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सोनभद्रः 90 बीघा जमीन की लड़ाई में 10 को गोलियों से भूना, इन प्वाइंट्स में समझें 64 साल पुराना मामला

सोनभद्र जिले के ऊम्भा गांव में 90 बीघा जमीन के लिए 17 जुलाई को कत्लेआम हुआ था। उस दौरान 10 लोगों को गोलियों से भून दिया गया।

Author सोनभद्र | July 19, 2019 5:59 PM
प्रतीकात्मक फोटो (फोटो सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

उत्तर प्रदेश का सोनभद्र जिला मीडिया की सुर्खियों में छाया हुआ है। वजह है 10 लोगों की हत्या, जिन्हें 90 बीघा जमीन के लिए गोलियों से भून दिया गया। दरअसल, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र जिले के ऊम्भा गांव में गोंड और गुज्जर समुदाय रहते हैं। इनके घरों के बीच करीब 4 किलोमीटर का फासदा है, लेकिन इस दायरे में 90 बीघा ज़मीन भी आती है। इस जमीन को लेकर ही दोनों समुदायों में काफी समय से विवाद चल रहा था। इसी 90 बीघा जमीन पर कब्जे के लिए गुज्जर समुदाय से ताल्लुक रखने वाले ग्राम प्रधान यज्ञदत्त भूरिया ने 17 जुलाई को ऐसी वारदात को अंजाम दे दिया, जिसने पूरे उत्तर प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। उस दिन यज्ञदत्त 100 लोगों के साथ सोनभद्र पहुंचा था और उसने गोंड समुदाय के लोगों को गोलियों से भून डाला। इस घटना में 10 लोगों की मौत हो गई।

1. 1955 में पड़ी इस विवाद की नींव: जांच में सामने आया है कि इस विवाद की नींव 64 साल पहले 1955 में पड़ी थी। उस वक्त के तहसीलदार ने गैरकानूनी तरीके से ग्राम समाज की जमीन को आदर्श कोऑपरेटिव सोसायटी के नाम कर दिया था।

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2. दशकों से इस जमीन पर खेती कर रहे थे लोग: बताया जा रहा है कि जमीन सोसायटी के नाम हो गई थी, लेकिन ऊम्भा गांव में रहने वाले गोंड समुदाय के लोग दशकों से इस पर खेती कर रहे थे। इसके एवज में वे सोसायटी को किराया भी देते थे।

3. दो साल पहले बेच दी गई जमीन: सोनभद्र के जिला मैजिस्ट्रेट अंकित कुमार अग्रवाल ने राजस्व रिकॉर्ड का हवाला देते बताया कि जमीन पहले ‘आदर्श कृषि सहकारी समिति’ के नाम पर रजिस्टर्ड थी। इस समिति ने स्थानीय लोगों को किराए पर खेती की अनुमति दे रखी थी। अग्रवाल के मुताबिक ” 1990 में जमीन का मालिकाना हक दो लोगों को ट्रांसफर कर दिया गया, जो एक आईएएस अधिकारी की मां व पत्नी थीं। उन्होंने 2 साल पहले ग्राम प्रधान यज्ञदत्त भूरिया समेत 3 लोगों को यह जमीन बेच दी।

4. यहां से शुरू हुआ असल विवाद: गांव के लोगों का कहना है कि यह जमीन का विवाद दो साल से चल रहा था। केस लड़ रहे रामराज बताते हैं, “हमें उस वक़्त आश्चर्य हुआ था, जब हमें जमीन बिकने की जानकारी मिली। इस जमीन पर हम दशकों से खेती कर रहे हैं। जमीन एक सोसाइटी से संबंध रखती थी, लेकिन हमें नहीं मालूम कि यह कैसे बेची जा सकती है? हमने अदालत में इस डील को चुनौती भी दी है। रामराज का कहना है कि यज्ञदत्त ने अक्टूबर 2018 में भी जमीन जबरन छीनने की कोशिश की थी।

5. क्या हुआ था 17 जुलाई को?: 30 साल के विजय गोंड बताते हैं, “बुधवार सुबह जब हम खेतों में काम कर रहे थे, तभी 20-25 ट्रैक्टर पर सवार करीब 100 लोग गांव में घुस आए। उनके पास हथियार भी थे। यह जानकारी मिलते ही सभी लोग खेतों की तरफ भागे। हमने प्रधान से कहा कि वे अदालत के फैसले का इंतजार करें या बैठकर मसले पर बात कर ले, लेकिन उन्होंने हमारी बात नहीं सुनी और अपने ट्रैक्टर से खेतों को जोतना शुरू कर दिया। हमने उन्हें रोकने की कोशिश की तो प्रधान के लोगों ने फायरिंग शुरू कर दी। हमारे कुछ साथियों ने लाठियों से हमला बोला तो उन्हें भी गोली मार दी गई।

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6. अब तक यह कार्रवाई: पुलिस इस मामले में 26 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिनमें ग्राम प्रधान यज्ञदत्त भूरिया भी शामिल है। यज्ञदत्त के साथ उसके दो बड़े भाइयों देवदत्त, निधिदत्त, 2 भतीजों गणेश और विमलेश को भी गिरफ्तार किया गया है। साथ ही, सोनभद्र की सभी सीमाएं सील करके जिले में धारा-144 लगा दी है। द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, पीड़ित परिवार के एक चश्मदीद ने बताया कि प्रधान ने जमीन पर कब्जे के लिए दूसरी बार हमला कराया था।

7. सोनभद्र पर गरमाई राजनीति: सोनभद्र में 10 लोगों की हत्या के बाद राजनीति भी गरमा गई। शुक्रवार (19 जुलाई) सुबह कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोनभद्र जाने की कोशिश की तो उन्हें मिर्जापुर में ही रोक लिया गया। इसके विरोध में वह धरने पर बैठीं तो पुलिस ने उन्हें हिरासत में ले लिया। इस बीच सपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने भी सोनभद्र जाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने उन्हें भी रोक लिया।

8. शुरू हुई बयानबाजी: प्रियंका गांधी को रोकने के बाद कांग्रेस ने योगी सरकार पर हमला बोलना शुरू कर दिया। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ट्वीट किया, ‘‘प्रियंका गांधी को गिरफ्तार करके और चुनार में नजरबंद करके सोनभद्र के आदिवासी परिवार के 10 सदस्यों की हत्या पर पर्दा डाल पाएगी आदित्यनाथ सरकार?’’ इसके बाद राहुल गांधी ने भी ट्वीट किया। उन्होंने लिखा, ‘‘सोनभद्र में प्रियंका गांधी को गैरकानूनी तरीके से गिरफ्तार किया गया है। यह सत्ता का दुरुपयोग है। सरकार का मकसद प्रियंका को उन 10 आदिवासी किसानों के परिजनों से मिलने से रोकना था, जिन्होंने जमीन खाली नहीं करने पर बेरहमी से मार दिया गया।’’

9. प्रियंका गांधी ने भी कही यह बात: पुलिस द्वारा हिरासत में लिए जाने के बाद प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा, ‘‘मैं पार्टी के 4 कार्यकर्ताओं के साथ सोनभद्र के पीड़ितों से मिलने जा रही थी, लेकिन मुझे रास्ते में रोक लिया गया। धारा-144 सोनभद्र में लागू है, लेकिन मुझे मिर्जापुर में क्यों रोक लिया गया? मैंने अधिकारियों से इस संबंध में जारी आदेश दिखाने के लिए कहा, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया।’’

10. सीएम योगी ने दिया यह आदेश: सोनभद्र नरसंहार पर विवाद बढ़ता देखकर सीएम योगी आदित्यनाथ ने मामले की जांच के लिए 3 सदस्यीय कमेटी गठित की है। साथ ही, 10 दिन में सोनभद्र पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। इसके अलावा जिले के 4 अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। सीएम योगी ने कहा है कि दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

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