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रेलवे स्टेशन पर सोते थे, मजदूरी भी की; IAS एम. शिवागुरु प्रभाकरन की कहानी है प्रेरणादायक

एम. शिवगुरु प्रभाकरन ने आरा मशीन में बतौर मजदूर काम किया। उन्होंने खेती भी की ताकि अपने परिवार को आर्थिक मदद पहुंचा सकें।

crime, crime newsIAS एम. शिवागुरु प्रभाकरन। फोटो सोर्स- Sivaguru Prabakaran IAS

साल 2004 में एम. शिवागुरु प्रभाकरन ने पहली बार तमिलनाडु के Thanjavur जिले के तत्कालीन डीएम जे राधाकृष्णन को देखा था। इसके बाद से ही एम. शिवागुरु प्रभाकरन सिविल सर्विस ज्वायन करने का सपना देखने लगे। एम. शिवागुरु प्रभाकरन के पिता काफी शराब पीते थे। घर की आर्थिक हालत ठीक नहीं थी। उनकी मां और बहन नारियल के पत्ते बेचकर किसी तरह आर्थिक स्थिति को सुधाने के लिए संघर्ष कर रहे थे। यूपीएससी की परीक्षा में 101वीं रैंक हासिल करने वाले तमिलनाडु के तंजावुर निवासी एम. शिवागुरू प्रभाकरन की कहानी वास्वत में ऐसी है जिसको पढ़कर आप यही कहेंगे कि हिम्मत, जज्बे के लाखों मुश्किलों के बाद भी वह व्यक्ति नहीं टूटा। साल 2004 में पैसे की कमी की वजह से इंजिनियरिंग करने का उनका सपना अधूरा रह गया था। इसके बाद आईएएस बनने की उनकी कहानी बेहद प्रेरणादायक है।

तमिलनाडु के Thanjavur जिले के एक गांव Melaottankadu के रहने वाले एम. शिवागुरु प्रभाकरन की जिंदगी संघर्षों से भरी रही। एम. शिवागुरु प्रभाकरन ने आरा मशीन में बतौर मजदूर काम किया। उन्होंने खेती भी की ताकि अपने परिवार को आर्थिक मदद पहुंचा सकें। उन्होंने संघर्ष के दिनों में किसी तरह अपने छोटे भाई को इंजीनियरिंग की पढ़ाई में पैसों की मदद की और बड़ी बहन की शादी के लिए भी पैसे जुटाए। साल 2008 में एम. शिवागुरु प्रभाकरन ने Thanthai Periyar Vellore Government Technology Institute में दाखिला लिया।

एम. शिवागुरु प्रभाकरन की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई तमिल में हुई थी और फिर उन्हें अंग्रेजी पढ़ने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। इसके बाद एम. शिवागुरु प्रभाकरन ने चेन्नई जाकर आईआईटी-मद्रास की प्रवेश परीक्षा देने का फैसला किया। उनके एक मित्र ने उन्हें एक शिक्षक St. Thomas Mount से मिलवाया। चेन्नई में रहने के लिए एम शिवागुरु प्रभाकरन के पास कोई जगह नहीं था लिहाजा उन्होंने अपनी कई रातें रेलवे स्टेशन पर गुजारी।

मेहनत की बदौलत प्रभाकरन ने आईआईटी-मद्रास में प्रवेश लिया और 2014 में एम.टेक के नतीजों में टॉप रैंक हासिल किया। इसके बाद प्रभाकरन ने चौथे प्रयास में यूपीएससी परीक्षा में सफलता अर्जित की थी।

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