मजबूर किसान की वो बेटी जिसने पिता को परेशान देख IAS बनने का किया फैसला, बनी सलेम जिले की पहली महिला कलेक्टर

तमिलनाडु के सलेम की पहली महिला कलेक्टर आईएएस रोहिणी भाजीभाकरे (IAS Rohini Bhajibhakare) की कहानी संघर्षों से भरी रही है। किसान पिता को जब बेटी ने परेशान देखा तो अफसर बनने की ठान ली। जिसके बाद उन्होंने 2008 में यूपीएससी (UPSC) क्लियर किया और आईएएस के लिए चुनी गईं।

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आईएएस रोहिणी भाजीभाकरे (फोटो- Rohini Bhajibhakare IAS fans page)

आईएएस रोहिणी भाजीभाकरे (IAS Rohini Bhajibhakare) जब सलेम में जिला कलेक्टर बन कर पहुंची तो ये एक इतिहास था। 170 सालों के इतिहास में रोहिणी पहली महिला कलेक्टर थीं, जिनकी पोस्टिंग सलेम में हुई थी।

रोहिणी के पिता एक छोटे से साधारण किसान थे। एक बार किसी योजना के लिए वो लगातार ऑफिसों के चक्कर काट रहे थे। तब रोहिणी की उम्र नौ साल की थी। मासूम बच्ची का मन पिता की मजबूरी देखकर विकल हो उठा, और तभी रोहिणी ने तय किया कि वो अफसर बनेगी।

यहां से शुरू हुआ सफर: महाराष्ट्र के सोलापुर जिले के एक छोटे से गांव उपलाई में जन्म लेने वाली रोहिणी की स्कूली पढ़ाई गांव में ही हुई। 12वीं की पढ़ाई सोलापुर में की, जहां उन्होंने स्कूल टॉप किया। इसके बाद इंजीनियरिंग की पढ़ाई की।

बचपन में जिस मासूम ने पिता को परेशान होते देख अफसर बनने का सपना देखा था वो आज भी उसे याद था। इंजीनियरिंग की पढ़ाई के दौरान ही रोहिणी यूपीएससी की तैयारी में जुट गई। बिना कोचिंग के ही रोहिणी ने तैयारी शुरू कर दी। सरकारी स्कूल से पढ़ाई, फिर सरकारी कॉलेज से ही इंजीनियरिंग करने वाली रोहिणी जब तैयारी में जुटी तो ना दिन देखी ना रात। बस पढ़ना शुरू कर दिया।

रोहिणी (IAS Rohini Bhajibhakare) की मेहनत तब सफल हुई, जब उन्होंने 2008 में यूपीएससी क्लियर कर लिया और आईएएस के लिए चुन ली गई। बचपन में जो सपना पिता के लिए रोहिणी ने देखा था, उसे वो अपनी मेहनत की बदौलत हासिल कर ली थी।

बन गया इतिहास: आईएएस के लिए चुने जाने के बाद रोहिणी (IAS Rohini Bhajibhakare) की पोस्टिंग तमिलनाडु में असिस्टेंट कलेक्टर के तौर पर हुई। इसके बाद उन्हें कलेक्टर बनाकर सलेम भेज दिया गया। यहां पोस्टिंग होते ही उन्होंने एक और इतिहास बना दिया। सलेम 1790 में जिला बना था, तब से लेकर 170 सालों में यहां कोई महिला कलेक्टर की पोस्टिंग नहीं हुई थी। रोहिणी ही पहली महिला कलेक्टर बनकर सलेम पहुंचीं थीं।

रोहिणी जहां भी गई उनके विकास कार्यों के कारण उनका नाम हमेशा से चर्चाओं में बना रहा। मधुरई जिला रोहिणी के प्रयास से ही राज्य में पहला खुले में शौच से मुक्त जिला बना था।

नहीं भूलीं पिता की बात: रोहिणी जब अधिकारी बन गईं तो उनके पिता ने एक बार कहा था कि बेटी जब भी तुम्हारे पास कोई फाइल आए तो उसे सिर्फ एक फाइल की नजर से नहीं देखना, ये देखना कि उस फाइल से कितने लोग प्रभावित हो सकते हैं। रोहिणी (IAS Rohini Bhajibhakare) इसी को मूल मंत्र मानकर आज विकास कार्यों में लगी हुईं हैं।

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