पिता के साथ जूते की दुकान में करते थे काम, IAS शुभम गुप्ता के संघर्ष की कहानी…

एमकॉम करने के बाद शुभम ने यूपीएसी की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। शुभम ने पहली बार 2015 में यूपीएससी की परीक्षा दी लेकिन तब वे प्री भी क्लियर नहीं कर पाए।

crime, crime newsIAS शुभम गुप्ता। फोटो सोर्स- फेसबुक. @Shubham Gupta

राजस्थान के जयपुर के रहने वाले शुभम गुप्ता के पिता जूते का कारोबार करते थे। उनका बिजनेस महाराष्ट्र में था। घर की माली हालत ठीक नहीं थी लिहाजा पिता की मदद करने के लिए शुभम भी महाराष्ट्र आ गए। शुभम अपने पिता के जूते की दुकान में काम करने लगे। तीन भाई-बहनों में छोटे शुभम और उनकी बहन का स्कूल बहुत दूर था और दोनों ट्रेन से प्रतिदिन स्कूल जाया करते थे। ट्रेन से आने-जाने के दौरान भी शुभम अपनी पढ़ाई जारी रखते थे। शुभम तब आठवीं कक्षा में पढ़ते थे। उनके बड़े भाई आईआईटी की तैयारी के लिए बाहर रहते थे। दसवीं में बेहतरीन प्रदर्शन पर लोगों ने उन्हें साइंस लेने को कहा, लेकिन वह शुरू से कॉमर्स करना चाहते थे तो इसी स्‍ट्रीम में आगे की पढ़ाई की।

शुभम आगे की पढ़ाई जारी रखने के लिए दिल्ली आ गए। दिल्ली में आकर वो श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स में एडमिशन लेना चाहते थे लेकिन उनका एडमिशन वहां नहीं हो सका। इसके बाद उन्होंने किसी दूसरे कॉलेज में एडमिशन लिया और फिर यहीं से ग्रेजुएशन और एमकॉम पूरा किया। शुभम के पिता ने उन्हें यूपीएससी की परीक्षा में शामिल होने के लिए प्रेरित किया। घर की आर्थिक स्थिति खराब होने की वजह से शुभम ने बचपन से ही संघर्ष किया।

शुभम स्कूल से आने के बाद चार बजे तक दुकान पहुंच जाते थे और रात तक वहीं रहते थे और ऐसा होता था कि वो यहीं कुछ समय निकालकर पढ़ाई भी कर लिया करते थे। तब शुभम 8वीं कक्षा में थे। 8वीं कक्षा से 12वीं कक्षा तक यानी पांच साल उन्होंने ऐसे ही अपना जीवन जिया। इसी वजह से न उनको दोस्त बने, न उन्होंने कोई स्पोर्ट खेला, क्योंकि उनके पास इन सब के लिये समय ही नहीं था। शुभम ने अपनी दसवीं की क्लास काफी अच्छे अंको से पास की थी।

एमकॉम करने के बाद शुभम ने यूपीएसी की परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। शुभम ने पहली बार 2015 में यूपीएससी की परीक्षा दी लेकिन तब वे प्री भी क्लियर नहीं कर पाए। बइसके बाद दूसरे प्रयास में उनका सलेक्शन तो हुआ लेकिन 366 रैंक होने के कारण मनचाही पोस्ट नहीं मिली।

उन्हे उस वक्त इंडियन ऑडिट और एकाउंट सर्विस में चुना गया था,लेकिन उन्होंने इस पद को ठुकरा दिया। इसके बाद तीसरी बार 2017 में फिर परीक्षा दी, लेकिन उनका चयन इसमें नहीं हो सका। ये पल उनके लिए हताशा का था, लेकिन अपने लक्ष्य को पाने के लिए वह एक बार फिर से जुट गए और 2018 में चौथे प्रयास में शुभम ने 6वीं रैंक हासिल की।

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