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दर्जी से बन गया डॉन दाऊद इब्राहिम का खासमखास, इश्क में मारा गया था बड़ा राजन

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बड़ा राजन का साम्राज्य चेंबूर के तिलक नगर इलाके से चलता था। इतना ही नहीं छोटा राजन को अंडरवर्ल्ड की दुनिया में लाने वाला भी बड़ा राजन ही था।

crime, crime newsछोटा राजन। फाइल फोटो। फोटो सोर्स- PTI

कई सालों पहले मुंबई में एक दर्जी था। इस दर्जी का नाम राजन महादेव नायर था। दर्जी का काम करने वाले राजन नायर की कमाई उस वक्त हर रोज 25-30 रूपए तक की होती थी। राजन नायर की एक गर्लफ्रेंड भी थी। बताया जाता है कि गर्लफ्रेंड की जरुरतें पूरी करने के लिए राजन नायर ने सबसे पहले एक टाइपराइटर चुराया। इसी चोरी के बाद शुरू हुई राजन नायर के बड़ा राजन बनने और अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के खासमखास बनने की कहानी। टाइपराइटर चुराने के मामले में राजन नायर को 3 साल की जेल हुई। जेल से निकल कर राजन नायर ने अपनी एक गैंग बनाई और उसका नाम रखा ‘गोल्डन गैंग’

यहीं गैंग आगे जाकर बड़ा राजन गैंग बना और राजन नायर बन गया बड़ा राजन। बड़ा राजन के बारे में कहा जाता है कि वो अंडरवर्ल्ड की दुनिया का बड़ा राजन था। 1970-80 के दशक में बड़ा राजन का मुंबई में सिक्का चलता था। बड़ा राजन जल्दी ही अंडरवर्ल्ड के सबसे बड़े डॉन दाऊद इब्राहिम के लिए काम करने लगा। जब बड़ा राजन, दाऊद के साथ काम करने लगा तब दाऊद इब्राहिम की ताकत में बड़ा इजाफा हुआ। कहा जाता है कि दोनों तस्करी के धंधे में करीम लाला और हाजी मस्तान को टक्कर देने लगे थे। यह भी कहा जाता है कि वह अगर बड़ा राजन दाऊद के साथ न होता तो वो कभी मुंबई अंडरवर्ल्ड पर कब्जा नहीं कर सकता था।

कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक बड़ा राजन का साम्राज्य चेंबूर के तिलक नगर इलाके से चलता था। इतना ही नहीं छोटा राजन को अंडरवर्ल्ड की दुनिया में लाने वाला भी बड़ा राजन ही था। मुंबई के विक्रोली इलाके में टिकट ब्लैक करने के दौरान दोनों की मुलाकात हुई और वो अच्छे दोस्त बन गए। एक साथ काम करने की वजह से राजेंद्र सदाशिव निखलजे को लोग ‘छोटा राजन’ बुलाने लगे थे। दाऊद ने अपने गैंग में छोटा राजन को बड़ा राजन के कहने पर ही शामिल किया था। छोटा राजन उसे अपना गुरु मानता था। बड़ा राजन दाऊद के प्रॉपर्टी विवाद, बिल्डरों से फिरौती वसूलने और इसके बदले उन्हें सुरक्षा देने का काम करता था और छोटा राजन उसके काम में मदद किया करता था।

कहा जाता है कि राजन ने एक गुर्गे अब्दुल कुंजू को गैंग में जोड़ा था। कुछ दिनों बाद इसी अब्दुल कुंजू ने राजन नायर की गर्लफ्रेंड से शादी कर ली थी। इसी के बाद दोनों की दोस्ती दुश्मनी में बदल गई। बताया जाता है कि साल 1982 में पठान भाइयों ने कुंजू की मदद से अदालत के बाहर बड़ा राजन यानी राजन महादेव नायर की हत्या करा दी थी।

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