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मुख्यमंत्री की हत्या में बंद सिखों की नहीं हुई रिहाई, ऐक्टिविस्ट खालसा ने वाटर टैंक में कूदकर दी जान

सिखों समुदाय की बेहतरी के लिए लड़ाई लड़ने वाले एक्टिविस्ट गुरुबख्श सिंह खालसा(52) ने मंगलवार(20 मार्च) को वाटर टैंक में कूदकर जान दे दी। यह घटना उनके कुरुक्षेत्र जिले के पैतृक गांव ठसका अली में हुई।

Author नई दिल्ली | March 21, 2018 12:16 PM
जेल में बंद सिखों की रिहाई की मांग को लेकर संघर्षरत गुरुबख्श सिंह खालसा ने की आत्महत्या

सिखों समुदाय की बेहतरी के लिए लड़ाई लड़ने वाले एक्टिविस्ट गुरुबख्श सिंह खालसा(52) ने मंगलवार(20 मार्च) को वाटर टैंक में कूदकर जान दे दी। यह घटना उनके कुरुक्षेत्र जिले के पैतृक गांव ठसका अली में हुई। खालसा पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की हत्या में सजा काट चुके सिख कैदियों की रिहाई के लिए आंदोलनरत थे। मांग पूरी न होने पर उनके आत्महत्या की बात कही जा रही है।
जब खालसा ने वाटर टैक में छलांग लगाई तो हड़कंप मच गया। किसी तरह उन्हें बाहर निकाला गया। फिर लोग लोक नायक जय प्रकाश सरकारी अस्पताल लेकर पहुंचे। जहां चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। कुरुक्षेत्र के पुलिस अधीक्षक अभिषेक गर्ग ने बताया कि प्राथमिक जांच में पता चला है कि वह कुछ लोगों की रिहाई की मांग कर रहे थे। पुलिस ने सीआरपीसी के सेक्शन 174 के तहत केस दर्ज कर लिया है। पोस्टमार्टम के बाद शव को परिवार के सुपुर्द कर दिया गया है।

पुलिस के मुताबिक दोपहर करीब एक बजे खालसा जेल में बंद सिखों की रिहाई की मांग को लेकर गांव के वाटर टैंक के ऊपर चढ़ गए। फिर कुछ नारे लगाते हुए टैंक में कूद गए। खालसा की मौत की जानकारी होते ही उनके समर्थक आक्रोशित हो उठे। इस पर पुलिस ने पूरे इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी है। बता दें कि खालसा जेल में बंद उन सात सिखों की रिहाई की मांग कर रहे थे, जिन्हें पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री बेअंत सिंह की 1995 में हुई हत्या के मामले में सजा मिली थी। पंजाब के मोहाली स्थित गुरुद्वारा पर नवंबर 2013 में गुरु बख्श खालसा ने 44 दिन की भूख हड़ताल की थी। सरकार से रिहाई का आश्वासन मिलने पर उन्होंनने 27 दिसंबर 2013 को भूख हड़ताल खत्म की थी। बाद में जब आश्वासन पूरा नहीं हुआ था तो उन्होंने 14 नवंबर 2014 को फिर भूख हड़ताल की थी।

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