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पहली महिलाएं जिन्हें आजाद भारत में सुनाई गई थी फांसी की सजा, बच्चे के टुकड़े थैले में डाल देखी थी हॉल में पिक्चर

इसके बाद इन्होंने 14, अगस्त 2014 को राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी, उस वक्त भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी थे।
सीरियल किलर रेणुका शिंदे और सीमा गावित।(फोटो सोर्स-यूट्यूब)

इतिहास में ऐसी कई सीरियल किलिंग की घटनाएं हुई हैं जिनके बारे में जानकर आज भी लोग सिहर जाते हैं। आज हम आपको ऐसे ही सीरियल किलर के बारे में बता रहे हैं जिसने हैवानियत की सारी हदें  पार कर दी थी। हम बात कर रहे हैं दो सीरियल किलर बहनों, रेणुका शिंदे और सीमा गावित की। ये दोनों बहनें छोटे बच्चों को अपना शिकार बनाती थीं। बच्चों का अपहरण करने के बाद ये दोनों बहनें उनकी निर्मम हत्या से भी नहीं कतराती थीं।

रेणुका शिंदे और सीमा गावित ने 1990 से 1996 के बीच पुणे, थाणे, कोल्हापुर और नासिक जैसे तमाम शहरों से बच्चों का अपहरण किया था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह सिलसिला तब शुरू हुआ जब 1990 में रेणुका पुणे के एक मंदिर में चोरी करते हुए पकड़ी गई और एक बच्चे की आड़ में वहां से बच निकली थी। जब रेणुका को चोरी करते हुए पकड़ा गया उसके पास एक नवजात बच्चा भी था। उसी नवजात बच्चे की वजह से रेणुका भीड़ की सहानुभूति हासिल की और वहां से भाग गई थी।

कहा जाता है कि तभी से उसके दिमाग में बच्चा चोरी का ख्याल आया था। इसके बाद रेणुका अपनी बहन सीमा और मां के साथ मिलकर बच्चों का अपहरण करती थी। जब बच्चे बड़े हो जाते थे और वह उनके किसी काम के नहीं रहते थे तो ये महिलाएं उनकी बड़ी बेरहमी से हत्या कर देती थी।

1996 में एक बच्चे के अपहरण के आरोप में पुलिस ने इन्हें नासिक से गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान यह कातिल महिलाएं जो-जो राज पुलिस के सामने खोल रही थीं उससे हर कोई हैरान था। इन महिलाओं ने कई शहरों से करीब 13 बच्चों का अपहरण किया था और उनमें से 6 को मौत के घाट उतारा था।

कहा जाता है कि सीमा ने एक सात महीने के बच्चे को तो सिर्फ इसलिए जमीन पर फेंककर मार दिया था क्योंकि वह रोते हुए चुप नहीं हो रहा था। वहीं एक दो साल के बच्चे का सिर पहले दीवार से पटक-पटक के उसकी जान ली। फिर उसके छोटे-छोट टुकड़े करके एक थैले में भर दिए और उसके बाद कोल्हापुर के एक सिनेमा हॉल में पिक्चर देखी थी।

पुलिस की गिरफ्त में आने के बाद रेणुका के पति किरण शिंदे ने सरकारी गवाह बनकर पुलिस की मदद की थी। वहीं इनके खुद के वकील ने दोनों बहनों की मां अंजना को मुख्य साजिशकर्ता बताया था, जिसने दोनों को अपराध की दुनिया में उतारा था। हालाकिं इन दोनों बहनों की मां बीमारी के चलते 1998 में मर गई थी।

29 जून 2001 को सेशन कोर्ट ने रेणुका शिंदे और सीमा गावित को 13 बच्चों के अपहरण और 6 बच्चों के कत्ल का दोषी पाया था। 31, अगस्त 2006 को हाई कोर्ट ने इन दोनों सीरियल किलर बहनों को फांसी की सजा सुनाई थी, इससे पहले आजादी के बाद भारत में किसी महिला को फांसी की सजा नहीं सुनाई गई थी।

कोर्ट के फैसले के साथ ही ये दोनों बहनें आजाद भारत में फांसी की सजा पाने वाली पहली महिलाएं बन गई थी। इसके बाद इन्होंने 14, अगस्त 2014 को राष्ट्रपति को दया याचिका भेजी। उस वक्त भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी थे, जिन्होंने इनकी दया याचिका ठुकरा दी थी। फिलहाल ये दोनों सीरियल किलर बहनें पुणे की यरवदा जेल में अपनी फांसी के दिन का इंतजार कर रही हैं।

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