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राजन तिवारी: लालू राज में मंत्री की हत्या में जेल की हवा खाई, ‘बीजेपी’ से टिकट पाकर बाहुबली पूर्व विधायक दामन को पवित्र करने की रखते हैं ख्वाहिश

जब यूपी पुलिस की एक टीम ने श्रीप्रकाश शुक्ला को ढेर कर दिया तब राजन तिवारी को अपनी जान का खौफ सताने लगा और फिर बस यहीं से शुरू हुई बिहार में इस डॉन की एंट्री और फिर सियासत में उसकी धमक की नई कहानी।

bjp, rajan tiwari, rjdबाहुबली कहे जाने वाले राजन तिवारी को आशुतोष टण्डन ने बीजेपी ज्वायन कराया था। इसपर काफी विवाद भी हुआ था। फाइल फोटो। फोटो सोर्स – सोशल मीडिया

बिहार की राजनीति में अपराध का कॉकटेल किसी से छिपा नहीं है। चुनाव सिर पर है और एक बार फिर इस कई बाहुबली अब टिकट पाने की जुगाड़ में लग गए हैं। आज हम बात करेंगे उस नाम की जिसका सिक्का कभी, ना सिर्फ बिहार बल्कि उत्तर प्रदेश की अपराध की गलियों में भी चला करता था। लालू प्रसाद यादव के राज में उनके कैबिनेट मंत्री बृजबिहारी प्रसाद की हत्या में राजन तिवारी का नाम आने के बाद राजन 15 साल चार महीने तक जेल की हवा खाते रहे। हालांकि रिहा होने के बाद डॉन के उपनाम से जाने जाने वाले राजन तिवारी अब भारतीय जनता पार्टी से टिकट हासिल कर अपने दामन पर लगे दाग को धोकर पवित्र हो जाना चाहते हैं।

राजन तिवारी किस तरह बिहार में खौफ का पर्याय बन चुके थे यह समझने के लिए हमे उत्तर प्रदेश की तरफ रुख करना होगा। यूपी के गोरखपुर में जन्में राजन तिवारी स्कूल में औसत छात्र थे और इंजीनियरिंग कॉलेज में आते-आते राज्य में उस वक्त के नंबर वन गुंडे के गैंग में शामिल हो गए।

जवानी के दिनों में श्री प्रकाश शुक्ला के गैंग में आते ही राजन तिवारी पर आरोप लगे कि उन्होंने यूपी सरकार के विधायक वीरेंद्र प्रताप शाही की कार पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर विधायक को ना सिर्फ घायल कर दिया बल्कि गनर की जान भी ले ली। यह घटना 1996 की है। इस मामले में राजन तिवारी नामजद आऱोपी बनाए गए हालांकि साल 2014 में सबूतों के अभाव में वो बरी हो गए।

जब यूपी पुलिस की एक टीम ने श्रीप्रकाश शुक्ला को ढेर कर दिया तब राजन तिवारी को अपनी जान का खौफ सताने लगा और फिर बस यहीं से शुरू हुई बिहार में इस डॉन की एंट्री और फिर सियासत में उसकी धमक की नई कहानी। पुलिस के डर से राजन तिवारी भाग कर बिहार चले आए।

कहा जाता है कि बिहार में भी राजन तिवारी ने अपना एक कुख्यात गैंग बना लिया। इस गैंग में बड़े-बड़े नाम थे। 90 के दशक में बिहार सरकार के मंत्री बृजबिहारी प्रसाद की हत्या में राजन तिवारी का नाम उछला और अदालत ने उन्हें आजीवन कारावस की सजा सुनाई। हालांकि बाद में वो कोर्ट से बरी हो गए।

बताया जाता है कि इस हत्याकांड में राजन तिवारी को जेल जाने का डर सताने लगा था। लिहाजा जेल जाने से पहले ही उन्होंने खादी पहन लिया था। सजा होने से पहले राजन तिवारी की दिलचस्पी राजनीति में होने लगी थी और बिहार के पूर्वी चंपारण के गोविंदगंज विधानसभा क्षेत्र से दो बार विधायक भी बने।

जेल से बाहर आए तो आरजेडी में शामिल हुए। साल 2017 में यूपी में वापसी करने का मन हुआ तो बसपा के साथ हो लिए और फिर बीजेपी में शरण मिली। बताया जाता है कि वर्तमान में इनपर हत्या, लूट और अपहरण के 10 से ज्यादा मामले दर्ज हैं।

राजन तिवारी बिहार के गोविंदगंज क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं। लंबे समय तक जेल में रहने के चलते उनके रसूख में थोड़ी कमी जरूर आई है, लेकिन वह उसे दोबारा पाने की कोशिश में हैं। जेल से बाहर आने के बाद राजन तिवारी ने 2019 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले लखनऊ में बीजेपी की सदस्यता ली थी।

इसपर काफी विवाद हुआ था जिसके बाद उन्हें साइडलाइन कर दिया गया। इन दिनों दोबारा से बिहार विधानसभा चुनाव में सक्रिय होने की कोशिश कर रहे हैं और सीट से बीजेपी का टिकट पाकर ‘पवित्र’ होना चाहते थे।

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