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मरने से पहले सुशांत की दिमागी हालत की होगी जांच! सुनंदा पुष्कर और बुराड़ी कांड में हो चुकी है साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी

सुनंदा पुष्कर के अलावा दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही परिवार के 11 सदस्यों की लाश मिलने के बाद भी मामले की सच्चाई जानने के लिए साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी की गई थी।

सुनंदा पुष्कर मौत के मामले में भी यह जांच की गई थी।

सीबीआई की एसआईटी सुशांत सिंह राजपूत की मौत का परत दर परत खोलने में लगी हुई है। इस बीच अब खबर यह भी आ रही है कि कई रहस्यों को बेपर्दा करने के लिए केंद्रीय जांच ब्यूरो साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी (Psychological Autopsy) का भी सहारा लेगी। हालांकि यह कोई पहला मौका नहीं है जब किसी मौत की मिस्ट्री को सुलझाने के लिए साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी का सहारा लिया जा रहा है। इससे पहले चर्चित सुनंदा पुष्कर केस और दिल्ली के बुराड़ी में 11 लोगों की मौत के मामले में भी यहीं अटॉप्सी की गई थी।

पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर की पत्नी सुनंदा पुष्कर की मौत दिल्ली के एक होटल में हुई थी। होटल के कमरे में उनके मृत पाए जाने के बाद कई तरह की बातें कही जा रही थीं। कुछ लोग इसे सुसाइड तो कुछ लोग इसे हत्या भी कह रहे थे। इस मौत की जांच के दौरान सुनंदा पुष्कर की साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी की गई थी। इस दौरान यह जांचने की कोशिश की गई थी कि आत्हमत्या करने से पहले सुनंदा पुष्कर की मानसिक स्थित कैसी थी? क्या वो किस तनाव में थीं? इस अटॉप्सी के जरिए जानने की कोशिश की गई थी कि सुसाइड से पहले वो क्या सोच रही थीं।

सुनंदा पुष्कर के अलावा दिल्ली के बुराड़ी इलाके में एक ही परिवार के 11 सदस्यों की लाश मिलने के बाद भी मामले की सच्चाई जानने के लिए साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी की गई थी। साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी की रिपोर्ट से यह राज खुला था कि सभी ने आत्महत्या ही की है। साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी के जरिये यह पता चला था कि बुराड़ी में 11 आत्महत्याओं का मास्टर माइंड ललित के दिमाग में ऐसी चीजें चल रही थीं, जिसके चलते इतना बड़ा कांड हुआ। इसके जरिये ललित की मानसिक स्थिति का भी आकलन किया गया था।

आपको बता दें कि साइकोलॉजिकल ऑटोप्सी के जरिये आत्महत्या करने वाले व्यक्ति या व्यक्तियों के जीवन हाल-फिलहाल में चल रही घटनाओं पर अध्ययन किया जाता है। इसके जरिये मृतक की निजी सूचनाओं और जानकारियों मसलन मोबाइल के मैसेजेस, कॉल्स, डायरी, घर के सामानों की जांच, परिवार वालों और दोस्तों के मृतक के व्यवहार की जानकारी जैसी तमाम चीज़ों का अध्ययन कर आत्महत्या के कारण का पता लगाया जाता है।

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