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IAS पी. नरहरि: युवाओं को क्लासेज देकर बनाया अफसर, लाडली लक्ष्मी योजना को लेकर रहे चर्चित; दर्जी के बेटे की कहानी

एक सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद पी. नरहरि साल 1995 में हैदराबाद आ गए। वो आईआईटी की प्रवेश परीक्षा नहीं पास कर सके और हैदराबाद के एक स्थानीय कॉलेज में दाखिला लिया था।

crime, crime newsIAS पी. नरसिंह। फोटो सोर्स- फेसबुक, @P Narahari IAS

साल 2001 बैच के आईएएस पी. नरहरि (Parikipandla Narahari) ने यूपीएससी की परीक्षा में 78वां रैंक हासिल किया था। पी. नरहरि कुछ उन चुनिंदा अफसरों में शुमार हैं जिन्होंने ईमानदारी और लगन से मिसाल कायम किया है। तेलंगाना के एक छोटे से जिले करीमनगर जिले के एक छोटे से गांव बसंथनगर में जन्में पी. नरहरि के पिता दर्जी थे। उन्होंने सरकारी इंस्टीच्यूट से पढ़ाई की और फिर सरकारी यूपीएससी कोचिंग सेंटर में भी पढ़े। अपनी बेमिसाल लगन और ईमानदारी से उन्होंने अपनी किस्मत बदली।

एक ब्यूरोक्रेट के तौर पर पी. नरहरि को कई तरह के बदलाव लाने के लिए जाना जाता है। इस आईएएस अफसर को मध्य प्रदेश के इंदौर सिटी को सबसे क्लीन सिटी बनाने का श्रेय दिया जाता है। इतना ही नहीं राज्य में लाडली लक्षमी योजना को शुरू करने के लिए भी जाना जाता है। लाडली लक्षमी योजना को बाद में अन्य राज्यों ने भी अपनाया। पी. नरहरि को ‘पीपुल्स ऑफिसर’ के तौर पर भी जाना जाता है। इतना ही नहीं पी. नरहरि सिविल सर्विस की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को प्रोत्साहित करने और उन्हें तैयारी कराने के लिए भी जाने जाते हैं। उनके पढ़ाए गए करीब 400 छात्रों ने परीक्षा पास भी की है।

एक साक्षात्कार में पी. नरसिंह ने कहा था कि ‘मैं एक बेहद ही विनम्र बैकग्राऊंड से आता हूं। हमने कई आर्थिक समस्याओं का सामना किया है। जिसकी वजह से सही गाइडलाइन पाना काफी मुश्किल था। इसलिए मैंने एक मेंटर बनने का फैसला किया जो मुझे कभी नहीं मिला था। बताया जाता है कि पी. नरहरि स्कूल के दिनों से ही बेहद प्रतिभाशाली थे। उनके शिक्षक मानते थे कि जिस तरह उनके ग्रेड थे उनमें चिकित्सक, इंजीनियर और आईएएस अफसर बनने की पूरी काबिलियत थी।

एक सरकारी कॉलेज से ग्रेजुएशन करने के बाद पी. नरहरि साल 1995 में हैदराबाद आ गए। वो आईआईटी की प्रवेश परीक्षा नहीं पास कर सके और हैदराबाद के एक स्थानीय कॉलेज में दाखिला लिया था। यहां से पी. नरहरि के संघर्ष की कहानी शुरू हुई थी। घर से दूर रहने की वजह से पी. नरहरि को पैसों की भी काफी दिक्कत होती थी। आर्थिक समस्या से जूझते हुए उन्होंने स्कूली छात्रों को पढ़ाना शुरू कर दिया था।

इस दौरान वो इंजीनियरिंग की पढ़ाई भी कर रहे थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात यूपीएससी की तैयारी कर रहे कुछ छात्रों से हुई औऱ उन्हें फ्री कोचिंग के बारे में पता चला था। इंजीनियरिंग की परीक्षा में उन्होंने टॉप किया था। ग्वालियर कलेक्टर रहते हुए उन्होंने अपना फेसबुक पेज शुरू किया था, जिस पर करोड़ों की संख्या में युवा उनसे जुड़े हुए हैं।

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