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राजस्थान: अनारक्षित सीटों को ST वर्ग से भरने की मांग पर अड़े छात्रों का पुलिस पर हमला और वाहन फूंके, ASP ने 15 किमी तक ट्रक के पीछे लटक कर बचाई जान

एएसपी ने बताया था कि 'मुझे बचाने के लिए पुलिसकर्मियों ने घेरा बनाया। मेरा गनमैन मेरी ढाल बनकर बचाव करता रहा। मैं एक ट्रक के पीछे लटक गया और करीब 15 किमी तक इसी हाल में एक होटल तक पहुंचा।

RAJASTHAN, STUDENTप्रदर्शन के दौरान एनएच पर छात्रों ने कब्जा कर लिया। फोटो सोर्स – सोशल मीडिया

राजस्थान में शिक्षक भर्ती के अनारक्षित 1167 पदों को एसटी वर्ग से भरने की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन जारी है। शुक्रवार को भी डुंगरपुर में प्रदर्शनकारियों ने उदयपुर-अहमदाबाद नेशनल हाईवे को जाम कर दिया। यहां प्रदर्शनकारियों ने एनएच-8 के पास करीब 5 किलोमीटर तक कब्जा कर लिया। इतना ही नहीं उन्होंने हाईवे पर कुछ होटलों और पेट्रोल पंप में तोड़फोड़ की, वहां लगे सीसीटीवी कैमरे तोड़ दिए। पेट्रोल पंप पर खड़े टैंकरों में आग भी लगा दी।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रदर्शनकारियों ने एक ट्रक को अपने कब्जे में ले लिया औऱ पास के पुलिस चौकी पर हमला बोल दिया। छात्रों के उग्र प्रदर्शन के देखते हुए यहां से पुलिसकर्मियों को उस वक्त भागना भी पड़ा। बताया जा रहा है कि छात्रों के हंगामे को देखते हुए एक प्रतिनिधि मंडल इनसे बातचीत करने भी गया था लेकिन छात्र किसी भी कीमत पर पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। प्रदेश के डूंगरपुर जिले के भुवाली के पास एनएच 8 पर उपद्रवी पथराव कर रहे हैं। उपद्रवियों ने एनएच 8 पर खड़े पुलिस के वाहनों को भी आग लगा दी। पुलिस के करीब आधे दर्जन से ज्यादा वाहनों को फूंक डाला है।

बताया जा रहा है कि हिंसक प्रदर्शन के दौरान कई पुलिसकर्मी घायल हुए हैं। प्रदर्शनकारियों को शांत करने के लिए पुलिस ने यहां आंसू गैस के गोले भी छोड़े हैं। आपको बता दें कि उपद्रवियों की शिक्षक भर्ती के अनारक्षित 1167 पदों को एसटी वर्ग से भरने की मांग है। जिसको लेकर कांकरी डूंगरी पहाड़ी पर कई दिन से प्रदर्शन चल रहा है।

इस मामले पर सांसद किरोड़ी लाल मीणा ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर टीएसपी क्षेत्र के आदिवासियों के लिए नियुक्ति की मांग की है। वहीं इस मामले पर राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत ने कहा कि ‘डुंगरपुर में प्रदर्शन के दौरान हिंसा दुर्भाग्यपूर्ण है। प्रदर्शन करने का संवैधानिक अधिकार है और इसका इस्तेमाल होना चाहिए,,,शांति पूर्वक प्रदर्शन करना चाहिए। किसी को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जा सकती है। मैं प्रदर्शनकारियों से अपील करता हूं कि वो कानून और शांति व्यवस्था बनाए रखने में सहयोग करें।’

इससे पहले गुरुवार को अभ्यर्थियों का प्रदर्शन उग्र हो गया था। गुरुवार को छात्र पहाड़ी पर ऊंचे स्थान पर चले गए और उन्होंने वहां से पुलिस टीम पर पत्थऱ बरसाए। इस पत्थर बाजी में 11 पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। पथराव में गंभीर रूप से घायल हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक गणपत महावर को एक ट्रक के पीछे लटक कर जैसे-तैसे वहां से निकलना पड़ा था।

महावर ने बाद में मीडिया को बताया कि जैसे ही पुलिस मौके पर पहुंची हाईवे पर अचानक चारों ओर से पथराव शुरू हो गया। इस दौरान लोगों की भीड़ बहुत ज्यादा थी और पुलिस बल कम। देखते ही देखते पथराव से पुलिस वाले जख्मी होने लगे। पत्थर मुझे भी लगने शुरू हुए। थोड़ी ही देर में मेरे सिर और पैर भी पत्थरों से जख्मी हो गए। मैं उठ भी नहीं पा रहा था।

एएसपी ने बताया था कि ‘मुझे बचाने के लिए पुलिसकर्मियों ने घेरा बनाया। मेरा गनमैन मेरी ढाल बनकर बचाव करता रहा। मैं एक ट्रक के पीछे लटक गया और करीब 15 किमी तक इसी हाल में एक होटल तक पहुंचा। चालक को काफी देर तक पता ही नहीं था कि मैं ट्रक के पीछे लटका हूं। जब उसे पता चला तो मैंने थाने तक पहुंचा देने की गुहार की। वह मुझे एक होटल पर ले गया। होटल मालिक ने मुझे अस्पताल पहुंचाया।’

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