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कातिल साबित हो गया, पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा- मर्डर के वक्‍त नाबालिग था, इसलिए बरी करते हैं

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अदालत की संज्ञान में यह बात लाया गया कि अपराध के वक्त सुखवंत कुमार नाबालिग थे। अदालत ने संज्ञान लिया कि सुखवंत कुमार 14 जून, 1980 को पैदा हुए थे।

सुप्रीम कोर्ट नेताओं के विवादित बोल पर ईसी की कार्रवाई से सहमत।

देश की सबसे बड़ी अदालत ने हत्या के एक आरोपी को इसलिए बरी दिया क्योंकि अपराध के वक्त वो नाबालिग था। सोमवार (15 अप्रैल, 2019) को सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस अभय मनोहर सारपे और दिनेश माहेश्वरी की बेंच ने अपने फैसले में कहा कि उस वक्त आरोपी नाबालिग था और मामले के मेरिट में जाने की कोई जरुरत नहीं थी। अदालत ने कहा कि हम इस नतीजे पर पहुंचे है कि घटना के समय आरोपी नाबालिग था और केस के अंडर ट्रायल होने की वजह से उस समय से अब तक वो जेल में ही रहा। अदालत का यह फैसला इस मामले के दोनों आरोपियों की तरफ से दायर की गई अपील याचिका पर आया है। इस मामले में पिता और बेटा दोनों पर ही हत्या का आरोप था। इससे पहले सेशन कोर्ट ने इन दोनों को बरी कर दिया था लेकिन पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट ने सेशन कोर्ट के फैसले को पलट दिया था और उन्हें दोषी करार दिया था। जिसके बाद इन दोनों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुनवाई के दौरान इनमें से एक आरोपी की मौत हो गई। इसलिए उनकी तरफ से दायर की गई याचिका खारिज हो गई। इस मामले में बेटे सुखवंत कुमार की याचिका पर कोर्ट ने सुनवाई की।

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की तरफ से अदालत की संज्ञान में यह बात लाया गया कि अपराध के वक्त सुखवंत कुमार नाबालिग था। अदालत ने संज्ञान लिया कि सुखवंत कुमार 14 जून, 1980 को पैदा हुए थे। इस अपराध को 4 जनवरी, 1998 को अंजाम दिया गया था। उस वक्त सुखवंत कुमार 17 साल और 5 मीहने के थे। इसका मतलब यह हुआ कि जब अपराध किया गया था तब सुखवंत 18 साल के नहीं थे बल्कि नाबालिग थे।

सभी साक्ष्यों को देखने और उनपर विचार करने के बाद अदालत ने कहा कि घटना की तारीख तक याचिकाकर्ता नाबालिग था। खास बात यह भी है कि सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान यह बात भी सामने आई कि घटना के वक्त सुखवंत कुमार के नाबालिग होने की सच्चाई सेशन जज और हाईकोर्ट के जज के सामने नहीं आई थी। यह बात पहली बार सुप्रीम कोर्ट में ही बताई गई थी। अदालत ने अपना फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता अंडर ट्रायल रहते हुए पहले ही जेल की सजा भुगत चुका है। कोर्ट ने अपना फैसला सुनाते वक्त राजू (सुपरा) केस का उदाहरण भी दिया। (और…CRIME NEWS)

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