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भाजपा कार्यकर्ताओं का चालान काट जेल भेजा तो तुरंत हुआ ट्रांसफर, ‘लेडी सिंघम’ के नाम से मशहूर हैं अफसर श्रेष्ठा ठाकुर

अपने ट्रांसफर के बाद इस महिला अधिकारी ने अपने फेसबुक अकाउंट पर बड़ी ही निडरता के साथ लिखा था कि ' जहां भी जाएगा, रौशनी लुटाएगा...किसी चराग का अपना मकां नहीं होता।

CRIME, CRIME NEWSमहिला अफसर श्रेष्ठा ठाकुर। फोटो सोर्स – फेसबुक, @Shrestha Thakur (Dsp)

निडरता और ईमानदारी ने इस महिला पुलिस अधिकारी को नाम दिया ‘लेडी सिंघम।’ उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले की रहने वाली श्रेष्ठा ठाकुर जब बुलंदशहर जिले में सर्किल ऑफिसर के पद पर तैनात थीं तब उन्होंने राज्य की सत्तारुढ़ पार्टी बीजेपी के स्थानीय कार्यकर्ताओं से पंगा लिया था। दरअसल यहां यातायात नियमों का उल्लंघन करने पर श्रेष्ठा ने भाजपा कार्यकर्ताओं का चालान काट दिया। इसके बाद कुछ बीजेपी कार्यकर्ता सर्किल ऑफिसर श्रेष्ठा ठाकुर से उलझ पड़े। श्रेष्ठा ठाकुर ने 5 बीजेपी कार्यकर्ताओं को हवालात तक पहुंचा दिया। उस दौरान एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर काफी वायरल हुआ था।

इस वीडियो में कुछ बीजेपी कार्यकर्ता उनसे बहस करते नजर आ रहे थे। इस बहस के दौरान इस महिला अधिकारी ने भाजपा कार्यकर्ताओं को डांटते हुए पूछा था कि क्या उनके पास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा लिखित आदेश है कि पुलिस के पास गाड़ी जांच करने का अधिकार नहीं है। वो भाजपा कार्यकर्ताओं पर ‘गुंडाराज’ फैलाने और पार्टी का नाम खराब करने का आरोप भी लगाती नजर आई थीं। इसी दौरान एक सरकारी कर्मचारी के काम में बाधा डालने के आरोप में श्रेष्ठा ठाकुर ने उस वक्त 5 भाजपा कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार भी कर लिया था। हालांकि महिला अधिकारी द्वारा यह कार्रवाई किये जाने के बाद उसी दिन उनका ट्रांसफर बहराइच जिले में भी हो गया।

अपने ट्रांसफर के बाद इस महिला अधिकारी ने अपने फेसबुक अकाउंट पर बड़ी ही निडरता के साथ लिखा था कि ‘ जहां भी जाएगा, रौशनी लुटाएगा…किसी चराग का अपना मकां नहीं होता।’ बहराइच ट्रांसफर हआ है, यह नेपाल का बॉर्डर है। चिंता मत करिये मेरे दोस्तों..मैं खुश हूं.. यह मेरे अच्छे काम का इनाम है और मुझे मंजूर है। आप सभी बहराइज पधारें।’ एक बिजनेस परिवार से ताल्लुक रखने वाली श्रेष्ठा ठाकुर ने कानपुर से एमबीए की और फिर साल 2012 में provincial police services (PPS) पास किया। एक इंटरव्यू में श्रेष्ठा ने कहा था कि ‘मेरा मानना है कि वर्दी में एक महिला पूरी तरह से सुरक्षित रहती है।

जब एक महिला यूनिफॉर्म में होती हैं तो अलग तरह महसूस होता है। जब मैं स्कूल में थी उस वक्त भी मैं कुछ भी गलत बर्दाश्त नहीं करती थी। यहीं वजह थी कि मैंने पुलिस फोर्स ज्वायन करने का फैसला किया।’ उन्होंने कहा था कि उनके परिजनों ने हमेशा उन्हें सिखाया है कि वो ईमानदार रहें। श्रेष्ठा ठाकुर के भाई मनीष प्रताप रेलवे में IES अधिकारी रहे हैं। श्रेष्ठा अपने भाई को अपना पहला रोल मॉडल भी मानती हैं।

लोगों के बीच जाकर काम करने की उनकी बेहतरीन कला की वजह से ही आम जनता के बीच काफी लोकप्रिय हुईं। बहराइच में कार्यालाय ज्वायन करने के बाद उन्हें बाढ़ प्रभावित इलाकों में काम करने का अवसर मिला। श्रेष्ठा ठाकुर ने इसे चुनौती के तौर पर लिया। जल्दी ही उन्होंने अपने दोस्तों के साथ मिलकर यहां के लोगों के लिए सोशल वर्क और चैरिटी भी शुरू कर दिया। जिसकी वजह से वो जल्दी ही इस इलाके में काफी मशहूर हो गईं। कई दिनों तक वो बाढ़ प्रभावित लोगों को मदद के तौर पर कपड़ा, खाना औऱ पैसे देती रहीं।

इतना ही नहीं श्रेष्ठा ठाकुर लड़कियों को आत्मरक्षा का गुर भी सिखाया करती थीं। लोगों के बीच वो कितनी पॉपुलर हैं इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया अकाउंट पर उनके फॉलोअर्स की संख्या हजारों में है।

 

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