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महिलाओं की हत्या के बाद मिटाता था हवस, प्राइवेट पार्ट और आंखें निकालने वाले दरिंदे की खौफनाक दास्तान

आंकड़े बताते हैं कि साल 1978 से 1990 के बीच उसने 56 से ज्यादा लोगों की हत्याएं की थीं। उसके निशाने पर ज्यादातर वैसी महिलाएं होती थीं जिन्हें वो ड्रग्स के बहाने आसानी से अपनी जाल में फंसा ले।

(प्रतीकात्मक तस्वीर)

रुह कंपा देने वाली इस खौफनाक दास्तान को सुनकर आप सिहर उठेंगे। आप सोचने पर मजबूर हो जाएंगे कि क्या कोई इंसान वहशीपन में आकर ऐसी भी हरकत कर सकता है? यह दास्तान है जुर्म की दुनिया के सबसे खूंखार सीरियल किलरों में से एक आंद्रेई शिकाटिलो की। साल 1982 में रूस में सिलसिलेवार ढंग से कुछ महिलाओं की हत्या ने पुलिस के होश उड़ा दिए। इन सभी हत्याओं में एक बात समान थी और वो यह कि सभी महिलाओं की हत्या के बाद उनके शव से दरिंदगी की गई थी। उस वक्त पुलिस यह समझ गई कि यह काम किसी साधारण कातिल का नहीं बल्कि किसी खूंखार सीरियल किलर का है।

पुलिस की शक की सूई जाकर रुकी 30 साल के एक शख्स आंद्रेई शिकाटिलो पर। सेना में रह चुके आंद्रेई के दो बच्चे भी हैं। जानकारी के मुताबिक 16 अक्टूबर 1936 को आंद्रेई शिकाटिलो का जन्म एक गरीब परिवार में सोवियत रूस के यूक्रेन में हुआ था। आंद्रेई का बचपन एक कमरे की झोपड़ी में बीता था। नाखुशी और अभाव के बीच बचपन गुजारने वाले आंद्रेई ने बड़ी मुश्किल से पढ़ाई-लिखाई की थी। बचपन से ही दुबला-पतला और कमजोर हो जाने की वजह से आंद्रेई यौन हीन भावना से ग्रसित हो गया था। कहा जाता है कि इसी वजह से उसके दिमाग पर महिलाओं का कत्ल करने और अपनी हवस मिटाने के जुनून सवार हो गया।

आंकड़े बताते हैं कि साल 1978 से 1990 के बीच उसने 56 से ज्यादा लोगों की हत्याएं की थीं। उसके निशाने पर ज्यादातर वैसी महिलाएं होती थीं जिन्हें वो ड्रग्स के बहाने आसानी से अपनी जाल में फंसा ले। इस हत्यारे के बारे में कहा जाता है कि वो हत्या से पहले महिलाओं को नि:वस्त्र करता और उनके हाथ-पैर बांध देता था। महिलाओं का कत्ल करने के बाद वो उनकी आंखें और प्राइवेट पार्ट निकला लेता था। इतना ही नहीं कई बार आंद्रेई ने महिलाओं की लाश से संबंध भी बनाए थे। साल 1981 में इस हत्यारे ने सबसे पहले 17 साल की एक लड़की को अपना शिकार बनाया था।

रूस में ‘दी रेड रीपर’ के नाम से कुख्यात इस सीरियल किलर को साल 1990 में 20 नवंबर को गिरफ्तार किया गया था। आंद्रेई को पकड़ने के बाद पुलिस ने इसके खिलाफ कई सबूत जुटाए। हालांकि कई बार आंद्रेई ने पुलिस को भटकाने की कोशिश और वो बार-बार अपने गुनाहों से इनकार करता रहा। लेकिन 14 फरवरी 1994 को उसके गुनाहों का हिसाब हो गया और अदालत के आदेश पर उसके सिर में गोली मार दी गई।

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