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आतंकियों से तार जुड़े होने के शक में NIA ने पकड़ा, BJP बोली- 2018 में ही कर दिया था बाहर

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देविन्दर सिंह के साथ पकड़े गए नवीद बाबू ने पूछताछ के दौरान सबसे पहले तारिक मीर का नाम लिया था और कहा था कि मीर ही उनके ग्रुप को हथियारों की सप्लाई किया करते थे।

मामले में जांच एजेंसी आगे की जांच कर रही है। फाइल फोटो/सांकेतिक तस्वीर

राष्ट्रीय जांच एजेंसी ने जम्मू-कश्मीर के एक राजनेता को गिरफ्तार किया है। NIA ने इस राजनेता को खूंखार आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन से संपर्क होने के शक में गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार किये गये राजनेता का नाम तारिक अहमद मीर बताया जा रहा है। तारिक शोपियां जिले के वांची गांव के ग्राम प्रधान भी हैं। साल 2014 में भारतीय जनता पार्टी (BJP) की टिकट पर तारिक विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। इतना ही नहीं साल 2014 में चुनाव के दौरान श्रीनगर में हुई एक रैली में वो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ मंच पर भी नजर आए थे।

हालांकि तारिक अहमद मीर को पकड़े जाने के बाद भगवा पार्टी ने अपना स्टैंड भी साफ किया है। जम्मू-कश्मीर बीजेपी की तरफ से कहा गया है कि तारिक को 2 साल पहले पार्टी से निकाल दिया गया था और उनके आतंकी संगठन से कनेक्शन का पार्टी से कोई लेना-देना नहीं है।

पार्टी के प्रवक्ता अल्ताफ ठाकुर ने साफ किया है कि ‘अक्टूबर 2018 में तारिक को पार्टी से निकाल दिया गया था और हमें नहीं पता कि उन्हें साल 2014 में कैसे पार्टी से टिकट मिल गया था।’

आपको याद दिला दें कि इसी साल जनवरी के महीने में जम्मू-कश्मीर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी देविन्दर सिंह को आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन को हथियार सप्लाई करने के आरोप में पकड़ा गया था।

इसी मामले की जांच के दौरान अब तारिक मीर को एनआईए ने पकड़ा है। तारिक मीर को गुरुवार (30 अप्रैल, 2020) को एनआईए कोर्ट में पेश किया गया था जहां उन्हें पूछताछ के लिए 6 दिनों की पुलिस रिमांड पर भेजा गया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देविन्दर सिंह के साथ पकड़े गए नवीद बाबू ने पूछताछ के दौरान सबसे पहले तारिक मीर का नाम लिया था और कहा था कि मीर ही उनके ग्रुप को हथियारों की सप्लाई किया करते थे। आपको बता दें कि देविन्दर सिंह की गिरफ्तार को सुरक्षा एजेंसियां बड़ी कामयाबी बताती आई हैं।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि देविन्दर सिंह की पहुंच काफी ऊपर तक है और उसके लिंक भी काफी गहरे हैं। फिलहाल अब जांच एजेंसी इस मामले में आगे की कार्रवाई में जुटी हुई है।

एक दिलचस्प बात यह भी है कि आतंकी हमले के खतरे को देखते हुए कभी तारिक मीर को सुरक्षा भी प्रदान की गई थी। हालांकि पिछले साल उन्हें मिली सुरक्षा वापस ले ली गई थी।

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