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मुंबई की सड़कों पर हर रोज एक कत्ल, हत्यारे ने चिकन खाकर यूं उगले थे राज

मुंबई में साल 1965 से 1966 के बीच करीब 19 लोगों को मौत के घाट उतारा। लेकिन उसके बाद अचानक हत्याओं का यह सिलसिला थम गया।

चिकेन खाने के बाद इसने अधिकारियों से वेश्या की मांग की। प्रतीकात्मक तस्वीर।

मुंबई के बारे में एक बात जो काफी मशहूर है वो यह कि यह शहर कभी नहीं सोता। लेकिन इसी मुंबई का एक सीरियल किलर ऐसा भी है जिस शहर के कई लोगों को हमेशा के लिए मौत की नींद सुला दिया। अपराध की किताब में इस कातिल का नाम रमन राघव है। रमन राघव की कहानी 60 के दशक की है लेकिन उसके खौफनाक जुर्म की दास्तान सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं। तेजी से भागती-दौड़ती मुंबई शहर के उत्तरी उपनगरीय इलाकों में गरीब, फुटपाथ पर सोने वाले और झुग्गियों में रहने वाले लोगों की संख्या काफी ज्यादा थी। रमन राघव हत्या की अपनी सनक को पूरी करने के लिए इन्हीं गरीब लोगों को अपना निशाना बनाता था।

जानकारी के मुताबिक साल 1929 में रमन राघव का जन्म हुआ था। 30 साल की अवस्था में पहुंचते-पहुंचते रमन एक कुख्यात सीरियल किलर बन गया। कहा जाता है कि 60 के दशक में रमन ने 40 से ज्यादा लोगों की हत्या की थी। वो ज्यादातर रात के वक्त लोगों को अपना शिकार बनाता। वो गहरी नींद में सो रहे लोगों पर किसी भारी या भोथरे चीज से हमला करता और उन्हें हमेशा के लिए मौत की नींद सुला देता। दरअसल नींद में हमला होने की वजह से सामने वाले को संभलने तक का मौका नहीं मिलता था। एक खास बात यह भी है कि रमन राघव सालों तक मुंबई पुलिस के लिए एक रहस्यमयी कातिल बना रहा।

उस वक्त मुंबई के कातिल को लेकर मीडिया में भी काफी चर्चा होती थी लेकिन पुलिस इस कातिल तक पहुंच पाने में नाकाम थी। इसी वजह से रमन राघव को उस वक्त भारत का ‘जैक द रीपर’ नाम दिया गया था। मुंबई में साल 1965 से 1966 के बीच करीब 19 लोगों को मौत के घाट उतारा। लेकिन उसके बाद अचानक हत्याओं का यह सिलसिला थम गया। दो साल बाद यानी साल 1968 में इस रहस्यमयी हत्यारे ने एक बार फिर मुंबई में कहर बरपाना शुरू कर दिया। हालत यह थी कि शाम के वक्त मुंबई की सड़कों पर सन्नाटा पसर जाता था और दहशत की वजह से लोग झुंड में भी घर से बाहर निकलते थे।

इसी साल मुंबई क्राइम ब्रांच के तेज तर्रार पुलिस ऑफिसर रमाकांत कुलकर्णी ने मुंबई के इस सीरियल मर्डरर का केस अपने हाथ में लिया और आखिरकार वो हत्यारे तक पहुंचने में कामयाब हुए। कहा जाता है कि जब पुलिस वालों ने रमन को पकड़ा तो उसके बयान दर्ज करने से पहले उससे पूछा कि उसे क्या चाहिए? रमन ने उस वक्त चिकने खाने की इच्छा जताई थी। रमन को उसी वक्त चिकेन खिलाया गया था। चिकेन खाने के बाद रमन ने वेश्या और ऐश-ओ-आराम के साजो सामान की मांग भी की थी। हालांकि उसकी इस मांग को उस वक्त अधिकारियों ने ठुकराया दिया था। चिकने खाने के बाद रमन ने कत्ल के खौफनाक राज खोले थे।

कद-काठी से लंबा और शरीर से मजबूत रमन साऊथ इंडिया से ताल्लुक रखता था। बेहद कम पढ़ा-लिखा रमन एक जिद्दी इंसान था। रमन ने कई हत्याओं के बारे में पुलिस को बताया था। रमन राघव को पुणे के यरवदा जेल में बंद किया गया था। साल 1987 में हाईकोर्ट ने उसके मौत की सजा को उम्रकैद में तब्दील कर दिया। जानकारी के मुताबिक जेल में रमन को किडनी से संबंधित बीमारी हो गई और इसी वजह से उसकी मौत हो गई। रमन राघव के बारे में यह भी कहा जाता है कि उसने अपनी ही बहन के साथ दुष्कर्म किया था। जिस पुलिस अफसर ने रमन को बेनकाब किया था उन्होंने उस पर दो किताबें फुटप्रिंट्स ऑन दि सैंड्स ऑफ क्राइम और क्राइम्स, क्रिमिनल्स एंड कॉप्स भी लिखी थी। (और…CRIME NEWS)

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