ताज़ा खबर
 

फिल्म ‘दृश्यम’ की तर्ज पर हत्या कर मिटाए थे सबूत, यूं मिला कातिलों का सुराग

इस मामले में प्रदीप ने पुलिस को बरगलाने के लिए बताया था कि लीना गांव में उजले रंग की एक कार से आई थी लेकिन सोहागपुर शहर की रहने वाली लीना की एक पड़ोसी ने पुलिस को बताया कि 29 अप्रैल को वो ऑटोरिक्शा से अपने गांव गई थी।

इस हत्याकांड में सबूत को मिटाने की हर मुमकिन कोशिश की गई। प्रतीकात्मक तस्वीर। फोटो सोर्स – Indian Express

साल 2015 में अभिनेता अजय देवगन की आई फिल्म ‘दृश्यम’ एक ड्रामा मिस्ट्री थी। फिल्म में एक कत्ल के सबूतों को अभिनेता ने कुछ इस तरह मिटाए की पुलिस अपनी लाख कोशिशों के बावजूद भी इस हत्याकांड को लेकर ठोस सुराग नहीं तलाश पाई। आज हम इस फिल्म की बात इसलिए कर रहे हैं क्योंकि जुर्म की इस कहानी के किरदार कुछ-कुछ इस फिल्म के अभिनेता के किरदार से प्रभावित नजर आते हैं। बात 29 अप्रैल, 2016 की है। अमेरिकी दूतावास में काम करने वाली एक महिला लीना शर्मा की हत्या हो गई। सबसे पहले आपको बता दें कि लीना शर्मा दिल्ली के वसंत बिहार इलाके में रहती थी और उसका ननिहाल सोहागपुर के डूंडाडोह में था। सोहागपुर, मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में स्थित है। ननिहाल में उनके पैतृक जमीन को लेकर कुछ विवाद चल रहा था और वो इसी विवाद को सुलझाने लीना सोहागपुर गई थीं।

लेकिन यहां लीना शर्मा की हत्या हो गई। हत्या के बाद ऐसा लगा कि लीना के हत्यारे फिल्म ‘दृश्यम’ से काफी प्रभावित थे क्योंकि उन्होंने सबूत नष्ट करने के लिए गजब की चालाकी की। इन लोगों ने लीना शर्मा के एक सेलफोन को जबलपुर जा रही एक ट्रेन में उसी तरह फेंक दिया जिस तरह ‘दृश्यम’ में अभिनेता ने फिल्म में सेलफोन को एक बस में फेंका था। लेकिन कहते हैं रील लाइफ और रियल लाइफ में काफी अंतर होता है और रियल लाइफ की इस स्टोरी में यहीं चालाकी हत्यारों पर भारी पड़ गई। दरअसल जिस ट्रेन में उन्होंने लीना शर्मा का मोबाइल फेंका उसी ट्रेन के एक यात्री को यह फोन इत्तिफाक से मिल गया। इस यात्री ने फोन उठा लिया और उसमे से सिम कार्ड निकाल कर सिम को उसने होशंगाबाद के पिपरिया के पास फेंक दिया। इसके बाद 5 मई को यह सिम कार्ड पिपरिया में एक युवक को मिला। उसने इस सिम कार्ड को दूसरे फोन में जैसे ही डाला लीना की दोस्त को लीना के नंबर के चालू होने का सिग्नल मिला, जिससे वो समझ गईं कि कुछ ना कुछ गड़बड़ जरूर हुआ है।

पिपरिया का यह युवक लीना के सिम कार्ड का इस्तेमाल कर रहा था औऱ इसी से पुलिस को भी सुराग मिला कि इस मामले में सबकुछ ठीक नहीं है। बाद में इस मामले में पुलिस ने सर्विलांस का सहारा भी लिया। हालांकि मामले की जांच कर रही पुलिस को उस वक्त सबसे बड़ा सुराग हाथ लगा जब गांव के कुछ लोगों ने पुलिस को बताया कि उन्होंने दुदेहा गांव के एक खेत में प्रदीप और उसके साथियों को लीना पर हमला करते हुए देखा था। पुलिस ने तुरंत इस मामले में प्रदीप के सहयोगी गोरे लाल और राजेंद्र को पूछताछ के लिए पकड़ा और उन्होंने कड़ी पूछताछ के दौरान सारे राज उगल दिए। इसके बाद प्रदीप जो कि उस वक्त सोहागपुर ब्लॉक का कांग्रेस प्रमुख था वो भागकर भोपाल आ गया। लेकिन पुलिस ने उसे वहां पकड़ लिया।

पुलिस की पूछताछ में प्रदीप ने बताया कि उसके लोगों ने जमीन विवाद को लेकर लीना पर रॉड और पत्थरों से हमला किया था। हत्या के बाद लीना के शव को गांव से चार किलोमीटर दूर स्थित कमाती के जंगलों में फेंक दिया गया था। पुलिस ने उस वक्त बताया था कि प्रदीप ने लीना शर्मा की हत्या करने की प्लानिंग पहले से ही कर रखी थी। इसी के तहत फोन को ट्रेन में फेंकने की योजना पहले से बनाई गई थी। इतना ही नहीं लीना की डेड बॉडी पर नमक डालकर मर्डर के सबूत मिटाने की कोशिश भी की गई थी। पुलिस ने उस वक्त बताया था कि प्रदीप ने लीना की 10 एकड़ जमीन पर अवैध तरीके से कब्जा कर रखा था। लीना इस जमीन की घेराबंदी कराना चाहती थी और वो इसी काम के लिए अपने गांव गई थी। लेकिन यहां प्रदीप ने जानबूझ कर उसे उकसाया और उससे लड़ाई कि और फिर बाद में उसकी हत्या कर दी।

इस मामले में प्रदीप ने पुलिस को बरगलाने के लिए बताया था कि लीना गांव में उजले रंग की एक कार से आई थी लेकिन सोहागपुर शहर की रहने वाली लीना की एक पड़ोसी ने पुलिस को बताया कि 29 अप्रैल को वो ऑटोरिक्शा से अपने गांव गई थी। बता दें कि इस मामले में बाद में यह भी खुलासा हुआ था कि लीना प्रदीप को चाचा कहती थी। (और…CRIME NEWS)

Hindi News से जुड़े अपडेट और व्‍यूज लगातार हासिल करने के लिए हमारे साथ फेसबुक पेज और ट्विटर हैंडल के साथ लिंक्डइन पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News App

X