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STF ने किया सबसे खूंखार शिकारी का शिकार, बाघों को मारने और भालू का प्राइवेट पार्ट खाने वाला बदमाश धराया

इस शिकारी ने एसटीएफ को बताया कि वो जब 15 साल का था तभी से वो जंगली जानवरों का शिकार कर रहा है। उसने कई बाघों, भालुओं, मोर और जंगली सुअरों को मारने की बात कबूली है।

crime, crime news, tigerप्रतीकात्मक तस्वीर। Photo Source – Indian Express

आखिरकार STF ने इस सबसे खूंखार शिकारी का शिकार कर लिया। करीब 6 साल तक यह शिकारी पुलिस की आंखों में भी धूल झोंकता रहा। इसे बाघों का सबसे बड़ा हत्यारा कहा जाता है। मध्य प्रदेश STF (Special Task Force) ने इसे बीते हफ्ते ही पकड़ा है। जसरत उर्फ यरलेन उर्फ लुजालेन को साल 2014 में अदालत से बेल मिल गई थी और उसके बाद से वो लापता था। एसटीएफ ने जसरत को गुजरात-वोडदरा हाईवे के पास से पकड़ा है।

पुलिस ने इस शिकारी के पास से कई सारे आधार कार्ड और फर्जी वोटर आईकार्ड जब्त किये हैं। इस शिकारी ने बताया कि कैसे वो इतने सालों तक कानून से बचता रहा। जसरत ने बताया कि इतने दिनों तक वो छोटे-छोटे कई गांवों में रहा। इस दौरान वो गांव के सरपंच को जंगली सुअरों का तोहफा दिया करता था। वो उनके लिए जंगल में जाकर सुअरों का शिकार करता और फिर रिश्वत के तौर पर वो सरपंच को अपना शिकार सौंप देता था।

फॉरेस्ट रेंजर्स यारलेन और उसके करतूतों के बारे में अच्छी तरह से जानते थे। यहां तक कि वो मध्य प्रदेश एसटीएफ के टारगेट पर उस वक्त आया जब पहली बार वन विभाग के अधिकारियों ने उसके बारे में जानकारी दी थी।

यह शिकारी एसटीएफ के रडार पर उस वक्त आया जब रेंजर्स को ऐसे कई सारे मरे हुए भालू मिले जिनके प्राइवेट पार्ट गायब थे। यह भी कहा जाता है कि यह शिकारी भालुओं का शिकार करने के बाद उनका प्राइवेट पार्ट खा जाता था।

इस शिकारी ने एसटीएफ को बताया कि वो जब 15 साल का था तभी से वो जंगली जानवरों का शिकार कर रहा है। उसने कई बाघों, भालुओं, मोर और जंगली सुअरों को मारने की बात कबूली है। यारलेन, जानवरों के अंगों की होने वाली अंतरराष्ट्रीय खरीद-फरोख्त के काले बाजार का बड़ा सप्लायर भी था।

इस खूंखार शिकारी को पकड़ने के बाद अब जांचकर्ता दिल्ली और इसके आसपास के सीमा पर जानवरों के अंगों की तस्करी से जुड़े लोगों का पता लगाने में जुटे हैं। जानकारी के मुताबिक इस शिकारी ने एक व्यापारी के लिए कई जंगली जानवरों को भी मारा है।

यारलेन को गिरप्तार करने के साथ ही एसटीएफ ने T13 नाम की बाघिन को मारे जाने के रहस्य का खुलासा भी कर दिया है। इस मादा बाघ को अंतिम बार साल 2012 में रायकासा के जंगलों में लगे ट्रैप कैमरे में देखा गया था। एक साल बाद नेपाल से इस बाघिन का चमड़ा मिला था।

यारलेन ने बताया कि उसने इस मादा बाघा को पेंज रिजर्व में मारा था। इस मामले में नेपाल के एक शिकारी लोडू डिमे को काठमांडू एयरपोर्ट से गिरफ्तार किया गया था। उस वक्त उसपर इस बाघिन को मारने का आरोप लगा था। अब एसटीएफ इस मामले में नेपाल प्रशासन से भी बातचीत कर रही है। (और…CRIME NEWS)

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