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महिला को जिंदा जलाने के मामले में मुकदमा दर्ज नहीं किया पुलिस ने

पुलिस सूत्रों के अनुसार इटगांव के लोगों ने 11 जुलाई को पुलिस को उपलों में एक महिला को जिंदा जलाने की सूचना दी थी। मौके पर पहुंचे सीओ सिटी वैभव कृष्ण पांडेय और फ्रेंड्स कॉलोनी थानाध्यक्ष अतुल कुमार लखेरा की सूचना पर फायर ब्रिगेड कर्मियों ने आग पर काबू किया था।

Author इटावा | Published on: July 18, 2019 12:35 AM
यूपी पुलिस (फोटो सोर्स – इंडियन एक्सप्रेस)

जिले के फ्रेंड्स कॉलोनी थाना क्षेत्र में 11 जुलाई को एक महिला को कंडे के ढेर में डालकर जिंदा जला दिए जाने के मामले में पुलिस हत्यारोपी के पक्ष में खड़ी हुई नजर आ रही है, क्योंकि अभी तक इस हत्याकांड का मुकदमा यह तर्क देकर दर्ज नहीं किया गया है कि हत्या की शिकार हुई महिला के परिजन नहीं आ सके हैं, जबकि पुलिस ने पोस्टमार्टम कराकर दूर के रिश्तेदारों से शव का अंतिम संस्कार करा दिया। पुलिस सूत्रों के अनुसार इटगांव के लोगों ने 11 जुलाई को पुलिस को उपलों में एक महिला को जिंदा जलाने की सूचना दी थी। मौके पर पहुंचे सीओ सिटी वैभव कृष्ण पांडेय और फ्रेंड्स कॉलोनी थानाध्यक्ष अतुल कुमार लखेरा की सूचना पर फायर ब्रिगेड कर्मियों ने आग पर काबू किया था। इसके बाद जला हुआ शव निकालकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया था। शव का पोस्टमार्टम बबीता पत्नी रजनेश उर्फ सोनू निवासी इटगांव के नाम से कराया गया।

सोनू का पूरा परिवार शव मिलने के बाद से लापता है। ग्रामीणों ने पुलिस को बताया था कि बबीता बिहार के गांव भीकम की रहने वाली थी। करीब आठ साल पहले सोनू वहां जाकर मंदिर में शादी करके लाया था। बबीता से सोनू को तीन बच्चे भी हुए। कुछ दिनों से उसके चरित्र पर शक कर सोनू उससे मारपीट करता था। 11 जुलाई की सुबह और दोपहर में बबीता से मारपीट की गई। दोपहर करीब तीन बजे लोगों ने बीठे में शव जलता देखा था। इस हत्याकांड में पुलिस ने अभी तक मुकदमा दर्ज नहीं किया है।

जलाई गई महिला के शव का पुलिस डीएनए टेस्ट कराने की तैयारी में है। सीओ सिटी वैभव कृष्ण पांडेय ने बताया कि बच्चों या उसके मायके पक्ष के लोगों से शव के अवशेष का डीएनए टेस्ट कराया जाएगा। इससे मुकदमे में ये भ्रम न रहे कि शव बबीता का है या किसी और का। कई साल पहले बैदपुरा थाना क्षेत्र में एक महिला संदिग्ध हालात में फांसी पर लटकी मिली थी। पोस्टमार्टम में गला घोंटकर हत्या की पुष्टि हुई थी। इस मामले में थाने के तत्कालीन दरोगा होरीलाल वादी बने थे। दूसरे पक्ष के वकील के तर्क पर हाई कोर्ट ने दहेज हत्या की धारा लगाने पर तत्कालीन एसपी को तलब कर लिया था।

पुलिस की जांच और साक्ष्यों के आधार पर सिविल कोर्ट ने पिछले महीने ही हत्यारों को सुनाई थी। पूर्व शासकीय अधिवक्ता रवींद्र यादव का कहना है कि महिला को जिंदा जलाना जघन्यतम अपराध है। ऐसे मामलों में गांव का चौकीदार या पुलिस खुद वादी बन कर अज्ञात में मुकदमा दर्ज कराए, जब परिजन आ जाएं तो उसकी तहरीर के आधार पर उसी मुकदमे में नामजद आरोपियों के नाम जोड़े जा सकते हैं। पुलिस की ऐसी ही लापरवाही के कारण समाज में अपराध बढ़ते हैं। पुलिस उपाधीक्षक का कहना है कि मृतका के मायके वालों का इंतजार किया जा रहा है, पुलिस उनसे संपर्क में है। मायके वालों की तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर जांच की जाएगी।

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