3 महीने में ढूंढ निकाले 76 लापता बच्चे, 2 नदियां लांघ बच्चे को जिंदा बरामद करने वाली जाबांज सीमा ढाका की कहानी

काम के दौरान अपनी चुनौतियों का जिक्र करते हुए इस महिला अधिकारी ने बताया था कि लॉकडाउन की वजह से ट्रेनें नहीं चल रही थीं और उन्हें दिल्ली से बाहर जाने में थोड़ी परेशानी आती थी।

crime, crime newsइस महिला अफसर की बहादुरी के किस्से काफी मशहूर हैं। फोटो सोर्स – सोशल मीडिया

महिला पुलिस अधिकारियों की जाबांजी के किस्से कई बार मशहूर हुए। आज हम एक ऐसी ही महिला पुलिस अधिकारी का यहां जिक्र कर रहे हैं जिनकी दिलेरी ने सभी को हैरान कर दिया था। दिल्ली पुलिस की इस अफसर का नाम सीमा ढाका है। सीमा ढाका ने अपनी बेमिसाल बहादुरी दिखाते हुए 76 लापता बच्चों को महज 3 महीने में ढूंढ निकाला था। उनकी इस उपलब्धि को देखते हुए उन्हें साल 2020 में आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया था। एक बार साक्षत्कार के दौरान एक न्यूज चैनल से सीमा ढाका ने कहा था कि ‘जब हम पुलिस फोर्स ज्वायन करते हैं, तब हमें चुनौतियों के बारे में अच्छे से जानकारी होती है…हमें अपनी जिंदगी को लेकर खतरे के बारे में भी जानकारी होती है। लेकिन इससे हमारे दृढ़ निश्चय में कोई बदलाव नहीं आता है।’

सीमा ढाका नॉर्थवेस्ट दिल्ली के समयपुर बादली पुलिस स्टेशन में हेड कॉन्स्टेबल के पद पर पोस्टेड थीं। उनके बेहतरीन काम की वजह से उन्हें प्रोमोशन देकर असिस्टेंट सब-इंस्पेक्टर बनाया गया था। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के शामली जिले की रहने वाली सीमा ढाका के पिता पेशे से किसान हैं। सीमा ढाका ने रोहिणी में तैनात एक पुलिसकर्मी से शादी रचाई थी।

सीमा ढाका दिल्ली पुलिस की पहली ऐसी पुलिसकर्मी बनीं, जिन्हें लापता बच्चों को ढूंढने पर आउट ऑफ टर्न प्रमोशन दिया गया था। बारी से पहले तरक्की पाकर हवलदार से एएसआई बनी सीमा ढाका की पुलिस महकमे में काफी प्रशंसा हुई थी। सीमा ने न केवल दिल्ली में लापता बच्चों को ढूंढा है, बल्कि पंजाब व पश्चिमी बंगाल से भी लापता बच्चों को ढूंढा है। सीमा ढाका ने कुल 76 लापता बच्चों का पता लगाया है। इन बच्चों को दिल्ली और अन्य राज्यों से खोजा गया था। इनमें से 56 बच्चों की उम्र 14 साल से कम थी।

सीमा ढाका को इस काम में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने इन सभी चुनौतियों का डटकर सामना किया। पश्चिम बंगाल का रहने वाला 7 साल का एक बच्चा 5 सालों से लापता था। इस बच्चे को ढूंढने के लिए सीमा ढाका ने 2 नदियों को लांघा और फिर वो उस गांव में पहुंच गईं जहां वो अपने एक रिश्तेदार के घर पर पहुंचा था।

काम के दौरान अपनी चुनौतियों का जिक्र करते हुए इस महिला अधिकारी ने बताया था कि लॉकडाउन की वजह से ट्रेनें नहीं चल रही थीं और उन्हें दिल्ली से बाहर जाने में थोड़ी परेशानी आती थी। कुछ लापता बच्चों के माता-पिता लॉकडाउन की वजह से पलायन कर गए थे ऐसे में उनसे संपर्क साधना भी काफी कठिन था। लेकिन तमाम कठिनाइयों के बावजूद सीमा ढाका अपने काम में लगन से जुटी रहीं और फिर उन्हें इसका इनाम भी मिला।

 

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