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तीन बार फांसी की सजा भोग रही है ये लड़की, एक साथ 3 पीढ़ियों का कर दिया था कत्ल

भारतीय कानून में अपराध साबित होने पर फांसी एक ही बार दी जा सकती है, लेकिन इस मामले को कोर्ट ने रेयरेस्ट ऑफ द रेयर मानते हुए हर अपराध में हर अपराधी को तिहरी सजा सुनाई।

नेहा वर्मा। फोटो सोर्स- सोशल मीडिया

19 जून 2011 की वो मनहूस दोपहर जिसने एक ही परिवार के तीन लोगों को हमेशा के लिए सुला दिया। जिन तीन लोगों की हत्या हुई वो तीनों तीन पीढ़ी की महिलाए थीं। एक मां, एक बेटी और एक सास। हत्यारों ने एक झटके में तीनों पीढ़ी को खत्म कर दिया। इस जघन्य हत्याकांड ने पूरे इंदौर के साथ हर उस इंसान तक को झकझोर कर रख दिया जिसने भी ये खबर सुनी। सबसे खास बात ये थी कि एक ही समय में तीन पीढ़ियों की तीन औरतों को मौत की नींद सुलाने वाली हत्यारिन भी एक लड़की ही थी। बेहद खूबसूरत और महज 27 साल की इस लड़की का नाम है नेहा वर्मा। नेहा ने अपने दो साथियों संग मिलकर इस घटना को अंजाम दिया। इस केस की सबसे खास बात ये है कि हत्या के इन तीनों आरोपियों को तीन-तीन बार फांसी की सजा सुनाई गई है।

देखने में खूबसूरत नेहा वर्मा इंदौर में ही ब्यूटी पार्लर में काम करती थी। नेहा रोहित नाम के दूसरे आरोपी से प्यार करती थी और शादी करना चाहती थी। शादी के लिए काफी पैसे चाहिए थे जो कि इन दोनों के पास नहीं थे। फिर एक दिन शहर के मॉल में नेहा की मुलाकात हुई 45 वर्षीय मेघा से। बातचीत के बाद दोनों में दोस्ती हो गई। मेघा आर्थिक रूप से काफी संपन्न थीं। उनके पति निरंजन देशपांडे बैंक में अधिकारी थे। पति का तबादला शहर से बाहर था। मेघा से बातचीत में नेहा को ये भी पता चला कि उनके घर में बेटी अश्लेषा, और उनकी मां के अलावा और कोई नहीं रहता।

नेहा ने यह बात अपने प्रेमी रोहित को बताई और उसके घर डाका डालने की योजना बना बैठी। नेहा ने मेघा के घर की रेकी की। फिर वो काली घड़ी आ ही गई। रविवार 19 जून 2011 को नेहा किसी मार्केटिंग कम्पनी का फॉर्म भरवाने मेघा के घर पहुंची। मेघा के घर से ही उसने अपने प्रेमी रोहित को फोन कर बुला लिया। रोहित अपने साथ मनोज नाम के एक लड़के को भी लाया। घर में घुसते ही राहित ने मेघा के सिर में गोली मार दी। गोली की आवाज सुन मेघा की बेटी अश्लेषा (23) और सास रोहणी फड़के (70) भागते हुए बाहर आए तो रोहित और मनोज ने उन पर चाकूओं से ताबड़तोड़ वार कर उनकी भी जान लेली। चंद मिनटों में जमीन पर देशपांडे परिवार की दम तोड़ चुकी तीन पीढ़ी जमीन पर लहुलूहान पड़ी थी। घटना को अंजाम देने के बाद उन तीनों को घर में जो भी कीमती सामान मिला, उसे लेकर फरार हो गए।

भारतीय कानून में अपराध साबित होने पर फांसी एक ही बार दी जा सकती है, लेकिन इस मामले को कोर्ट ने रेयरेस्ट ऑफ द रेयर मानते हुए हर अपराध में हर अपराधी को तिहरी सजा सुनाई। आरोपियों को मेघा देशपांडे की हत्या के आरोप में फांसी, अश्लेषा की हत्या के आरोप में फांसी और रोहिणी की हत्या के आरोप में फांसी की सजा (यानी हर आरोपी को फांसी की तीन सजा) व एक-एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।

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