पटवारी से ग्राम सेवक और फिर शिक्षक, संघर्ष से भरी है IPS प्रेमसुख की कहानी

प्रेमसुख डेलू ने पटवारी पद पर रहते हुए कई अन्य प्रतियो​गी परीक्षाएं दी। ग्राम सेवक परीक्षा में राजस्थान में दूसरी रैंक हासिल की, मगर ग्राम सेवक ज्वाइन नहीं किया।

crime, crime newsIPS प्रेमसुख डेलू। फोटो सोर्स- फेसबुक, @Premsukh delu IPS fans

कड़ी संघर्ष के बाद सफलता हासिल कर अफसर बनने वाले कई शानदार व्यक्तित्व की चर्चा हम कर चुके हैं। इस कड़ी में आज एक ऐसी शख्सियत के बारे में हम आपको बताने जा रहे हैं जिन्होंने 6 साल में 12 परीक्षाएं पास की और आखिरकार बने आईपीएस अफसर।

राजस्थान के बीकानेर जिले की नोखा तहसील के गांव रासीसर में 3 अप्रैल 1988 को एक लड़के का जन्म हुआ। मां-बाप ने बेटे का नाम प्रेमसुख डेलू रखा। सभी जानते हैं आज सरकारी नौकरी हासिल करने कि लिए प्रतिस्पर्धा काफी कड़ी है। इस होनहार लड़के ने 12 सरकारी नौकरियों की परीक्षाएं पास की हैं।

प्रेमसुख डेलू पढ़ाई-लिखाई में बचपन से ही तेज-तर्रार थे। प्रेमसुख डेलू के बारे में बताया जाता है कि उनकी सरकारी नौकरी लगने का सिलसिला साल 2010 में शुरू हुआ था। सबसे पहले वो बीकानेर जिले में पटवारी बने। प्रेमसुख डेलू जिंदगी में कुछ बड़ा करना चाहते थे लिहाजा उन्होंने नौकरी के साथ-साथ अपनी मेहनत भी जारी रखी।

प्रेमसुख डेलू ने पटवारी पद पर रहते हुए कई अन्य प्रतियो​गी परीक्षाएं दी। ग्राम सेवक परीक्षा में राजस्थान में दूसरी रैंक हासिल की, मगर ग्राम सेवक ज्वाइन नहीं किया। क्योंकि उसी दौरान राजस्थान असिस्टेंट जेल परीक्षा का परिणाम आ गया और इसमें प्रेमसुख डेलू ने पूरे राजस्थान में टॉप किया। असिस्टेंट जेलर के रूप में ज्वाइन करते उससे पहले राजस्थान पुलिस में सब इंस्पेक्टर पद पर चयन हो गया।

प्रेमसुख डेलू ने राजस्थान पुलिस में एसआई के पद पर ज्वायन नहीं किया, क्योंकि उसी दौरान इनका स्कूल व्याख्याता के रूप में चयन हो गया तो पुलिस महकमे की बजाय शिक्षा विभाग की नौकरी को चुना। इसके बाद कॉलेज व्याख्याता, तहसीलदार के रूप में भी सरकारी नौकरी लगी।

विभिन्न सरकारी विभागों में नौकरी लगने के बावजूद प्रेमसुख डेलू ने सिविल सेवा की परीक्षा भी दी। साल 2015 में उन्हें 170वां रैंक हासिल हुआ। खास बात यह भी है कि वो हिंदी माध्यम के छात्र रहे और इसी माध्यम से उन्होंने यह परीक्षा भी पास की थी।

बताया जाता है कि प्रेमसुख की शुरुआती पढ़ाई-लिखाई गांव के ही एक सरकारी स्कूल से हुई थी। जब वो छठी क्लास में आए तब पहली बार उन्होंने A, B, C, D पढ़ी और उन्हें अंग्रेजी भाषा का ज्ञान हुआ था।

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