विधायक-नेता की हत्या के आरोपी को पकड़ा, कुख्यात बावरिया गैंग का सफाया करने वाले IPS सांगाराम जांगिड़ की कहानी…

विधायक की हत्या वाली जगह पर मिली एक जोड़ी जूती के सहारे जांगिड़ ने जांच को आगे बढ़ाया था।

crime, crime newsIPS सांगाराम जांगिड़। फेसबुक

राजस्थान राज्य का एक जिला है बाड़मेर और बाड़मेर का एक गांव है कवास। इसी गांव में डूंगरराम जांगिड़ के घर सांगाराम जांगिड़ का जन्म हुआ था। जांगिड़ का परिवार आर्थिक रूप से अत्यधिक संपन्न नहीं था लिहाजा जीवन यापन करना थोड़ा मुश्किल था। सांगाराम जांगिड़ को घर के काम के साथ-साथ बकरियां चराना, खेतों में हल जोतना भी पड़ता था। सबसे मुश्किल था उस वक्त घर में पानी जुटाना। सांगाराम जांगिड़ ने एक साक्षात्कार में बताया था कि उनके गांव कवास से सात किलोमीटर दूर नागाणा गांव है। उस वक्त एकमात्र कुआं इसी गांव में हुआ करता था। सांगाराम रोज ऊंट पर सवार होकर पेयजल लाने के लिए इस गांव में जाते थे।

इन तमाम मुश्किलों के बावजूद सांगाराम जांगिड़ पढ़ाई-लिखाई के दिनों में शुरू से ही मेधावी थे। 10वीं तक की पढ़ाई उन्होंने कवास के ही सरकारी स्कूल से की थी। कक्षा 11वीं और 12वीं और फिर बीए तक की पढ़ाई उन्होंने बाड़मेर जिला मुख्यालय से पूरी की। फिर एमए करने जयपुर आ गए। वर्ष 1979 में राजस्थान विश्वविद्यालय में एमए की पढ़ाई का खर्च निकालने के लिए जयपुर टेलीफोन एक्सजेंच में बतौर ऑपरेटर पार्ट टाइम जॉब भी करते थे। इसके बावजूद एमए में पूरे राजस्थान में सांगाराम जांगिड़ तीसरे स्थान पर रहे थे।

इसके बाद सांगाराम साल 1985 बैच के भारतीय पुलिस सेवा के अफसर बन गये। बतौर अफसर सांगाराम जांगिड़ ने कई बड़े कारनामों को अंजाम दिया। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि थी बावड़िया गैंग का सफाया। एक साक्षात्कार में उन्होंने ‘ऑपरेशन बावरिया’ का जिक्र करते हुए बताया था कि किस तरह उन्होंने 24 हत्याएं और कई डकैती करने वाले खूंखार गैंग का सफाया किया।

वह अपने जिले से आइपीएस बनने वाले पहले व्यक्ति थे। उन्हे तमिलनाडु कैडर मिला। विभिन्न जिलों में तैनाती के दौरान वह काफी लोकप्रिय हो गए थे, लेकिन वर्ष 2005-06 में बावरिया गैंग का पर्दाफाश कर वह राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आ गए। इस गैंग ने तमिलनाडु की तत्कालीन मुख्यमंत्री जयललिता के खास विधायक टी.सुदर्शन एवं कांग्रेस नेता टीएम नटराजन की हत्या कर दी थी। तब जयललिता ने तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक (कानून व्यवस्था) सांगाराम जांगिड़ की अगुवाई में एक टीम बनाई थी।

विधायक की हत्या वाली जगह पर मिली एक जोड़ी जूती के सहारे जांगिड़ ने जांच को आगे बढ़ाया था। जूती से साफ हो गया था कि आरोपित उत्तर भारत के हैं, क्योंकि दक्षिण भारत में जूती नहीं पहनी जाती है। मौके के फिंगर प्रिंट भी काफी काम आए। जांगिड़ ने अपने 50 साथी अधिकारियों एवं पुलिसकर्मियों के साथ राजस्थान, हरियाणा एवं उत्तरप्रदेश में ऑपरेशन चलाया था। ऐसे अपराधों में शामिल रहने वाले बावरिया और कंजर गिरोह की छानबीन की गई थी। इस ऑपरेशन को करीब पांच माह बाद सफलता मिली थी।

जांगिड़ की टीम ने आगरा से सटे राजस्थान के धौलपुर, भरतपुर एवं उत्तर प्रदेश के मेरठ और हरियाणा के पलवल में छापेमारी करते हुए 13 लोगों को गिरफ्तार किया। गैंग का सरगना भरतपुर का ओम बावरिया था। इसे भी संगाराम जांगिड़ के नेतृत्व में बनी टीम ने धर दबोचा था। आरोपितों ने विधायक की हत्या सहित अन्य वारदातें करना स्वीकार कर लिया था। बावरिया गैंग को पकड़कर वह राष्ट्रीय स्तर पर इस कदर चर्चित हुए कि उन पर बनी तेलुगू फिल्म थीरन ने जबरदस्त धूम मचाई थी।

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