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ओडिशा गैंगरेप कांड: CM को देना पड़ा था इस्तीफा, 22 साल बाद धरा गया IFS अधिकारी की पत्नी से दुष्कर्म का आरोपी

मुख्य आरोपी ने फर्जी नाम से अपना एक आधार कार्ड बनवा लिया था और महाराष्ट्र के एक बैंक में खाता भी खुलवा लिया था।

Author Edited By Nishant Nandan Updated: February 23, 2021 10:41 AM
arrestedतस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है। फोटो सोर्स- (indian express)।

गैंगरेप के जिस कांड ने कभी ओडिशा सरकार की कुर्सी हिला दी थी अब 22 साल बाद इस कांड के आरोपी को पकड़ा जा सका है। याद दिला दें कि इस गैंगरेप कांड को लेकर साल 1999 में सरकार ओडिशा सरकार की इतनी किरकिरी हुई थी कि तत्कालीन मुख्यमंत्री जे बी पटनायक को अपने पद से इस्तीफा तक देना पड़ा था। अब सोमवार (23-02-2021) को इस कांड के मुख्य आरोपी को महाराष्ट्र से गिरफ्तार किया गया है।

9 जनवरी 1999 को एक IFS अधिकारी की पत्नी अपनी कार से कटक से भुवनेश्वर जा रही थीं। उस वक्त उनकी कार रास्ते में खराब हो गई और फिर उनके साथ इस घिनौनी वारदात को अंजाम दिया गया था। पीड़िता की उम्र 29 साल थी। इस मामले में उस वक्त सियासी बवाल खड़ा हो गया जब पीड़िता ने इस मामले में सीएम पटनायक और पूर्व एडवोकेट जनरल इंद्रजीत रॉय के भूमिका होने की बात कही थी। हालांकि जो FIR दर्ज हुई थी उसमें इन आरोपों का जिक्र नहीं था। लेकिन इस सियासी बवाल की वजह से मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा था।

17 दिन बाद आरोपी धराए:

गैंगरेप की इस वारदात के करीब 17 दिन बाद मामले के 2 आरोपी प्रदीप साहू और धीरेंद्र मोहंती को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। हालांकि मुख्य आरोपी बिबेकानंद बिसवाल उर्फ बीबन गिरफ्तारी से बच गया और करीब 2 दशक तक पुलिस की आंखों में धूल झोंकता रहा। सोमवार को भुवनेश्वर-कटक के पुलिस कमिश्नर सुधांशु सारंगी ने बताया कि बिबेकानंद बिसवाल को लोनावला से गिरफ्तार कर लिया गया है, वो यहां प्लंबर के तौर पर काम कर रहा था।

‘Operation Silent Viper’ से मिली कामयाबी:

सुधांशु सारंगी ने बताया कि ’22 साल पुराने इस गैंगरेप कांड के आरोपी को पकड़ने के लिए हमने Operation Silent Viper चलाया था। आरोपी के महाराष्ट्र में छिपे होने की गुप्त जानकारी मिलने के बाद हमारी टीम काफी सक्रिय हो गई। वो एक रेस्टुरेंट में जालंधर स्वैन नाम से अपनी पहचान छिपा कर काम कर रहा था।’

बता दें कि साल 2002 में अदालत ने साहू और मोहंती को उम्रकैद को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। पिछले ही साल फरवरी के महीने में साहू ने सीने में दर्द की शिकायत की थी। भुवनेश्वर अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। ओडिशा हाईकोर्ट के आदेश के बाद सीबीआई ने इस मामले को टेक ओवर किया। लेकिन जांच के दौरान मुख्य आरोपी को लेकर कोई जानकारी नहीं मिल पा रही थी। अभी तीन महीने पहले ही ओडिशा कमिशनरेट पुलिस ने इस केस की फाइल दोबारा खोली थी।

मृत्यु प्रमाण पत्र पाने की थी कोशिश:

सुधांशु सारंगी ने बताया कि ‘इस मामले के एक सजायाफ्ता से मेरी मुलाकात जेल में हुई थी और तब मुझे पता चला कि इस कांड का मुख्य आरोपी अभी भी फरार है। इसलिए हमने इस केस की फाइल दोबारा खोली और उसे पकड़ने की कोशिश में जुट गए। उसने बताया था कि बीबान को बीके के नाम से भी जाना जाता है और फिर हमें आरोपी के महाराष्ट्र में छिपे होने की सूचना मिली।

मुख्य आरोपी ने फर्जी नाम से अपना एक आधार कार्ड बनवा लिया था और महाराष्ट्र के एक बैंक में खाता भी खुलवा लिया था। यह भी जानकारी मिली कि वो अपने परिवार के टच में था और किसी तरह अपने असली नाम से मृत्यु प्रमाण पत्र बनवाना चाहता था ताकि वो हमेशा के लिए खुद की पहचान छिपा सके।

पीड़िता ने बयां किया दर्द:

मुख्य आरोपी के पकड़े जाने के बाद अब पीड़िता ने कहा है कि ‘इतने सालों तक मैं खुद को मरा हुआ महसूस कर रही थी। हर दिन एक संघर्ष था, क्योंकि मैं जानती थी कि मेरे गुनहगार आजाद है। मैं चाहती हूं कि उसे मौत की सजा मिले।’

गैंगरेप की इस वारदात से 2 साल पहले साल 1997 में पीड़िता ने एडवोकेट जनरल पर छेड़खानी का आरोप लगाया था। उन्होंने इस मामले में दुष्कर्म के प्रयास के तहत केस भी दर्ज कराया था। पीड़िता ने मुख्यमंत्री पटनायक पर आरोप लगाया था कि वो एडवोकेट जनरल को संरक्षण दे रहे हैं। इन आरोपों के बाद एडवोकेट जनरल ने साल 1998 में अपने पद से इस्तीफा दिया था और सीबीआई ने उनके खिलाफ चार्जशीट फाइल किया था।

पीड़िता का आरोप था कि गैंगरेप पूर्वनियोजित था और चार्जशीट हटाने के लिए उन्हें डराने के मकसद से ही इस कांड को अंजाम दिया गया था। फरवरी 2002 में सीबीआई की एक अदालत ने रॉय को तीन साल जेल की सजा सुनाई थी।

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