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नींद की गोली देकर अनाथ लड़कियों का रेप करता था 79 वर्षीय बुजुर्ग, बेटी भी देती थी साथ, हुई उम्रकैद की सजा

इस मामले में चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर की रिपोर्ट के बाद महिला और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया।

प्रतीकात्मक तस्वीर

मध्यप्रदेश में अनाथ बच्चियों के साथ दुष्कर्म किये जाने का मामला उजागर हुआ है। इस मामले में राज्य के शिवपुरी जिले स्थिति एक विशेष अदालत ने एक 79 साल के बुजुर्ग प्रोफेसर को अनाथ आश्रम की बच्चियों के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में उम्रकैद की सजा सुनाई है। इस मामले में अदालत ने प्रोफेसर की बेटी को भी आजीवन कैद की सजा सुनाई है। 79 साल के केएन एग्रवाल सरकारी कॉलेज के रिटायर्ड प्रोफेसर हैं जो इस मामले में मुख्य आरोपी हैं जबकि उनकी 50 साल की बेटी शैला अग्रवाल को भी इस मामले में सजा सुनाई गई है। बतलाया जा रहा है कि 50 साल की शैला इस अनाथ आश्रम की संचालक है।

जानकारी के मुताबिक इस मामले में चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी को शिकायत मिली थी कि अनाथालय में बच्चियों का शारीरिक शोषण किया जा रहा है। मामले में 16 नवंबर 2016 को पुलिस ने अनाथालय की संचालिका और उनके पिता के खिलाफ बच्चियों के शारीरिक शोषण करने का मामला दर्ज कर जांच शुरू की। जांच में यह बात भी सामने आई कि बच्चियों को अनाथालय में दुष्कर्म से पहले नींद की दवाइयां भी दी जाती थीं। इतना ही नहीं बच्चियां जब अपने साथ हुई अत्याचार की शिकायत अनाथालय की संचालिका से करती थीं तो उन्हें मारा-पीटा भी जाता था।

इस मामले में चाइल्ड प्रोटेक्शन ऑफिसर (बाल सुरक्षा अधिकारी) की रिपोर्ट के बाद महिला और उसके पिता को गिरफ्तार कर लिया गया। दोनों पर आईपीसी की विभिन्न धाराओं के अलावा पॉक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया। इस अनाथालय को सीज भी कर दिया गया। बताया जा रहा है कि इस अनाथ आश्रम में 23 लड़कियां रहती थीं। 11 से 16 साल के बीच की छह लड़कियों के साथ बलात्कार किया गया था। इस मामले में अदालत ने दोषियों पर जुर्माना भी लगाया है।

आपको बता दें कि मध्य प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ अत्याचार के मामले पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़े हैं। गृहमंत्री भूपेंद्र सिंह ने इसी साल मार्च के महीने में विधानसभा में एक सवाल के जवाब में बतलाया था कि प्रदेश में एक साल में सामूहिक दुष्कर्म के मामले 37 फीसदी बढ़ गए हैं। 2016 से 2017 की तुलना में महिलाओं के अपहरण में सवा 24, दुष्कर्म में 9.49 और छेड़छाड़ के मामलों में सवा 12 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। सजा का प्रतिशत किसी भी मामले में 29 फीसदी से ज्यादा नहीं रहा।

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