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मुंबई: IPS अधिकारी बन लूट लेता, 1200 किलोमीटर तक पीछा कर क्राइम ब्रांच ने यूं दबोचा

खुद को Indian Police Service (IPS) ऑफिसर बताकर लोगों को लूटने वाले एक फर्जी अफसर को मुंबई क्राइम ब्रांच ने धऱ दबोचा है। आरोप है कि हाल ही में इस फर्जी आईपीएस अधिकारी ने सूरत के एक व्यापारी को मरीन ड्राइव के पास स्थित एक होटल से किडनैप कर लिया था। फर्जी अफसर ने इस […]

crime, crime newsयह शख्स हमेशा आईपीएस की वर्दी में रहता था। फोटो सोर्स – ANI

खुद को Indian Police Service (IPS) ऑफिसर बताकर लोगों को लूटने वाले एक फर्जी अफसर को मुंबई क्राइम ब्रांच ने धऱ दबोचा है। आरोप है कि हाल ही में इस फर्जी आईपीएस अधिकारी ने सूरत के एक व्यापारी को मरीन ड्राइव के पास स्थित एक होटल से किडनैप कर लिया था। फर्जी अफसर ने इस बिजनेसमैन को लालच दिया था कि वो Directorate Of Revenue Intelligence में उनके खिलाफ चल रहे एक मामले का निपटारा कर देगा और इसके लिए उसने उनसे 16 लाख रुपए की डिमांड की थी।

38 साल के इस फर्जी आईपीएस अफसर की पहचान शिव शंकर शर्मा के तौर पर हुई है। पुलिस ने उसे गिरफ्तार करने से पहले गुजरात से बेंगलुरु सैकड़ों किलोमीटर का सफऱ सड़क से किया। पुलिस ने जांच में बताया है कि वो लूटपाट की रकम का इस्तेमाल अय्याशी का जीवन जीने के लिए करता था। शिव शंकर शर्मा राजस्थान के अजमेर जिले का रहने वाला बताया जा रहा है। इसके खिलाफ सूरत के रहने वाले एक कपड़ा व्यवसायी मोहम्मद एहतेशाम असलम नवीवाला ने केस दर्ज कराया था।

क्राइम ब्रांच के अधिकारियों के मुताबिक मोहम्मद एहतेशाम को कुछ हफ्तों पहले एक फोन आय़ा और फोन करने वाले शख्स ने खुद को आईपीएस अफसर बताया था। व्यापारी पर चल रहे एक केस को सेटल करने के लिए उसने उन्हें मरीन ड्राइव के पास स्थित एक होटल में बुलाया था। होटल के कमरे में नवीवाला औऱ शिव शंकर शर्मा के बीच किसी बात को लेकर बहस हो गई।

व्यापारी के मुताबिक शिव शंकर शर्मा ने अपने गुर्गों के साथ मिलकर उन्हें पहले होटल के कमरे में बंद कर दिया और फिर बंदूक की नोंक पर उनका अपहरण कर उन्हें गुजरात ले गया ताकि वो उनके घरवालों से फिरौती मांग सके। नवीवाला के मुताबिक उन्हें काफी प्रताड़ित किया गया था और फिरौती की रकम चुकाने के बाद ही किडनैपर्स ने उन्हें छोड़ा।

किडनैपर्स के चंगुल से निकलने के बाद नवीवाला ने पहले गुजरात औऱ फिर मुंबई पुलिस से संपर्क किया। शुरुआती जांच के बाद पुलिस ने कुछ दिनों पहले इस मामले में केस दर्ज किया और इस मामले को मुंबई क्राइम ब्रांच को सौंप दिया गया।

पुलिस ने सर्विलांस और तकनीक के माध्यम से शंकर शर्मा के ठिकाने के बारे में पता लगाना शुरू किया। पुलिस ने शर्मा को तलाशने के लिए अपने कुछ भरोसेमंद मुखबिरों की भी मदद ली। पुलिस को सबसे पहले शर्मा के गुजरात में होने की सूचना मिली। लेकिन क्राइम ब्रांच के उस तक पहुंचने से पहले उसने अपना ठिकाना बदल लिया।

इसके बाद उसका लोकेशन मुंबई महाराष्ट्र के रूट पर नजर आया। हालांकि बाद में आरोपी के फ़ोन बंद कर लेने से उसे ट्रेस करना मुश्किल हो रहा था। ऐसे में क्राइम ब्रांच की टीम दोबारा मुंबई होते हुए कर्नाटक हुबली के रूट तक पहुंच गई। पुलिस को यहां शिव शंकर शर्मा के लोकेशन का पता चला था। कर्नाटक हुबली के हाईवे पर पुलिस उसका इंतजार कर रही थी। जैसे ही एक लग्जरी बस आई शक की बुनियाद पर उसको रोक कर पुलिस ने तलाशी ली तो फर्जी आईपीएस अधिकारी उनकी गिरफ्त में आ गया।

क्राइम ब्रांच की टीम ने 1200 किलोमीटर तक उसका पीछा किया और फिर उसे पकड़ने में सफलता हासिल की। शिव शंकर शर्मा पर धारा 170, 120B. 323, 342, 364A, 386, 504, और 34 समेत अन्य कई धाराओं में केस दर्ज किया गया है। यह भी खुलासा हुआ है कि शिव शंकर शर्मा एक हिस्ट्रीशीटर रहा है। मध्य प्रदेश में इसी तरह आईपीएस बनकर लाखों रुपए ठगने के जुर्म में वो पहले भी गिरफ्तार हो चुका है। शर्मा ने गुजरात पुलिस की एक महिला अफसर को भी शादी का झांसा देकर ठगा था।

पुलिस ने खुलासा किया है कि शिव शंकर शर्मा विलासिता की जिंदगी गुजरता था। वो आईपीएस की वर्दी पहनता था। वो एक कार में चलता था और बंदूक की खोल भी कार में रखता था। वो खुद को पुलिस के बड़े अधिकारियों औऱ कुछ मंत्रियों का करीबी बताकर लोगों को डराता और उनसे पैसे लूटता था।

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