जन्म से थे दृष्टिहीन, के. सिम्हालचम के IAS अफसर बनने की कहानी…

यह सच है कि कट्ठा सिम्हाचलम को शुरुआती पढ़ाई-लिखाई में कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन होनहार कट्ठा सिम्हाचलम ने इन मुश्किलों के आगे घुटने नहीं टेके।

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IAS के. सिम्हाचलम। फोटो सोर्स- वीडियो स्क्रीनशॉट

कहते हैं जब मन में कुछ कर गुजरने का जज्बा हो और हर मुश्किल का सामना डट कर करने की हिम्मत हो तो कोई भी मुश्किल सफल होने से हमें नहीं रोक सकती। आज हम एक ऐसी शख्सियत के बारे में आपको बताने वाले हैं जिन्होंने कई मुश्किलों को पार किया और अपने धैर्य के आगे सफलता को अपने कदम चूमने के लिए मजबूर कर दिया। आंध्र प्रदेश के रहने वाले कट्ठा सिम्हाचलम बचपन से ही दृष्टिहीन थे। सामान्य तौर पर आंखों की रौशनी ना होने पर बच्चों को उनका भविष्य अंधकारमय दिखने लगता है लेकिन कट्ठा सिम्हाचलम ने हिम्मत नहीं हारी। कट्ठा सिम्हाचलम के पिता जूट का छोटा-मोटा व्यवसाय करते थे। परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। लिहाजा किसी तरह उनकी पढ़ाई-लिखाई शुरू हुई।

बड़ी मुश्किल से के. सिम्हाचलम ने अपनी डिग्री पूरी की थी और फिर बीएड का कोर्स उन्होंने किया। साल 2014 में के. सिम्हाचलम संघ लोक सेवा आय़ोग द्वारा आयोजित परीक्षा में शामिल हुए। पहले प्रयास में सिम्हाचलम ने आईएएस का विकल्प चुना, लेकिन उन्हें अपेक्षित सफलता नहीं मिली। लेकिन इसके बावजूद को घबराए नहीं।

इसके बाद उन्होंने भारतीय राजस्व सेवा (IRS) विंग में दिल्ली और हैदराबाद में आयकर अधिकारी के रूप में काम किया। यूपीएससी परीक्षा के एक और प्रयास में उन्होंने आईएएस का रैंक हासिल किया। के. सिम्हाचलम ने विजयनगरम जिले में सहायक कलेक्टर के रूप में सेवा भी दी थी।

यह सच है कि कट्ठा सिम्हाचलम को शुरुआती पढ़ाई-लिखाई में कुछ मुश्किलों का सामना करना पड़ा। लेकिन होनहार कट्ठा सिम्हाचलम ने इन मुश्किलों के आगे घुटने नहीं टेके। वो लगातार संघर्ष करते रहे और फिर अपनी मेहनत से समाज में एक बड़ा मुकाम हासिल किया। एक साक्षात्कार में कट्ठा सिम्हाचलम ने कहा था कि ‘भले ही समाज एक व्यक्ति को उसकी उपलब्धि के बाद पहचानता है, लेकिन माता-पिता पहली बार में ही अपने बच्चों की प्रतिभा को पहचान जाते हैं।’ उन्होंने कहा था कि एक IAS अधिकारी के रूप में वे लोगों की सेवा करने के लिए किसी भी हद तक जाएंगे।

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