोली लगाने वाला गैंग

मध्यप्रदेश के धार में मौत से पहले मौत की बोली लगाने वाले गैंग का पर्दाफाश हुआ है। दरअसल ये गैंग मरे हुए लोगों के नाम पर बीमा का रुपया ठगता था। इस गैंग का सदस्य मरे हुए लोगों के नाम से फर्जी एक्कीडेंटल रिपोर्ट बनाकर बीमा कंपनियों से करोड़ों का क्लेम निकाले थे। बताया जा रहा है कि इस गिरोह में सरकारी डॉक्टर और वकील भी शामिल हैं। पुलिस ने इस गैंग के दस सदस्यों को गिरफ्तार किया है। यह गैंग बीमारी से मरे हुए लोग और आकस्मिक रूप से मरे हुए लोगों की मौत के कुछ ही दोनों बाद फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र बना लेता था। ऐसा वे इसलिए करते थे जिससे की यह प्रमाणित किया जा सके कि संबंधित व्यक्ति की मौत सामान्य नहीं, बल्कि दुर्घटना में हुई है।

धार जिले के पुलिस अधीक्षक का कहना है कि अब तक इसमें दो मामले दर्ज किए जा चुके हैं। इस गैंग में 10 लोगों की साझेदारी है। जिनमें एक वकील शामिल है जो कि इस गैंग का सरदार है। इसके अलावा इस गैंग में एक डॉक्टर भी शामिल है जिसने पांच रिपोर्ट तैयार की थी। इस कांड का पर्दाफाश होने के बाद एक मृतक जो कि 70 साल का और कैंसर का मरीज था। इस मरीज की मौत जनवरी में हो गई थी। ग्राम पंचायत ने फरवरी में यह प्रमाणित किया कि व्यक्ति की मृत्यु प्राकृतिक थी। लेकिन गैंग के सदस्यों ने मृतक के परिवारवालों के साथ मिलकर उनके नाम पर 4 चार पहिए वाहन, दो ट्रैक्टर, जेसीबी मशीन बैंक से पैसे उधार लेकर खरीदे थे।

इतना ही नहीं इस गिरोह ने उस व्यक्ति की मौत हो जाने के कुछ माह बाद एक दूसरे ग्राम पंचायत से नया मृत्यु प्रमाण पत्र बना लिया। उस मृत्यु प्रमाण पत्र में मृतक को 40 साल से अधिक उम्र का दिखाया गया है। साथ ही यह भी बताया गया है कि व्यक्ति की मौत अचानक हुई है। बता दें कि गिरोह के सदस्यों पूछताछ और जांच में यह भी पता चला है कि वे फर्जी, आधार कार्ड, पैन कार्ड, पोस्टमार्टम रिपोर्ट के द्वारा किए गए धोखाधड़ी के 4-5 अन्य मामले भी शामिल हैं। जांच में यह भी पता चला है कि इस गिरोह ने बीमा और फाइनेंस कंपनियों को अब तक करोड़ों का नुकसान पहुंचाया है।

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