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‘कुर्बानी दिए जाने वाला पशु है’, पत्रकार खशोगी को रेत कर काटने का ऑडियो क्लिप आया सामने

रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने मरने से पहले अपने हत्यारों से अंतिम शब्द के तौर पर कहा था कि 'मेरा मुंह बंद मत करो मुझे अस्थमा है।'

Author Published on: September 12, 2019 1:32 PM
हत्या से पहले खशोगी कहते हैं कि ‘मेरा मुंह बंद मत करो मुझे अस्थमा है।’ फोटो सोर्स – Indian Express

‘कुर्बानी दिए जाने वाला पशु है।’ एक पत्रकार की हत्या से पहले उसके लिए यहीं शब्द कहे गये थे। कथित तौर पर इसके बाद उसे कई टुकड़ों में काट दिया गया और इन टुकड़ों को बैग में भर ठिकाने लगा दिया गया। तुर्की के एक अखबार ने सऊदी अरब के पत्रकार जमाल खशोगी की मौत के मामले में नया खुलासा किया है।

तुर्की अखबार ‘The Sabah’ ने सऊदी पत्रकार खशोगी की मौत से कुछ समय पहले का एक ऑडियो क्लिप जारी किया है। अखबार का दावा है कि तुर्की इंटेलिजेंस ने इसका ट्रांसक्रिप्ट किया है। दावा यह भी है कि इस ऑडियो क्लिप में मौत से पहले खगोशी के द्वारा कहे गये अंतिम शब्द भी हैं।

‘कुर्बानी दिए जाने वाला पशु है।’: इस रिकॉर्डिंग से जुड़ी नई रिपोर्ट में कई बड़े खुलासे हुए हैं। फॉरेंसिक एक्सपर्ट की टीम ने भी इसकी जांच की है। दावों के मुताबिक इस क्लिप में पत्रकार को कुर्बानी के लिए पशु बताया गया है। अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक खशोगी के आने से पहले कुछ लोग उन्हें ‘कुर्बानी दिए जाने वाला पशु है’ कह रहे हैं।

‘The Sabah’ ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि जब खशोगी दूतावास में थे तो खतरे का अंदेशा था और उनसे कहा गया था कि वो रियाद लौट जाएं क्योंकि इंटरपोल का यहीं आदेश है लेकिन पत्रकार ने इससे इनकार कर दिया था। अखबार के मुताबिक उन्होंने अपने बेटे को मैसेज भी भेजा था।

रेत कर काटने की आवाज होने का दावा: रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने मरने से पहले अपने हत्यारों से अंतिम शब्द के तौर पर कहा था कि ‘मेरा मुंह बंद मत करो मुझे अस्थमा है।’ चेहरे के ऊपर एक बैग रखकर खशोगी का दम घोंटा गया था। इस रिकॉर्डिंग में खशोगी को रेत कर टुकड़ों-टुकड़ों में काटने की आवाज भी है।

जानकारी के मुताबिक पिछले साल ही यह ऑडियो क्लिप सामने आ चुका था। तुर्की अधिकारियों ने कहा है कि उन्होंने इस क्लिप को अंतरराष्ट्रीय सरकारों के साथ साझा किया था लेकिन यह साफ नहीं हुआ है कि अखबार को यह ऑडियो क्लिप कैसे मिला…?

दूतावास से हुए गायब: बता दें कि पिछले साल 2 अक्टूबर को जमाल खशोगी इस्तानबुल स्थित सऊदी दूतावास के अंदर गए थे। उस वक्त उनकी मंगेतर बाहर खड़ी होकर उनका इंतजार कर रही थीं। दरअसल वो यहां कुछ सरकारी कागजात लेने आए थे ताकि वो तुर्की की रहने वाली अपनी मंगेतर से शादी कर सकें। हालांकि दूतावास के अंदर जाने के बाद बाद खशोगी कभी नजर नहीं आए।

4 अक्टूबर को सऊदी अरब की तरफ से एक बयान में कहा गया था कि खशोगी दूतावास से निकलने के बाद लापता हुआ थे और वो यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि उनके साथ क्या हुआ…? बता दें कि खशोगी की मौत को अब लगभग 1 साल होने को हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद उनकी डेड बॉडी बरामद नहीं हुई है। इस मामले में सऊदी अरब सरकार पर कई गंभीर आरोप लगे हैं लेकिन इन सभी आरोपों से यहां की सरकार हमेशा इनकार करती रही है।

सऊदी अरब सरकार के सबसे बड़े आलोचकों में से एक जमाल खशोगी ने लापता होने से पहले वॉशिंगटन पोस्ट में एक कॉलम लिखा था। सऊदी अरब ने पत्रकार की हत्या के बाद बताया था कि इस ऑपरेशन को कुछ बदमाशों ने अंजाम दिया है और यहां की सरकार ने इस मामले में 11 लोगों पर ट्रायल भी चलाया था। (और…CRIME NEWS)

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