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3 बजे SSP से बोला- गैंग ऑफ वासेपुर रंगदारी मांग रहा है, 5 बजे बदमाशों ने दाग दी बुलेट

कारोबारी से बीते 10 दिनों से फोन पर गैंग आॅफ वासेपुर के नाम पर रंगदारी मांगी जा रही थी। इसी शिकायत को लेकर रंजीत कुमार मंगलवार (21 अगस्त) को धनबाद के एसएसपी मनोज रतन चोथे से दोपहर 3 बजे मिले थे। लेकिन उसी शाम 5 बजे रंजीत कुमार को गोलियों से भून दिया गया।

हत्‍या से पहले और बाद में कारोबारी रंजीत कुमार सिंह। फाेटो-Twitter/@RDRajDey1

झारखंड के धनबाद में सरेशाम बदमाशों ने ट्रांसपोर्ट कारोबारी रंजीत कुमार सिंह की गोलियां मारकर हत्या कर दी। कारोबारी झारखंड विकास मोर्चा के युवा मोर्चा का जिलाध्यक्ष भी था। कारोबारी से बीते 10 दिनों से फोन पर गैंग आॅफ वासेपुर के नाम पर रंगदारी मांगी जा रही थी। इसी शिकायत को लेकर रंजीत कुमार मंगलवार (21 अगस्त) को धनबाद के एसएसपी मनोज रतन चोथे से दोपहर 3 बजे मिले थे। लेकिन उसी शाम 5 बजे रंजीत कुमार को गोलियों से भून दिया गया।

बता दें कि मंगलवार की दोपहर 3 बजे धनबाद के बीकेबी ट्रांसपोर्ट के मालिक रंजीत कुमार सिंह ने एसएसपी से मुलाकात की। रंजीत कुमार को शिकायत थी कि उन्हें धनबाद जेल से फोन आ रहा है। फोन करने वाला कहता है कि वह गैंग आॅफ वासेपुर का सदस्य है। वह खदान से कोयले की ढुलाई के एवज में 5 रुपये प्रति टन रंगदारी मांग रहा है। उन्हें जान—माल का खतरा है। एसएसपी ने मामले की जांच का भरोसा दिया था।

लेकिन उसी दिन शाम पांच बजे शूटरों ने कुसुंडा रेलवे साइडिंग के पास रंजीत सिंह की कार पर ताबड़तोड़ गोलियां बरसाईं। नकाबपोश हमलावरों की संख्या 4 थी। वह दो बाइकों पर सवार थे। कुल 6 गोलियां चलाई गईं। इन गोलियों में चार गोलियां रंजीत सिंह को लगी। जबकि एक गोली कार के चालक मुन्ना को लगी। घायल मुन्ना ही 6 किमी तक कार को चलाकर नजदीक स्थित अशर्फी अस्पताल ले गया। जहां रंजीत सिंह को मृत घोषित कर दिया गया। जबकि मुन्ना का इलाज अभी चल रहा है।

रंजीत की मौत की खबर मिलते ही सैकड़ों की संख्या में लोग अस्पताल पहुंच गए। पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाकर जमकर हंगामा किया गया। एसपी ग्रामीण आशुतोष शेखर जब अस्पताल पहुंचे तो नाराज लोगों ने एसपी पर चप्पलें फेंकना शुरू कर दिया। किसी तरह नाराज लोगों को शांत करवाने के बाद एसपी ने घायल ड्राइवर से वारदात के बारे में जानकारी ली। पुलिस ने शव को अपने कब्जे में ले लिया। बुधवार को शव का पोस्टमार्टम कराया गया।

कारोबारी रंजीत कुमार के साथियों ने मीडिया को बताया कि ट्रांसपोर्टिंग का काम करीब डेढ़ महीना पहले ही रंजीत को मिला था। ट्रांसपोर्टिंग का काम मिलते ही गैंग्स के धमकी भरे फोन आने लगे थे। उन्होंने 20 दिन में 3 बार पुलिस अधिकारियों को पत्र लिख सुरक्षा की मांग की थी। रंजीत को जब तक सुरक्षा मिलती, कोयलांचल के अपराधी उनकी जान लेने में कामयाब हो गए।

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