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रिटायर्ड जज मर्डर का मास्टरमाइंड, मिली उम्रकैद

प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक उस वक्त रिटयार्ड जज ने अपने बेटे से कहा था कि 'वो खड़ा है रामाकांत, इसे जान से खत्म कर दो।' तभी सुनील मिश्रा ने धारदार हथियार से उसपर हमला किया। इस हमले में रामाकांत जख्मी हो गए और वहां से भागने की कोशिश करने लगे।

प्रतीकात्मक फोटो

एक जज ने अपने सर्विस के दौरान जो कुछ भी न्यायिक तजुर्बा हासिल किया उसी तजुर्बे के दम पर उसने बना डाला एक खतरनाक मर्डर का प्लान। सभी कानूनी दांव-पेंचों से अच्छी तरफ वाकिफ इस रिटायर्ड जज ने इतनी साफगोई से इस मर्डर को प्लांट करवाया कि उसके खिलाफ सबूत जुटाने में जांच अधिकारियों के छक्के छूट गए। लेकिन आखिरकार एक दिन उसके पापों का घड़ा फूट गया और वो अपने अंजाम तक पहुंच ही गया। इस मामले में अदालत ने रिटायर्ड जज एचडी मिश्रा के लिए उम्रकैद की सजा मुकर्रर की है। यह मामला मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले के पिपरियां का है। जमीन से जुड़ा यह विवाद करीब 15 साल पुराना है।

सालों पहले जमीन के चंद टुकड़ों के विवाद में जज एचडी मिश्रा ने अपने ही दो बेटों के जरिए 45 साल के रामाकांत रतन नाम के एक शख्स की सरे बाजार हत्या करवाई थी। इस हत्या के चश्मदीदों ने कहा था कि ‘उस दिन एचडी मिश्रा अपने बेटों के साथ मोटरसाइकिल से वहां पहुंचे थे। उनके एक बेटे विजय दत्त मिश्रा के हाथ में तमंचा था जबकि उनके दूसरे बेटे सुनील मिश्रा के हाथों में धारदार हथियार। रात के वक्त पखमाखी रोड पर मिश्रा और उसके दोनों बेटों ने रामाकांत को दबोच लिया।’

प्रत्यक्षदर्शी के मुताबिक उस वक्त रिटयार्ड जज ने अपने बेटे से कहा था कि ‘वो खड़ा है रामाकांत, इसे जान से खत्म कर दो।’ तभी सुनील मिश्रा ने धारदार हथियार से उसपर हमला किया। इस हमले में रामाकांत जख्मी हो गए और वहां से भागने की कोशिश करने लगे। लेकिन इसके बाद एचडी मिश्रा ने अपने दूसरे बेटे से कहा कि ‘इसे मार दो’ इतना कहकर उन्होंने रामाकांत का हाथ पकड़ लिया। रामाकांत को चार गोलियां मारी गई थीं।

रिटायर्ड जज एचडी मिश्रा को इस हत्याकांड का मास्टरमाइंड इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि इस हत्या की योजना उसी ने बनाई थी। इसने अपने बेटों को इस अपराध में शामिल किया। इतना ही नहीं घटना के बाद अपने तजुर्बे के दम पर मिश्रा ने कानून की आंखों में धूल झोंकने के लिए कुछ ऐसी परिस्थितियां बनाई जिससे कि यह लगे कि क्राइम के वक्त यह लोग वहां मौजूद ही नहीं थे। इसने अपने पद का गलत इस्तेमाल कर जांच को प्रभावित करने की कोशिश भी की।

हालांकि उस हत्याकांड के वक्त रिटायर्ड एशिनल डिस्ट्रीक जज एचडी मिश्रा ने हथियार का इस्तेमाल नहीं किया था और ना ही उसने रामाकांत पर हमला किया था। लेकिन सुनवाई में यह जरूर साफ हो गया था कि उसने इस हत्याकांड के लिए प्लान बनाया और इसे पूरा करने में साथ भी दिया। इस मामले में एडिशन सेशन जज अवधेश कुमार जैन ने बीते शनिवार को अपना फैसला सुनाया। इस मामले में दोषी जज के एक बेटे विजय दत्त मिश्रा की पहले ही मौत हो चुकी है जबकि दूसरे बेटे 43 वर्षीय सुनील दत्त मिश्रा को भी अदालत ने जेल की सजा सुनाई है।

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