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हरिद्वार: अस्‍पताल ने जिंदा मरीज को भेज दिया मुर्दाघर, पोस्टमॉर्टेम से पता चला कि 8 घंटे चली थी सांस

लापरवाही के चलते अस्पतालों में कुछ भी संभव है, यहां तक कि जिंदा आदमी को मरा बताकर मुर्दाघर भी भेजा जा सकता है, कुछ ऐसा ही चौंकाने वाला मामला सामने आया है हरिद्वार के भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स अस्पताल में।

Author नई दिल्ली | January 20, 2018 2:03 PM
प्रतीकात्मक फाइल फोटो

अस्पतालों में लापरवाही के चलते कुछ भी हो सकता है, यहां तक कि डॉक्टर जिंदा आदमी को मरा घोषित कर मुर्दाघर भी भेज सकते हैं। कुछ यही हुआ हरिद्वार के बीएचईएल (भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स) के अस्पताल में। यहां इलाज के लिए भर्ती कराए गए एक कर्मी को मृत घोषित कर शव मुर्दाघर भेज दिया गया। जहां रातभर में मरीज ने दम तोड़ दिया।  घटना 12 जनवरी की बताई जाती है। बीएचईएल के ब्लॉक वन में कृष्ण कुमार ( 42 साल) काम करते समय दफ्तर में गिर गए थे जिसके बाद उन्हें घटना की रात हास्पिटल में भर्ती कराया गया था।

पोस्टमार्टम रिपोर्ट से हुआ खुलासाः भर्ती हुए कर्मचारी को डॉक्टरों ने 12 जनवरी को रात साढ़े 11 बजे मृत घोषित किया। अगले दिन जब दोपहर पोस्टमार्टम हुआ तो चौंकाने वाली बात सामने आई। पता चला कि कर्मचारी की मौत तो सुबह आठ बजे हुई, जबकि चिकित्सकों ने आठ घंटे पहले ही उसे मृत घोषित कर शव मुर्दाघर भेज दिया था। परिजनों ने आरोप लगाया कि जब मुर्दाघर से शव निकाला गया तो मृतक की पेंट गीली थी और उल्टी हुई थी। इससे पता चलता है कि मुर्दाघर में भी सांस चल रही थी।  परिवार वालों ने हंगामा खड़ा करते हुए कार्रवाई की मांग की, जिसके बाद मुख्य चिकित्साधिकारी अशोक गैरोला ने इस प्रकरण पर जांच बैठाने का फैसला किया।

इस मामले को बेहद गंभीर बताते हुए सीएमओ अशोक ने पत्रकारो से कहा – ‘‘  यह बहुत गंभीर मामला है। दो चिकित्सकों की टीम पोस्टमार्टम रिपोर्ट का परीक्षण कर एक सप्ताह में रिपोर्ट देगी। पैनल की रिपोर्ट के बाद सख्त कार्रवाई होगी। ” अस्पतालों में लापरवाही का यह कोई पहला मामला नहीं है। पिछले साल दिसंबर में दिल्ली के मैक्स हास्पिटल में कुछ ऐसी ही घटना हुई थी, जो राष्ट्रीय सुर्खियों में रहा। चिकित्सकों ने नवजात जुड़वा बच्चों को मृत बताकर पॉलीथीन बैग में परिवार के हवाले कर दिया  था, जबकि एक बच्चा जीवित था। जिसके बाद दिल्ली सरकार ने मैक्स हास्पिटल के खिलाफ कार्रवाई की थी।

डॉक्टरों के निलंबन की मांगः कथित चिकित्सकीय लापरवाही से हुई इस मौत पर कर्मचारी यूनियन आक्रोशित है। कर्मचारी नेता नरेंद्र चौहान ने अस्पताल प्रशासन से दोषी डॉक्टरों को निलंबित कर जेल भेजने की मांग की। उधर अस्पताल प्रभारी डॉ. एसजे सिंह का कहना है कि शव से कभी उल्टी या मूत्र नहीं निकल सकता, डॉक्टरों के लापरवाही की शिकायत पर जांच कराई जा रही है। मृतक कर्मचारी के परिवारवालों अपने आरोप पर कायम हैं कि मौत डॉक्टरों की लापरवाही के कारण ही  हुई। आरोप है कि कई बार कहने के बाद भी चिकित्सकों ने उन्हें शॉक ट्रीटमेंट नहीं दिया।

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