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Maharashtra: फर्जी कॉल सेंटर बनाकर अमेरिकी लोगों को लूट रहे थे, पुणे पुलिस ने छापा मारा तो हुआ खुलासा

पुलिस ने बताया कि फेक कॉल सेंटर चलाने वालों ने धाराप्रवाह अग्रेजी बोलने वाले कुछ युवाओं को नौकरी पर रखा था। जो अमेरिकी नागरिकों को फोन कर सामाजिक सुरक्षा प्रशासन के अधिकारी होने का दावा करते हुए, उन्हे "असामान्य गतिविधियों" में भाग लेने को लेकर कार्रवाई करने की धमकी देकर जाल में फंसा लेते थे।

प्रतीकात्मक फोटो (सोर्स: इंडियन एक्सप्रेस)

महाराष्ट्र के पुणे सिटी पुलिस की साइबर क्राइम सेल टीम ने एक फर्जी कॉल सेटर का भंडाफोड़ किया है। इस कॉल सेटर में कथित तौर पर अमेरिका के लोगों को प्रशासनिक सुरक्षा अधिकारी बताकर धोखा दिया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान अकिब अल्ताफ शेख (27) और सरीम अमन शेख (29) के रूप में हुई है। बता दें कि इसकी सूचना मिलने पर वरिष्ठ पुलिस निरीक्षक जयराम पाइगुडे के नेतृत्व में साइबर पुलिस की टीम ने पुणे कैंप की एक इमारत से संचालित कॉल सेंटर पर छापा मारा और दो लोगों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार दोनों लोगों पर भारतीय दंड संहिता की धारा 419, 420, 34 के तहत धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।

अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अधिकारी बनकर करते धोखेबाजी: पुलिस ने बताया कि फेक कॉल सेंटर चलाने वालों ने धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलने वाले कुछ लड़कों को नौकरी पर रखा था। ये अमेरिकी नागरिकों को फोन कर सामाजिक सुरक्षा प्रशासन के अधिकारी होने का दावा करते हुए उन्हे “असामान्य गतिविधियों” में भाग लेने को लेकर कार्रवाई करने की धमकी देते थे। फिर अमेरिकी नागरिक को यह कहते हुए कॉल ट्रांसफर कर देते थे कि उनसे अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के अधिकारी बात करना चाहते है। अमेरिकी ट्रेजरी का अधिकारी बनकर बात करने वाला शख्स अमेरिकी नागरिकों को मामला सुलझाने के लिए विभिन्न दुकानों से उपहार कार्ड खरीदने के लिए कहता था।

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भारतीय मुद्रा में परिवर्तित कर लेते थे: अमेरिकी नागरिकों द्वारा इन गिफ्ट कार्डों को खरीदने के बाद धोखेबाजों ने उनसे इन गिफ्ट कार्डों का विवरण ले लेते थे। अपने सहयोगियों की मदद से ऑनलाइन लेनदेन के माध्यम से भारतीय मुद्रा में परिवर्तित कर लेते थे। इन लोगों ने कितने अमेरिकी नागरिकों को अपना शिकार बनाया है पुलिस इसका पता लगाने के लिए इसकी जांच कर रही है। पुलिस उपायुक्त (साइबर) संभाजी कदम ने कहा कि साथ ही यह भी पता लगाने की कोशिश है कि इस अपराध में और कितने लोग शामिल है।

पुणे पुलिस ने पहले भी ऐसा किया है:  बता दें कि इसी तरह का एक मामला फरवरी 2018 में पुणे सिटी पुलिस की साइबर क्राइम सेल ने आंतरिक राजस्व सेवा (आईआरएस) के अधिकारियों के बहाने 11,000 अमेरिकी नागरिकों को धोखा देने के लिए कोरेगांव पार्क क्षेत्र में एक ‘नाइट कॉल सेंटर’ का भंडाफोड़ किया था।

आईआरएस अधिकारी बनकर करते थे बात: जांच में पता चला था कि जालसाजों ने अमेरिकी नागरिकों के नाम, पते, ईमेल और संपर्क नंबर सहित व्यक्तिगत विवरणों को खरीदकर उन पर टैक्स डिफॉल्ट होने का आरोप लगाते हुए उन्हें थोक ऑडियो संदेश भेजते थे। जब इन अमेरिकी नागरिकों में से कुछ ने इनसे वापस संपर्क किया तो धोखेबाजों ने आईआरएस अधिकारियों का नाटक कर उन्हें कर का भुगतान करने या कारावास और संपत्ति की कुर्की जैसी सजा का सामना करने के लिए कहते थे और इसके बदले में उनसे पैसे वसूलते थे।

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