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ऑटो चालक से प्रेरणा लेकर शुरू की थी तैयारी, IAS विपिन गर्ग की कहानी है बेहद दिलचस्प

विपिन ने एक साक्षात्कार में बताया था कि उन्होंने आईआईटी दिल्ली में दो महीने पढ़ाई भी की, लेकिन उनकी बड़ी बहन डॉ. कल्पना अग्रवाल ने उन्हें चिकित्सक बनने के लिए प्रेरित किया और फिर एम्स में प्रवेश दिला दिया।

crime, crime newsIAS विपिन गर्ग। फोटो सोर्स- सोशल मीडिया

एक बार विपिन घर से ट्यूशन पढऩे निकले लेकिन उनकी जेब में रखा 100 रुपया का नोट ऑटो में ही गिर गया। ऑटो चालक पहले तो बिना किराया लिए चला गया, लेकिन थोड़ी देर बाद ऑटो चालक वापस लौटा और उन्हें पैसे वापस करने लगा। उस वक्त ऑटो चालक को देखकर विपिन को लगा कि मेहनत बेकार नहीं जाती और उसका नतीजा जरूर मिलता है। ऑटो चालक से मिली इसी प्रेरणा ने इसके बाद उनकी जिंदगी ही बदल दी। आज बात एक ऐसे सफल इंसान की जिसकी सफलता की राह में कई रोड़े आए लेकिन इन बाधाओं को पार कर उन्होंने अपना लक्ष्य हासिल किया।

15 साल का एक लड़का आईआईटीयंस बनने का सपना लिए राजस्थान के संवाई माधोपुर जिले से कोटा आया। इससे पहले संवाई माधोपुर के आदर्श विद्या मंदिर से दसवीं कक्षा की पढ़ाई पास करने के बाद विपिन गर्ग साल 2005 में आगे की बढ़ाई के लिए अपने पिता पिता डॉक्टर एसएन गर्ग के साथ कोटा आ गए।

कोटा आने के बाद से आईएएस बनने तक का विपिन का सफर इतना आसान कभी नहीं रहा। विपिन आईआईटीयंस बनना चाहते थे लेकिन उन्हें पहला झटका उस वक्त लगा जब कोचिंग में पढ़ने के लिए उन्होंने प्रवेश परीक्षा दी और वो उसमें सफल नहीं हो सके। विपिन का ग्यारहवीं में दाखिला तो हो गया लेकिन शिक्षकों ने उन्हें गणित विषय देने से इनकार कर दिया।

आईआईटीयंस बनने का ख्वाब टूटता देख विपिन काफी दुखी हो गए। यहां तक कि उनके पिता तो अवसाद से घिर गए। धीरे-धीरे जब हालात सुधरे तब तक विपिन जूलॉजी और बॉटनी की पढ़ाई में मशगूल हो गए। हालांकि विपिन घर पर गणित की पढ़ाई भी किया करते थे।

बारहवीं की परीक्षा के साथ ही विपिन ने मेडिकल प्रवेश परीक्षा भी दी और लगनशील विपिन ने पहली ही बार में यह परीक्षा पास भी कर ली। हालांकि उस वक्त उनकी उम्र महज 17 साल थी लिहाजा उन्हें मेडिकल कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल सका।

इसके बाद विपिन की जिंदगी में कुछ ऐसा हुआ जिसकी शायद उन्होंने कल्पना तक नहीं की होगी। एक ऑटो चालक की ईमानदारी से वो इतने प्रभावित हुए कि उन्हें लगने लगा कि ईमानदारी से की गई मेहनत कभी बेकार नहीं जाती। साल 2009 में विपिन ने राजस्थान मेडिकल प्रवेश परीक्षा में दूसरा, एम्स में 17 वां और एआईपीएमटी में 22वां स्थान हासिल किया। इतना ही नहीं गणित विषय के बिना ही उन्होंने आईआईटी प्रवेश परीक्षा भी पास की।

विपिन ने एक साक्षात्कार में बताया था कि उन्होंने आईआईटी दिल्ली में दो महीने पढ़ाई भी की, लेकिन उनकी बड़ी बहन डॉ. कल्पना अग्रवाल ने उन्हें चिकित्सक बनने के लिए प्रेरित किया और फिर एम्स में प्रवेश दिला दिया। एमबीबीएस करने के बाद विपिन ने आईएस बनने की ठान ली, लेकिन बिना कोचिंग की मदद के। दो बार प्री और मेन्स क्वालिफाई करने के बावजूद वह इंटरव्यू पास नहीं कर पाए। बार-बार मिली असफलताओं के बावजूद विपिन का हौसला नहीं टूटा और उन्होंने तीसरी बार फिर परीक्षा दी और पूरे देश में 20वां रैंक हासिल किया।

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